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इसलामी देश ग़ुस्से में, फ़्रांस की चीजों का बायकॉट क्यों?

फ़्रांस में पैगंबर मुहम्मद के विवादित और आपत्तिजनक कार्टून दिखाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। यह मामला अब फ्रांस तक सीमित नहीं रह गया है, कई मुसलिम-बहुल देशों ने इस पर एकजुट होकर इसे इसलामोफ़ोबिया से जोड़ा है और पेरिस का ज़बरदस्त विरोध किया है।
मामला इतना बढ़ गया है कि इन इसलामी देशों ने फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार की अपील कर दी है। सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और पाकिस्तान और दूसरे मुसलिम देश आगबबूला हैं। उधर, बांग्लादेश जैसे देश में हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 
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क्या है मामला?

बता दे कि फ्रांस की राजधानी पेरिस के निकट के एक स्कूल में सैमुएल पैटी नामक शिक्षक ने धर्म पढ़ाते हुए पैगंबर का एक कार्टून दिखा दिया। यह वह कार्टून था, जिसे व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो ने प्रकाशित किया था, जिसके बाद इसलामी कट्टरपंथियों ने पत्रिका के दफ़्तर में घुस कर 11 लोगों की हत्या कर दी थी। 
इस बार कार्टून दिखाने पर फिर हिंसक प्रतिक्रिया हुई। चेचन्या मूल के एक व्यक्ति ने उस स्कूल में घुस कर सैमुएल पैटी का गला काट हत्या कर दी। 

क्या कहा था मैक्रों ने?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमान्युएल मैक्रों ने इसे इसलामी आतंकवाद क़रार देते हुए कहा था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। मैक्रों ने शिक्षक को इसलामिक आतंकवादी हमले का पीड़ित बताया है और कहा है कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के समर्थक हैं। उन्होंने हमलावर को 'इस्लामी आतंकवादी हमला' क़रार दिया है। 
बीबीसी के अनुसार, मैंक्रों ने नागरिकों से हिंसा के विरोध में एकजुट होने की अपील की है और कहा है आतंकवाद कभी जीत नहीं सकता। मैक्रों ने कहा था,

'कॉन्फ्लैन्स सौं होनोरी में शाम को क्या हुआ मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता, लेकिन आज हमारे एक नागरिक को मार दिया गया। उन्होंने अपने छात्रों को अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में बताया। उन्होंने उन्हें हर मुद्दे पर सोचने और यकीन करने की आज़ादी के बारे में बताया। उन पर हुआ हमला कायराना हरकत है और वो 'इस्लामी आतंकवादी हमले से पीड़ित हैं।'


इमान्युएल मैक्रों, राष्ट्रपति, फ्रांस

इस पर बवाल मचा हुआ है। सऊदी अरब सरकार ने मंगलवार को इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है, “वह इसलाम को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिशों को खारिज करती है और पैगंबर के आपत्तिजनक कार्टून दिखाने जाने का विरोध करती है।”

सऊदी अरब

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सरकारी मीडिया को कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता  दूसरों के सम्मान सहिष्णुता और शांति से जुड़ी होनी चाहिए।”
सऊदी अरब के व्यापारियों के शीर्ष संगठन ने फ्रांसीसी उत्पादों के बायकॉट का समर्थन किया है। इसके पहले सोशल मीडिया पर फ्रांसीसी खुदरा व्यापार कंपनी कारफ़ोर से सामान नहीं खरीदने की अपील ट्रेंड कर रही थी। 

तुर्की

तुर्की के राष्ट्रपति रिचप तैय्यप अर्दोआन ने भी फ्रांसीसी उत्पादों के बायकॉट का समर्थन किया है। उन्होंने सरकारी टेलीविज़न पर भाषण देते हुए कहा, "अगर फ़्रांस में मुसलमानों का दमन होता है तो दुनिया के नेता मुसलमानों की सुरक्षा के लिए आगे आएँ। फ़्रांसीसी लेबल वाले सामान ना ख़रीदें, उन्हें भाव न दें।" 
अर्दोआन ने कहा कि फ़्रांस में मुसलमानों के ख़िलाफ़ ऐसा ही अभियान चलाया जा रहा है, जैसा दूसरे विश्व युद्ध से पहले यहूदियों के ख़िलाफ़ चलाया गया था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 

“यूरोपीय देशों के नेताओं को फ़्रांस के राष्ट्रपति से कहना चाहिए कि वह अपना नफ़रत भरा अभियान बंद करें।”


रिचप तैय्यप अर्दोआन, राष्ट्रपति, तुर्की

ईरान

ईरानी संसद की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की कोशिश ‘एक बड़ी योजना का हिस्सा है और मैक्रों फ़्रांस के लोगों में इसलाम के प्रति बढ़ते आकर्षण को रोकना चाहते हैं।’
उस बयान में यह भी कहा गया है कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति ‘अपनी इस कोशिश में कामयाब नहीं होंगे और मुसलिम देश इसलाम और पैग़ंबर मुहम्मद के अपमान के ख़िलाफ़ खड़े होंगे।’ मामला यहीं तक नहीं रहा। एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय ने फ़्रांसीसी राजयनिक को बुलाकर मैक्रों के बयान के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया है। 

पाकिस्तान

पाकिस्तान की संसद ने भी एक प्रस्ताव पारित कर माँग की है कि सरकार फ़्रांस में मौजूद अपने राजदूत को वापस बुला ले। पाकिस्तान की नैशनल असेंबली ने पैग़ंबर मुहम्मद के कार्टून को लेकर राष्ट्रपति मैक्रों की आलोचना की और उन पर इसलाम के प्रति नफ़रत फैलाने का आरोप भी लगाया।
इस बीच पाकिस्तान सरकार ने इसलामाबाद स्थित फ़्रांसीसी राजदूत को बुलाकर विरोध भी दर्ज किया है। पाकिस्तानी संसद ने अपने प्रस्ताव में सरकार से यह भी अपील की है कि वह दूसरे मुसलिम देशों से भी फ़्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार के लिए कहे। 

इमरान का हमला

बता दें कि सोमवार को ही पाकिस्तानी  प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था कि मैक्रों इसलाम की किसी स्पष्ट समझ के बिना ही इस धर्म पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था, 

"राष्ट्रपति मैक्रों ने यूरोप और दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं पर हमला किया है और उन्हें चोट पहुँचाई है।"


पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का ट्वीट

उसके भी पहले पिछले हफ़्ते इमरान ख़ान ने फ़ेसबुक प्रमुख मार्क ज़करबर्ग को पत्र लिखकर अपने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म से इसलाम विरोधी सामग्री हटाने और इस तरह की सामग्री की पोस्टिंग पर प्रतिबंध लगाने की अपील भी की थी। 
फ़्रांस के बाद जॉर्डन, क़तर और कुवैत ने भी फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की है। 
दूसरी ओर, कई मुसलिम बहुल देशों में आम जनता सड़कों पर उतर आई है और फ्रांस के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। लीबिया, इज़रायल की ग़ज़ा पट्टी और उत्तरी सीरिया में फ़्रांस के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लीबिया के विदेश मंत्रालय ने माँग की है कि फ़्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों माफ़ी माँगें। इसी तरह बांग्लादेश में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। 

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