ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अब उनके ही कुछ सलाहकारों का दबाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी अख़बार The Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के कुछ करीबी सलाहकार निजी तौर पर उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वे ईरान युद्ध से बाहर निकलने के लिए एक स्पष्ट एग्जिट प्लान सार्वजनिक रूप से पेश करें। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट का खंडन किया लेकिन ट्रंप के दो बयान ने इसकी पुष्टि कर दी। उन्होंने सोमवार को कहा कि ईरान युद्ध बहुत जल्द खत्म होगा। हम युद्ध में समय से आगे चल रहे हैं।
वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सलाहकारों का मानना है कि अमेरिकी सेना ने इस अभियान में अपने कई प्रमुख सैन्य लक्ष्य काफी हद तक हासिल कर लिए हैं, इसलिए अब जनता के सामने यह संदेश देना जरूरी है कि युद्ध का उद्देश्य लगभग पूरा हो चुका है।

युद्ध के घोषित लक्ष्य क्या हैं

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस युद्ध के मुख्य लक्ष्य कई स्तरों पर तय किए गए थे। इनमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना, उसकी नौसेना को कमजोर करना, मध्य-पूर्व में ईरान द्वारा समर्थित प्रॉक्सी समूहों की सैन्य क्षमता को खत्म करना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना शामिल है।
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अमेरिका और उसके सहयोगी इज़राइल पिछले कुछ समय से ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल बेस और नौसैनिक सुविधाओं को निशाना बनाते हुए लगातार हमले कर रहे हैं। पेंटागन के आकलन के अनुसार इस युद्ध अभियान पर अमेरिका का खर्च करीब 1 अरब डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राजनीतिक माहौल पर भी असर पड़ रहा है।

लंबा युद्ध ट्रंप के लिए राजनीतिक जोखिम

रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप के कुछ सलाहकारों को चिंता है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इससे राष्ट्रपति की लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के अधिकांश नेता ईरान पर सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर भी आने वाले मिडटर्म चुनावों को लेकर चिंता जताई जा रही है। खतरा यह है कि ट्रंप के समर्थक उनका साथ छोड़ सकते हैं। क्योंकि महंगाई को लेकर अमेरिकी जनमत ट्रंप के खिलाफ होता जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई रिपब्लिकन नेताओं ने सलाहकारों से फोन पर संपर्क कर पूछा है कि युद्ध का राजनीतिक असर क्या होगा और इससे मतदाताओं का रुख किस दिशा में जा सकता है।

महंगाई और तेल की कीमतें भी चिंता का कारण

ईरान के साथ संघर्ष बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। अमेरिका में पेट्रोल और गैस की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। यही वजह है कि ट्रंप के कुछ सलाहकार चाहते हैं कि सरकार युद्ध को लेकर ज्यादा आक्रामक सार्वजनिक संदेश रणनीति अपनाए ताकि जनता को यह विश्वास दिलाया जा सके कि यह अभियान जरूरी और सफल है। यही वजह है कि ट्रंप लगातार यह बयान दे रहे हैं कि ईरान यह युद्ध हार गया है। साथ ही वो रोज़ाना कम से कम एक बार ईरान को कड़ी से कड़ी धमकी दे डालते हैं।

सर्वे ने ट्रंप सलाहकारों की नींद उड़ाई

हालिया जनमत सर्वे के अनुसार अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर सिर्फ 25 फीसदी ने इसका समर्थन किया। कई सर्वे बताते हैं कि समर्थन और विरोध काफी हद तक पार्टी लाइनों के आधार पर बंटा हुआ है। रिपब्लिकन मतदाताओं में समर्थन अधिक है, जबकि डेमोक्रेटिक समर्थकों में विरोध ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि रॉयटर्स के सर्वे में साफ कहा गया था कि ज्यादातर लोग युद्ध के खिलाफ हैं।

युद्ध कब खत्म होगा?

प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जब तक ईरान क्षेत्रीय देशों पर हमले करता रहेगा और इसराइल ईरान के अंदर सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई जारी रखना चाहेगा, तब तक युद्ध खत्म होने की संभावना कम है। ईरान इस बात को बार-बार दोहरा रहा है कि वो किसी भी हालत में इस युद्ध को बिना अपनी मर्जी खत्म नहीं होने देगा। शुरुआत अमेरिका-इसराइल ने की है लेकिन खत्म ईरान करेगा। युद्ध खत्म होने की समय सीमा का अंदाजा न होने के कारण अब यह आर्थिक युद्ध में बदल रहा है। जिसका असर अमेरिका, इसराइल और खाड़ी देशों पर दिख रहा है।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने Wall Street Journal को बताया कि ट्रंप तब तक सैन्य कार्रवाई रोकने के पक्ष में नहीं हैं जब तक वे इसे “संतोषजनक जीत” के रूप में पेश न कर सकें, खासकर तब जब अमेरिका को सैन्य बढ़त हासिल है। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप इस बात से हैरान हैं कि अमेरिका और इसराइल के लगातार हमलों के बावजूद ईरान अब तक पूरी तरह झुका नहीं है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर न केवल मध्य-पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट को बताया गलत

व्हाइट हाउस ने वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि यह खबर “अनाम स्रोतों पर आधारित बकवास” है और ऐसे लोग राष्ट्रपति ट्रंप के साथ किसी भी बैठक में मौजूद नहीं थे।
उन्होंने कहा कि ट्रंप के शीर्ष सलाहकार 24 घंटे इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” सफलतापूर्वक जारी रहे और सैन्य अभियान कब समाप्त होगा इसका फैसला केवल राष्ट्रपति और सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में ट्रंप ही करेंगे।