अमेरिका और इसराइल के 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले के क़रीब तीन महीने में शांति वार्ता के प्रयास तेज हुए हैं। होर्मुज़ को पूरी तरह से खोलने के ट्रंप के दावे को ईरान ने खारिज किया है। क्या ईरान इस जलमार्ग पर नियंत्रण छोड़ पाएगा?
मुजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने अब घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने वाला एक बड़ा समझौता लगभग तैयार हो गया है। ट्रंप ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल जाएगा क्योंकि समझौते में यह भी शामिल है। पाकिस्तान ने भी कहा है कि वार्ता बहुत जल्द हो सकती है। हालाँकि, ईरानी मीडिया ने शुरुआती रिपोर्टों में ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह से फिर से खुल जाएगा। उसने ज़ोर देकर कहा कि इस जलमार्ग पर नियंत्रण तेहरान के पास ही रहेगा। लेकिन बाद में ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने इस समझौते को लेकर कई जीचें साफ़ कर दी हैं।
संभावित समझौते पर ईरान ने क्या कहा?
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने के लिए संभावित सहमति पत्र के बारे में रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में ईरान के पक्ष को रखा गया है। तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने कहा है के इसे अब तक जो पता चला है, वह यह है-
- ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ संभावित सहमति पत्र यानी MOU में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने की बात शामिल है, और इसके तहत बातचीत के दौरान वाशिंगटन ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंध हटा लेगा।
- ईरान ने अभी तक अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी भी कदम को स्वीकार नहीं किया है। एजेंसी के अनुसार, इस संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए 30 दिन और परमाणु वार्ता के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है।
- ईरान ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि अमेरिका के साथ कोई भी संभावित सहमति पत्र तभी मान्य होगा, जब ईरान के ज़ब्त किए गए फंड का कम से कम कुछ हिस्सा जारी किया जाए; और यह हिस्सा बातचीत के पहले चरण में ही जारी होना चाहिए।
- तेहरान ने यह भी कहा है कि ज़ब्त की गई बाकी संपत्ति को जारी करने की प्रक्रिया को भी बातचीत के दौरान ही साफ़ तौर पर तय किया जाना चाहिए।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 'शांति समझौते के करीब' वाले संदेश में परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का ज़िक्र नहीं था। ट्रंप ने पहले अपने सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखा था, 'एक समझौता लगभग तैयार हो चुका है। अमेरिका, ईरान और कई अन्य देशों के बीच अंतिम बिंदुओं पर बात चल रही है। जल्द ही औपचारिक घोषणा की जाएगी।' ट्रंप के अनुसार, इस समझौते में कई बातें शामिल हैं और उनमें से एक अहम बात होर्मुज की खाड़ी को फिर से खोलना है। उन्होंने कहा कि अंतिम चर्चा चल रही है और बहुत जल्द इसकी घोषणा हो जाएगी।
कई देशों के नेताओं से बातचीत
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ओवल ऑफिस से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद, कतर के अमीर तमीम बिन हमाद, पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला और बहरीन के किंग हमाद समेत कई नेताओं से फोन पर बात की। ये सब बातें ईरान और क्षेत्र में शांति के लिए 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' पर केंद्रित थीं। ट्रंप ने कहा कि इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी उनकी बात बहुत अच्छी हुई है।
ट्रंप के बयान के तुरंत बाद अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने कहा था कि ट्रंप का बयान हकीकत से दूर है। इसके अनुसार होर्मुज की खाड़ी पर उसका नियंत्रण बना रहेगा। ईरान के अनुसार, अगर समझौता होता भी है तो जहाजों का रूट, समय, पास करने की प्रक्रिया और परमिट देने का अधिकार पूरी तरह ईरान के पास रहेगा। हालाँकि, बाद में तस्नीम ने ख़बर दी कि वार्ता चल रही है और इस संभावित समझौते में होर्मुज से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए 30 दिन और परमाणु वार्ता के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है।
ट्रंप दावा कुछ भी करें, लेकिन ईरान कहता है कि युद्ध से पहले जितना जहाजों का आवागमन था, उसे फिर बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी बिना रोक-टोक आ-जा सकेगा।
अगली वार्ता जल्द: शहबाज शरीफ
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने कहा है कि अब अगली वार्ता बहुत जल्द होगी। उन्होंने इन ताज़ा घटनाक्रमों के बाद एक पोस्ट में कहा, 'मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को शांति स्थापित करने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए और आज दिन में सऊदी अरब, कतर, तुर्की, मिस्र, UAE, जॉर्डन और पाकिस्तान के नेताओं के साथ एक बहुत ही उपयोगी और सार्थक टेलीफ़ोन वार्ता के लिए बधाई देता हूँ। इस टेलीफ़ोन वार्ता में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व फ़ील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर ने किया, और मैं इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके अथक प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ। इन चर्चाओं से मौजूदा क्षेत्रीय स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करने और क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के लिए जारी शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श करने का एक उपयोगी अवसर प्राप्त हुआ। पाकिस्तान पूरी निष्ठा के साथ अपने शांति प्रयासों को जारी रखेगा, और हमें आशा है कि हम बहुत जल्द ही वार्ता के अगले दौर की मेज़बानी करेंगे।'पाकिस्तान की भूमिका
ईरान ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा के बाद अमेरिका के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर काम तेज हो गया है। पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक, यह समझौता तीन चरणों में हो सकता है- संघर्ष को औपचारिक रूप से खत्म करना, होर्मुज संकट का समाधान और व्यापक समझौते के लिए 30 दिन की बातचीत। ईरान यूरेनियम सौंपने को तैयार?
अमेरिका के प्रस्तावित शांति समझौते के तहत ईरान अपने पास रखा उच्च संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक सौंपने को तैयार हो गया है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को यह जानकारी दी। हालाँकि, ईरान की ओर से यूरेनियम को लेकर इस दावे पर प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने कहा है कि उस पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। ट्रंप के 'शांति समझौते के करीब' वाले संदेश में भी परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का ज़िक्र नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने का समझौता लगभग तैयार है।
लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस डील में ईरान अपने पास मौजूद 60% एनरिच्ड करीब 400 किलोग्राम यूरेनियम को देने की सहमति दे रहा है। और अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान पहले यह यूरेनियम सौंपे। अगले 30 से 60 दिनों में इसकी पूरी योजना पर बात होगी। यूरेनियम को कैसे ट्रांसफर किया जाए या निष्क्रिय किया जाए, यह बाद में तय होगा। ईरान पहले कह चुका था कि यूरेनियम देश से बाहर नहीं भेजेगा, लेकिन अब बातचीत में बड़ा बदलाव आया है। समझौते के बाद ईरान को विदेश में फंसे अरबों डॉलर के फंड भी मिल सकते हैं, जो पुनर्निर्माण के काम में इस्तेमाल होंगे। फिलहाल बातचीत जारी है और दोनों पक्ष विस्तृत शर्तों पर काम कर रहे हैं।
अमेरिका की शर्तें मानेगा ईरान?
फिलहाल भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना सकता। स्ट्रेट बिना किसी टोल के खुला रहे और ईरान को अपना संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा। रुबियो ने कहा, 'बातचीत जारी है। आज, कल या कुछ दिनों में हम कुछ ऐलान कर सकते हैं।'
लेकिन ईरान बार-बार कह चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण यानी बिजली के लिए है, हथियारों के लिए नहीं। ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों पर रोक हटाए, तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां खत्म करे और होर्मुज पर उसका नियंत्रण बरकरार रहे। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने कहा कि इस हफ्ते विवाद कम हुए हैं, लेकिन अभी भी कई मुद्दे बाकी हैं जिन पर मध्यस्थों के ज़रिए बात हो रही है।बातचीत की राह कितनी आसान?
पिछले कुछ महीनों में ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था। ट्रंप पहले कह चुके थे कि अगर अच्छा समझौता नहीं हुआ तो ईरान को तबाह कर देंगे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि समय निकलता जा रहा है और अगर समझौता नहीं हुआ तो 'पूरी सभ्यता ख़त्म हो सकती है'। अभी स्थिति यह है कि दोनों तरफ से बातचीत जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द कोई सकारात्मक खबर आ सकती है।