अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि नई डील में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तुरंत और पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा।
अमेरिकी सेना के पास खाड़ी में कुछ खास मिसाइलों और इंटरसेप्टरों के स्टॉक कम होने की आ रही रिपोर्टों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान पर नए हमले रोक दिए हैं। उन्होंने दावा किया है कि ईरान के साथ एक नए शांति समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। ट्रंप ने कहा कि इसी वजह से उन्होंने फिलहाल ईरान पर नए सैन्य हमलों को रोकने का फ़ैसला किया है। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु विवाद खत्म करने पर सहमति बनने का दावा किया है।
ईरान के साथ शांति समझौते की ट्रंप की यह घोषणा दूसरी बार है। क़रीब डेढ़ महीने पहले ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने एक 14-बिंदुओं वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता फरवरी 2026 से चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष को ख़त्म करने के लिए था। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयां तुरंत और स्थायी रूप से बंद करना शामिल था। इसमें कहा गया था कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी नहीं देंगे और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करेंगे। समझौते में था कि दोनों देश अधिकतम 60 दिनों में अंतिम व्यापक डील पर बातचीत करेंगे। ईरान 60 दिनों तक बिना शुल्क के व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह हटाएगा। ईरान ने दोबारा पुष्टि की थी कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा या हासिल नहीं करेगा। लेकिन बाद में तनाव फिर बढ़ा और समझौते का पालन नहीं हुआ। अब फिर से ट्रंप ने शांति समझौते की बात कही है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान और पश्चिम एशिया के कुछ देशों ने अमेरिका से किसी भी नए हमले को रोकने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तुरंत और पूरी तरह खोलना तथा ईरान के परमाणु ख़तरे को समाप्त करना शामिल होगा। हालाँकि, ट्रंप के इस दावे पर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ट्रंप बोले- समझौते के लिए हमला रोका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि बातचीत सफल होती है तो यह पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम होगा। उन्होंने लिखा कि ईरान के साथ समझौते की रूपरेखा तैयार हो चुकी है और इसी कारण अमेरिका फिलहाल नए हमले नहीं करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का भविष्य और उसकी समृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि वह जल्द से जल्द इस समझौते को अंतिम रूप दे।ट्रंप के अनुसार प्रस्तावित समझौते में दो प्रमुख बिंदु शामिल हैं- होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तत्काल, पूरी तरह और स्थायी रूप से सभी जहाजों के लिए खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरे को ख़त्म करने की व्यवस्था करना।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहाँ किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।
इसराइल के सहयोग का भी दावा
ट्रंप ने कहा कि इसराइल भी इस प्रयास में अमेरिका के साथ है और दोनों देश युद्ध ख़त्म करने वाले समझौते को पूरा करने की कोशिश करेंगे। हालाँकि, इसराइल की ओर से भी इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
ट्रंप के दावों के बावजूद ईरान ने अब तक किसी शांति समझौते की पुष्टि नहीं की है। इसके उलट ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शनिवार को तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के दौरान कहा कि यदि अमेरिका या इसराइल कोई नया हमला करते हैं तो ईरान उसका निर्णायक जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि क्षेत्र का कोई अन्य देश ऐसे किसी सैन्य अभियान में शामिल होता है तो उसके ख़िलाफ़ भी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।खाड़ी देशों की चिंता क्यों बढ़ी?
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी ट्रंप से फोन पर बातचीत कर ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियान को लेकर चिंता जताई। कहा जा रहा है कि खाड़ी देशों को आशंका है कि यदि अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है तो ईरान जवाब में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य देशों के तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है।
ईरान की शीर्ष सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मीडिया संस्थान नूर न्यूज़ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला करता है तो ईरान सऊदी अरब, यूएई, क़तर और इसराइल के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इस बयान से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी।
कई सप्ताह से जारी है तनाव
पिछले कई सप्ताह से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध के और फैलने की आशंका बढ़ गई थी।ऐसे माहौल में ट्रंप का यह कहना कि हमले फिलहाल रोक दिए गए हैं और शांति समझौते की दिशा में प्रगति हुई है, एक अहम राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। हालाँकि, जब तक ईरान और इसराइल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं होती तब तक इस संभावित समझौते को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ़ नहीं मानी जा सकती है। दोनों पक्षों की अगली प्रतिक्रिया पर ही यह तय होगा कि क्षेत्र में तनाव वास्तव में कम होगा या फिर संघर्ष का नया दौर शुरू होगा।