ईरान में फँसे अपने पायलट एयरमैन को बचाने के लिए जिस अभियान को डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सामने पेश किया है, उन पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। दो अमेरिकी एयरमैन को बचाया गया, जिनका एफ़-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान पिछले हफ्ते ईरान में गिर गया था। लेकिन इस मिशन की भारी-भरकम तैयारी, जगह और कुछ घटनाओं पर संदेह जताया जा रहा है। अभियान में 155 विमान शामिल होने का दावा। बंद पड़े एयरपोर्ट पर कब्जा। और ईरान कह रहा है कि यह बचाव अभियान नहीं, बल्कि 'उच्च संवर्धित यूरेनियम' चुराने का बहाना था। तो सच क्या है?

अमेरिका का दावा क्या?

अमेरिका के मुताबिक़ 3 अप्रैल को ईरान ने एक एफ़-15ई लड़ाकू विमान को मार गिराया। यह 20 साल बाद पहली बार हुआ जब दुश्मन की गोली से अमेरिकी जेट गिरा। विमान में दो क्रू सदस्य थे। पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर यानी डब्ल्यूएसओ। पायलट को 6 घंटे में बचा लिया गया। लेकिन दूसरे एयरमैन की तलाश मुश्किल थी। वह घायल था, टखने में मोच थी, फिर भी 7000 फुट ऊँची पहाड़ी पर चढ़ गया और झाड़ियों में छिप गया। उसके पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। ईरानी सैनिक और स्थानीय लोग उसे ढूंढ रहे थे। ईरान ने उसके सिर पर 60 हज़ार डॉलर का इनाम रख दिया था। एयरमैन ने इमरजेंसी बीकन चालू किया, जिससे अमेरिका को उसकी लोकेशन मिल गई। इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े हे रहे हैं। पैर से घायल शख्स 7000 फुट ऊँची पहाड़ी कैसे चढ़ गया, जैसे सवाल उठ रहे हैं।
ताज़ा ख़बरें

155 विमानों का विशाल मिशन

ट्रंप ने दावा किया कि इस एक एयरमैन को बचाने के लिए अमेरिका ने 155 विमान भेजे। इसमें 4 बमवर्षक, 64 लड़ाकू जेट, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर, 13 रेस्क्यू एयरक्राफ्ट और कई ड्रोन। एमक्यू-9 रीपर ड्रोन ने हवा से सुरक्षा दी। अमेरिकी कमांडो ने इस्फाहान प्रांत में एक पुराना, बंद एयरस्ट्रिप कब्जा कर लिया। यह जगह ईरान के अंदर करीब 320 किलोमीटर अंदर थी। वहीं से हेलीकॉप्टर और विमान उतरे। क़रीब 100 स्पेशल फोर्स कमांडो उतरे। तो सवाल क्यों उठ रहे हैं?

दूरी का राज़

अमेरिका ने ही माना है कि एयरमैन कोहगिलुयेह और बोयेर-अहमद प्रांत में फँसा था। लेकिन बचाव अभियान इस्फाहान में हुआ, जो बहुत दूर है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघई ने एक्स पर लिखा कि जहाँ पायलट छिपा था वहाँ से लैंडिंग वाली जगह बहुत दूर है।' 

ईरान ने इसी को लेकर सवाल उठाया है कि यदि एयरमैन को बचाने के लिए अभियान था तो इस्फाहान में इन्होंने एयरबेस क्यों बनाना चुना जहाँ ईरान का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट है।

इस्फाहान क्यों?

इस्फाहान ईरान का बेहद अहम शहर है। यहाँ इस्फाहान न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर है। यह ईरान का सबसे बड़ा न्यूक्लियर रिसर्च कॉम्प्लेक्स है। यहाँ 440-970 पाउंड यानी क़रीब 200-440 किलो उच्च संवर्धित यूरेनियम स्टोर है। अमेरिका और इसराइल कहते हैं कि यह न्यूक्लियर हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

दो विमानों को खुद ही नष्ट क्यों किए?

ट्रंप ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दो एमसी-130जे कमांडो II ट्रांसपोर्ट विमान रेतीली और गीली जमीन में फंस गए। कमांडो को दूसरे विमानों से निकाला गया, लेकिन एमसी-130 को खुद ही बम से उड़ा दिया गया ताकि ईरान के हाथ न लगे।
दुनिया से और ख़बरें
लेकिन ईरान दावा करता है कि इसने इन विमानों और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को मार गिराया। अमेरिका कहता है कि इसमें 'तकनीकी खराबी' थी। लेकिन रिटायर्ड स्पेशल ऑपरेशंस अधिकारी एंथनी एगुइलर ने एक्स पर लिखा- 'एमसी-130 जैसा विमान कीचड़, बर्फ, गंदगी में आसानी से चलता है। शायद गोली लगी होगी।'

विशेषज्ञों की थ्योरी

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व सीआईए अधिकारी लैरी जॉनसन ने एक पॉडकास्ट में कहा है, 'यह एफ़-15ई नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर ग्राउंड अटैक की तैयारी कर रहा था।' इसराइली एक्सपर्ट सॉल सदका ने ट्वीट किया, 'दूसरे एयरमैन को ठीक उसी जगह से निकाला गया जहाँ ईरान का 450 किलो समृद्ध यूरेनियम रखा है। यह कहानी अजीब है।' एक और एक्स यूजर फ्रेमदग्लोब ने पूछा, 'क्या एफ़-15ई पहले से चल रहे स्पेशल फोर्स ग्राउंड ऑपरेशन को कवर दे रहा था?'

ईरान का आरोप

ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ़ कहा है, 'यह बचाव नहीं, यूरेनियम चोरी करने का बहाना था।' ईरानी सेना ने इसे 'छलावे और भागने का मिशन' बताया और दावा किया कि पूरा ऑपरेशन पूरी तरह नाकाम हो गया।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

अमेरिका का जवाब

ट्रंप ने इसे बहादुरी भरा मिशन बताया है। उन्होंने कहा कि कोई अमेरिकी सैनिक मारा नहीं गया। लेकिन इतने बड़े ऑपरेशन में एक भी हताहत न होना भी कई लोगों को संदिग्ध लगा।

सवाल क्या-क्या उठ रहे हैं?

पूरी दुनिया में चर्चा है कि यदि सिर्फ एक घायल एयरमैन को बचाना था तो 155 विमान क्यों? इतनी दूर बंद एयरपोर्ट क्यों कब्जाया? क्या सच में बचाव था या कुछ और? अभी तक अमेरिका ने कोई वीडियो, फोटो या ठोस सबूत नहीं दिखाया है। सिर्फ बयान दिए हैं।
यह मिशन अगर जैसा अमेरिका बता रहा है वैसा हुआ, तो यह हाल के इतिहास का सबसे साहसी ऑपरेशन हो सकता है। लेकिन सवाल अभी भी बाक़ी हैं। एफ़-15ई वहाँ क्या कर रहा था? इस्फाहान में लैंडिंग क्यों? और क्या असल मकसद यूरेनियम था? क्या अमेरिका इन सवालों के जवाब देगा या फिर कहानी और गहरी हो जाएगी?