ट्रंप ने कहा कि वह ईरान पर एक हमला कर सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन बात करने वाला कोई नहीं बचेगा। उन्होंने अंतिम संस्कार में रोते लोगों पर कहा कि शायद आंसू नकली हैं। ईरान ने जवाब दिया कि ट्रंप को सभ्यता, इतिहास या सम्मान की समझ नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम के बीच ईरान को फिर से चेतावनी देने वाला विवादास्पद बयान दे दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में देश के शीर्ष नेता एक ही जगह मौजूद हैं और अमेरिका चाहे तो उन्हें 'एक ही शॉट में खत्म कर सकता है।' हालाँकि ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसा नहीं करेगा, क्योंकि वह बातचीत चाहते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट Axios को दिए इंटरव्यू में कहा, 'वे सभी वहां मौजूद हैं। एक ही शॉट में हम उन सभी को खत्म कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा। वे समझौता करने के लिए बेताब हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने तक दोनों पक्षों ने बातचीत से एक सप्ताह का विराम लेने का फ़ैसला किया है और इस दौरान कोई भी पक्ष हमला नहीं करेगा।
ईरानियों के आंसू को 'नकली' बता दिया
बड़बोले ट्रंप ने खामेनेई के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और नेताओं के भावुक होने पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'मैं यह देखकर हैरान हूं कि लोग रो रहे हैं। मुझे लगा था कि लोग खामेनेई से नफरत करते थे। शायद ये नकली आंसू हों।' अली खामेनेई के अंतिम संस्कार पर लोगों के भावुक होने को लेकर ट्रंप की इस टिप्पणी पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।
ईरानी दूतावास का पलटवार
डोनाल्ड ट्रंप की इस टिप्पणी पर आर्मेनिया में ईरान के दूतावास ने एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। दूतावास ने लिखा, 'आप इन बातों को समझ ही नहीं सकते, क्योंकि आपके पास न सभ्यता है, न इतिहास और न ही सम्मान।'पहले भी कहा था- 'हमने ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी'
अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस 4 जुलाई से पहले भी ट्रंप ने ईरान पर तंज कसते हुए कहा था, 'हमने ईरान को बुरी तरह हराया। वे समझौते के लिए बेताब हैं। हमने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की छुट्टी दी, क्योंकि हम अच्छे लोग हैं।'
ईरान की US-इसराइल को चेतावनी
खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले ईरान के सैन्य अधिकारियों ने अमेरिका और इसराइल को कड़ी चेतावनी दी। खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर अली अब्दोल्लाही ने कहा, 'हम अमेरिका और इसराइल को चेतावनी देते हैं कि वे किसी भी तरह की गलतफहमी में न रहें। अगर ईरान के खिलाफ कोई हमला हुआ तो हमारी सेना उसका कड़ा और तत्काल जवाब देगी।'विदेश मंत्री ने भी दी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी कहा कि यदि ईरानी जनता या देश के नेतृत्व के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो उसका तत्काल और सख्त जवाब दिया जाएगा। उनका यह बयान तब आया है जब इसराइल के रक्षा मंत्री ने खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे मुजतबा?
ईरानी राजधानी में भारी भीड़ जमा है, लेकिन उनके बेटे और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का कोई पता नहीं है। मुजतबा खामेनेई अभी तक सबके सामने नहीं आए हैं, जिससे उनकी सेहत को लेकर शक बढ़ रहा है और यह सवाल भी उठ रहा है कि देश की कमान किसके हाथ में है। हालांकि ईरानी सरकार ने कई कार्यक्रमों की जानकारी दी है, लेकिन मुजतबा के सामने आने की कोई योजना घोषित नहीं की गई है; वैसे भी, सुरक्षा कारणों से ऐसा कोई भी फ़ैसला पहले से सार्वजनिक किए जाने की संभावना कम ही है।ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई
रिपोर्टों के मुताबिक, खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अपने पिता के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं होंगे। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अयातुल्ला हाकिम इलाही ने कहा कि इसराइल की ओर से लगातार मिल रही धमकियों और सुरक्षा ख़तरों के कारण उनकी सार्वजनिक मौजूदगी सुरक्षित नहीं मानी जा रही है।
एक सप्ताह तक चलेगा अंतिम संस्कार
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में 4 जुलाई से शुरू हुई हैं। कार्यक्रम के तहत तेहरान, क़ोम और अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी। अंतिम संस्कार का समापन 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफन के साथ होगा। इन रस्मों में लाखों लोग शामिल हो रहे हैं और इसे दुनिया की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल के संयुक्त हवाई हमलों के दौरान हुई थी। इसके बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया।
अब अंतिम संस्कार के दौरान ट्रंप के ताजा बयान और ईरान की कड़ी चेतावनी ने दोनों देशों के बीच तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। हालाँकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है।