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ट्रंप ने जी7 देशों की बैठक को स्थगित कर कहा- भारत व दूसरे देश भी शामिल हों

कोरोना संक्रमण के बाद से चीन पर हमलावर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह अगले महीने प्रस्तावित सात देशों के समूह जी7 की शिखर वार्ता को स्थगित करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि वह सितंबर या इसके बाद होने वाली बैठकों में भारत सहित कई अन्य देशों को शामिल करना चाहते हैं। जिन देशों का उन्होंने नाम लिया उनमें भारत के अलावा रूस, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इन देशों में चीन शामिल नहीं है। हालाँकि ट्रंप ने यह साफ़ नहीं किया है कि वह उन देशों को बैठक में पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल करने के पक्ष में हैं या स्थायी सदस्य के तौर पर। 

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जी7 के सदस्य दुनिया की सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाएँ हैं। जी7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। ये देश अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समन्वय पर चर्चा करने के लिए सालाना बैठकें करते हैं।

डोनल्ड ट्रंप ने साफ़ तौर पर कहा है कि जी7 अपने मौजूदा रूप में 'देशों का एक बहुत पुराना पड़ चुका (outdate) समूह' है। ट्रम्प ने कहा, 'मैं इसे स्थगित कर रहा हूँ क्योंकि मुझे नहीं लगता है कि जी7 के रूप में दुनिया में जो चल रहा है इसका यह ठीक से प्रतिनिधित्व करता है।'

वैसे, ट्रंप ने तो चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एलिसा फराह ने कहा कि ट्रम्प चाहते हैं कि देश शिखर सम्मेलन में चीन पर चर्चा करें।

चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इसलिए ट्रंप ने चीन का नाम क्यों नहीं लिया, यह एक सवाल है। हालाँकि इसका कारण उसमें ढूँढा जा सकता है जिसमें ट्रंप चीन के ख़िलाफ़ हाल के दिनों में जहर उगलते रहे हैं। 

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ट्रम्प कोरोना वायरस महामारी के लिए चीन पर निशाना साधते रहे हैं।  ट्रंप आरोप लगाते रहे हैं कि चीन ने कोरोना वायरस की जानकारी छुपाई और डब्ल्यूएचओ इसमें उसका साथ देता रहा। ट्रंप ने सीधे शब्दों में डब्ल्यूएचओ को चीन के प्रति पक्षपाती क़रार दिया था। अप्रैल महीन में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान ट्रंप ने चीन को चेताया भी था। पत्रकार के एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि यदि कोरोना वायरस महामारी को दुनिया में जानबूझकर फैलने दिया गया है तो चीन को इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इसे चीन में ही रोका जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और अब इसी कारण पूरी दुनिया संकट का सामना कर रही है। 

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