अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को असामान्य कदम उठाते हुए ईरान का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ईरान ने सैकड़ों राजनीतिक कैदियों की फांसी को रद्द कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में 800 से अधिक लोगों की फांसी तय थी, लेकिन अब यह नहीं होगी।

व्हाइट हाउस से फ्लोरिडा के अपने मार-ए-लागो एस्टेट जा रहे ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "ईरान ने 800 से अधिक लोगों की फांसी रद्द कर दी है, और मैं इस बात का बहुत सम्मान करता हूं कि उन्होंने इसे रद्द किया।" उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी पोस्ट किया, "धन्यवाद!"

यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप पिछले कई दिनों से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना जता रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं या राजनीतिक कैदियों की फांसी दी गई, तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा। अब ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान की इस कार्रवाई से अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना कम हो गई है।

ईरान में दिसंबर 28 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन आर्थिक संकट से निकलकर देश की थियॉक्रेसी (धार्मिक शासन) के खिलाफ हो गए थे। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि ईरान में अब तक 2,797 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और यह संख्या बढ़ रही है। हालांकि, हाल के दिनों में तेहरान सहित देश में कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ है और सड़कें सामान्य दिख रही हैं, लेकिन इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है।

ट्रंप ने पहले प्रदर्शनकारियों को संदेश दिया था, "मदद आ रही है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या यह अभी भी लागू है, तो उन्होंने कहा, "खैर, देखते हैं।" जब पूछा गया कि क्या अरब या इसराइली अधिकारियों ने उन्हें पीछे हटने के लिए मनाया, तो ट्रंप ने कहा, "किसी ने मुझे नहीं मनाया। मैंने खुद को मनाया। कल 800 से अधिक फांसियां तय थीं, लेकिन उन्होंने किसी को फांसी नहीं दी। उन्होंने फांसियां रद्द कर दीं। इसका बड़ा असर पड़ा।"

ट्रंप ने यह नहीं बताया कि उन्होंने ईरान में किससे बात की या फांसी रद्द होने की पुष्टि कैसे हुई। ईरान की ओर से इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस बीच, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने ट्रंप से अपने वादे पर अमल करने की अपील की और उन्हें "अपने शब्द का पक्का आदमी" बताया। रज़ा पहलवी अमेरिका में ही रह रहे हैं। ट्रंप के इस बयान को ईरान के साथ तनाव में कमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि दमन जारी है और स्थिति जटिल बनी हुई है।


ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से विरोध प्रदर्शन और विद्रोह आम बात है। अमेरिका ने उसी समय से ईरान पर जबरदस्त प्रतिबंध लगा रखे हैं। इससे ईरान की आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं। आर्थिक परेशानियों की वजह से वहां तमाम समस्याएं खड़ी हो रही हैं। इनमें से अधिकांश प्रदर्शन को ईरान सरकार ने कड़ाई से कुचल दिया है। इस वजह से बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां, इंटरनेट ब्लैकआउट, फायरिंग और फांसी शामिल हैं। हालांकि जब भी सरकार विरोधी प्रदर्शन होते हैं तो जवाब में ईरान सरकार के समर्थन में भी प्रदर्शन होते हैं।

ईरानी विरोध अक्सर खास मुद्दों (आर्थिक, महिलाओं के अधिकार, चुनाव) से शुरू होते हैं, लेकिन धार्मिक शासन परिवर्तन की मांग में बदल जाते हैं। लेकिन ठीक उसी समय अमेरिका और इसराइल दखल देता है। यूएस और इसराइल के दखल देने पर सरकार समर्थक लोग अमेरिका और इसराइल के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर देते हैं। सरकार IRGC, बसिज मिलिशिया, फांसी और डिजिटल सेंसरशिप से दमन करती है। ईरान पर सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनेई का नियंत्रण अभी भी बना हुआ है।