ट्रंप की शांति पहल पर आलोचना तेज़ हो गई है। सवाल है कि क्या यह वास्तविक प्रयास है या सिर्फ दिखावा? डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कह दिया कि अब उन्हें सिर्फ शांति के बारे में सोचने की कोई मजबूरी नहीं है?
क्या डोनाल्ड ट्रंप अब तक शांति का दिखावा कर रहे थे? क्या अब तक जिन युद्धों को रुकवाया या रुकवाने का प्रयास किया वह सिर्फ़ नोबेल शांति पुरस्कार के लिए था? ये संकेत ट्रंप के वेनेजुएला पर हमले या ग़ज़ा पर इसराइली हमले को लेकर उनके रुख से ही नहीं मिलते, बल्कि उन्होंने अब तो खुले तौर पर इसका इशारा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद अब उन्हें सिर्फ शांति के बारे में सोचने की कोई मजबूरी नहीं है। ट्रंप ने इस पत्र में ग्रीनलैंड पर अपना पुराना दावा भी दोहराया और कहा कि दुनिया तब तक सुरक्षित नहीं रहेगी, जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड पर पूरा नियंत्रण नहीं मिल जाता।
ट्रंप का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब नोबेल पुरस्कार देने वाली कमेटी ने उनको यह पुरस्कार नहीं दिया है और ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, क्योंकि वे ग्रीनलैंड को अमेरिका को बेचने या नियंत्रण देने से इनकार कर रहे हैं। नॉर्वे के पीएम स्टोरे ने इस पत्र की पुष्टि की है और कहा है कि नोबेल पुरस्कार एक स्वतंत्र समिति देती है, न कि नॉर्वे सरकार।
ट्रंप ने पत्र में क्या लिखा?
ट्रंप ने नॉर्वे के पीएम को लिखा है, 'आपके देश ने मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, जबकि मैंने 8 से ज्यादा युद्ध रोक दिए हैं। इसलिए अब मुझे सिर्फ शांति के बारे में सोचने की कोई मजबूरी नहीं लगती, हालाँकि शांति हमेशा अहम रहेगी। अब मैं अमेरिका के लिए जो अच्छा और सही है, उसके बारे में सोच सकता हूं। दुनिया तब तक सुरक्षित नहीं है, जब तक हमें ग्रीनलैंड पर पूरा नियंत्रण नहीं मिल जाता।'
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कई युद्ध रोके हैं, लेकिन नोबेल कमिटी ने 2025 का शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को दिया। माचाडो ने पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की और अपना नोबेल मेडल उन्हें सौंप दिया। ट्रंप ने इसे 'परस्पर सम्मान का शानदार इशारा' कहा। हालाँकि नोबेल पुरस्कार देने वाली कमेटी ने साफ़ कहा है कि यह पुरस्कार जिसके नाम से दिया जाता है, यह पूरी तरह उसका ही रहता है, न कि किसी को सौंपने से सामने वाले शख्स के नाम हो जाता है। ग्रीनलैंड विवाद क्या है?
ट्रंप लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदना या नियंत्रण में लेना चाहिए। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का क्षेत्र है, लेकिन वहाँ रूस और चीन के ख़तरे से बचाने के लिए अमेरिकी नियंत्रण जरूरी है। हाल ही में ट्रंप ने नॉर्वे, फिनलैंड समेत 8 नाटो देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी, अगर वे ग्रीनलैंड पर उनके प्लान का विरोध करते रहे। ट्रंप का रवैया अजीबोगरीब है। एक तरफ़ वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के प्रयास में हैं और दूसरी तरफ़ ग़ज़ा में कथित शांति के लिए बोर्ड ऑफ़ पीस प्लान तैयार करने में जुटे हैं।
ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' प्लान
इस ताज़ा विवाद के बीच ही ट्रंप ने ग़ज़ा में शांति के लिए 20 सूत्री योजना के तहत 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम की एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाई है। यह बोर्ड ग़ज़ा के पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए काम करेगा, लेकिन ट्रंप इसे आगे बढ़ाकर वैश्विक संघर्षों के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसमें सदस्य बनने के लिए देशों से 1 अरब डॉलर का योगदान मांगा जा रहा है। कई देशों को निमंत्रण भेजे गए हैं।
इसमें शामिल होने के लिए भारत को औपचारिक निमंत्रण मिला है। यह निमंत्रण रविवार को जारी किया गया, जिसकी जानकारी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर साझा की। बोर्ड को अब तक का सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण बोर्ड बताते हुए ट्रंप ने इसे वैश्विक संघर्षों को सुलझाने वाली एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में पेश किया है। हालांकि, इस निमंत्रण के साथ भारत को कई पेचीदा सवालों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें संप्रभुता, वित्तीय प्रतिबद्धताएं और बोर्ड की बड़ी भूमिका शामिल हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि अमेरिका के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी ट्रंप इस संस्था को अपनी जेब में रखेंगे। ट्रंप की धमकी ब्लैकमेल?
यूरोपीय देशों ने ट्रंप की धमकी को ब्लैकमेल कहा है और टैरिफ के जवाब में जवाबी कदम उठाने की बात कही है। नॉर्वे के पीएम ने कहा कि वे ट्रंप से बात करना चाहते हैं, लेकिन नोबेल पुरस्कार पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। यह घटना नाटो सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा सकती है।
ट्रंप के इस बयान ने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है। जानकारों का कहना है कि यह ट्रंप की पुरानी शैली है जहां वे पुरस्कार और व्यक्तिगत इच्छाओं को विदेश नीति से जोड़ते हैं।