अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि अमेरिका और इसराइल के हफ्तों के हमलों के बावजूद ईरान के लगभग आधे मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन अभी भी चालू हालत में हैं। आईडीएफ का कहना है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के हथियार भी खत्म नहीं हुए हैं।
मध्य पूर्व में जारी युद्ध को लेकर एक अहम खुलासा सामने आया है। सीएनएन की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इसराइल के लगातार पांच हफ्तों तक चले हमलों के बावजूद ईरान के लगभग आधे मिसाइल लॉन्चर और एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन अब भी सक्रिय हैं। यरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इसराइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) का कहना है कि ईरान समर्थक संगठन को लेबनान में हथियार मुक्त करना नामुमकिन है। इसके लिए पूरे लेबनान में ज़मीनी युद्ध करना होगा।
सीएनएन की रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के ताजा आकलन का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन आंकड़ों में ऐसे मिसाइल लॉन्चर भी शामिल हो सकते हैं, जो हमलों के बाद मलबे के नीचे दब गए हैं, लेकिन पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं। इसके अलावा, ईरान की बड़ी संख्या में क्रूज़ मिसाइल भी सुरक्षित बताई जा रही हैं, जो उसे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता देती हैं।
ट्रंप और नेतन्याहू के दावों पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिका दो से तीन हफ्तों के भीतर इस सैन्य अभियान को समाप्त कर सकता है। वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरानी शासन को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया गया है।हालांकि, CNN के सूत्रों के मुताबिक यह आकलन पूरी तरह अवास्तविक है। एक सूत्र ने कहा, “हम उन्हें लगातार नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन अगर कोई सोचता है कि यह युद्ध दो हफ्तों में खत्म हो जाएगा, तो वह हकीकत से दूर है।” इस युद्ध का पांचवा हफ्ता खत्म होने जा रहा है।
विरोधाभासी आंकड़े
युद्ध के पहले हफ्ते में इसराइली सेना (IDF) ने दावा किया था कि उसने ईरान के 75% मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं। लेकिन तीन हफ्ते बाद रॉयटर् की रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां केवल एक-तिहाई मिसाइल भंडार के नष्ट होने की पुष्टि कर पाई हैं।अमेरिका का आक्रामक रुख और रिजीम चेंज
इस बीच, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका ने अभी तक ईरान के बचे हुए ढांचे को पूरी तरह निशाना बनाना शुरू भी नहीं किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले हमले पुलों और बिजली संयंत्रों पर हो सकते हैं। इसके जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट के 8 पुलों की सूची जारी की है, जिसे उसने निशाना बनाने की धमकी दी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि ईरान में रिजीम बदलने चले ट्रंप को अब अमेरिका में अपने प्रशासन में बदलाव करना पड़ रहा है। आर्मी चीफ जो जिस तरह हटाया गया, वो इसी का सबूत है।हाल ही में अमेरिका ने तेहरान और कराज के बीच बन रहे एक नए पुल (B1 ब्रिज) पर हमला किया, जिसमें ईरानी मीडिया के अनुसार 8 लोगों की मौत और 95 लोग घायल हुए। इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि नागरिक ढांचों पर हमले से ईरान झुकेगा नहीं। सैटेलाइट तस्वीरों में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित क़ेश्म द्वीप के बंदरगाह से धुआं उठता भी देखा गया, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत है।
लेबनान में हिज्बुल्लाह अभी भी चुनौती
यरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इसराइली सेना आईढीएफ ने स्वीकार किया है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह निहत्था किए बिना बड़े पैमाने पर जमीनी हमले संभव नहीं है। इसराइली सेना लातीनी नदी तक के क्षेत्रों में नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है, ताकि हिज़्बुल्लाह की मिसाइल क्षमताओं को कम किया जा सके। आईडीएफ ने कहा कि हिज्बुल्लाह को हथियार विहीन करना मुश्किल लग रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने यह भी कहा कि वह 2024 के अंत तक दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों को पूरी तरह से हथियार विहीन करने में असमर्थ रही, लेकिन अब वह ऐसा करने का प्रयास कर रही है। हिज़्बुल्लाह को शस्त्र विहीन करने में आईडीएफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती लातीनी नदी के उत्तर में फैले स्वचालित रॉकेटों के भंडार हैं। लेबनान में आईडीएफ की टुकड़ियों द्वारा अगले सप्ताह तक इसराइल सीमा से आठ से दस किलोमीटर दूर के क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करने की उम्मीद है। इस कदम से इसराइल पर टैंक-रोधी मिसाइलें दागने की हिज़्बुल्लाह की क्षमता कम हो जाएगी और लेबनान से आने वाली मिसाइलों के लिए चेतावनी का समय बढ़ जाएगा।
बहरहाल, करीब पांच हफ्तों से जारी इस युद्ध ने न सिर्फ मिडिल ईस्ट को अस्थिर किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और वित्तीय तंत्र को भी प्रभावित किया है। अमेरिका और उसके सहयोगी जहां तेज़ जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं खुफिया रिपोर्ट्स और जमीनी हकीकत इस संघर्ष के लंबा खिंचने की ओर इशारा कर रही हैं।