अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान के दक्षिणी तटीय इलाके से अमेरिकी तबाही के वीडियो सामने आए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी के बाद ये हमले शुरू किए गए। ईरान ने यूएन चार्टर के तहत जवाबी हमले की चेतावनी दे दी है।
अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर फिर हमले किए। राष्ट्रपति ट्रंप ने जारी कीं तस्वीरें।
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ युद्ध विराम (Ceasefire) पूरी तरह टूट चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर को "खत्म" घोषित करने के बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। देर रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित कई रणनीतिक ठिकानों और सर्विलांस सेंटरों को निशाना बनाकर भीषण हवाई हमले किए। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने हमलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी की हैं।
अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर हाल ही में हुए ईरानी हमलों के जवाब में की गई है।
- CENTCOM का बयान: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, "अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं ताकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को खतरा पैदा करने की उसकी क्षमता को नष्ट किया जा सके।"
- प्रभावित इलाके: ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान के दक्षिणी तटीय बंदरगाह शहरों बंदर अब्बास, बुशहर, कोनारक और चाबहार में भारी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। बुशहर शहर में स्थित देश के एकमात्र नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास भी धमाके रिपोर्ट किए गए हैं और कई इलाकों की बिजली गुल हो गई है।
- भारी नुकसान: शुरुआती हमले में अमेरिकी सेना ने हवाई रक्षा प्रणालियों, तटीय रडार साइटों और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की कम से कम 60 छोटी नावों सहित 90 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, इन हमलों में उनके 8 सैन्य कर्मियों की मौत हुई है।
ईरान का पलटवार
जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों (जैसे बहरीन का शेख ईसा एयर बेस) पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन फिर से दागे। हालांकि अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का दावा है कि अधिकांश को हवा में ही मार गिराया गया। इन्हीं अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान ने पहले भी हमले किए हैं।
ईरान का कड़ा रुख: "यह सीधा सैन्य आक्रमण है"
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे "सैन्य आक्रामकता" करार दिया है। ईरान ने साफ तौर पर कहा कि ये हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) के सिद्धांतों और दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए हालिया समझौता ज्ञापन (MoU) का खुला उल्लंघन हैं।UN चार्टर का उल्लंघन
ईरान ने कहा कि बुधवार तड़के देश के दक्षिणी तट पर स्थित सर्विलांस सेंटरों पर अमेरिकी हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का गंभीर उल्लंघन है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ बल प्रयोग को प्रतिबंधित करता है।
समझौता ज्ञापन की धज्जियां उड़ाईं: यह हमला सीजफायर और युद्ध-समाप्ति से जुड़े समझौता ज्ञापन की पहली धारा का सीधा उल्लंघन है, जिसमें सभी सैन्य अभियानों को रोकने की बात कही गई थी।
समझौते को कमजोर करने के आरोप: ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा ईरानी तेल बिक्री के लाइसेंस को हाल ही में रद्द करना, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरान की व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप और लेबनान के खिलाफ लगातार हो रहे इजरायली हमले इस शांति समझौते को पटरी से उतारने के जिम्मेदार हैं।
तनाव बढ़ाने की जिम्मेदारी अमेरिका की: विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने और इसके जो भी गंभीर परिणाम होंगे, उसकी पूरी जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अमेरिका की होगी।
संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत ईरान की खुली चेतावनी
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने की उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई है। इसके साथ ही, ईरान ने अमेरिका को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है: "ईरान के सशस्त्र बल, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 (आत्मरक्षार्थ अधिकार) के तहत, देश की क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी आक्रमण के स्रोत और उत्पत्ति स्थान (Source and Origin) को सीधे निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेंगे।"वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट
यह युद्ध ऐसे समय में दोबारा भड़का है जब इसी साल फरवरी 2026 में अमेरिकी-इजरायली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद से पूरा मध्य पूर्व सुलग रहा है। जून में हुए समझौते के बाद जो शांति स्थापित हुई थी, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस का पांचवां हिस्सा (1/5th) स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर गुजरता है। इस ताजा जंग के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच गया है और कच्चे तेल की कीमतों में तत्काल 6% से अधिक का उछाल देखा गया है, जिससे दुनिया भर में ईंधन संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।