अमेरिका की एक अदालत से अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को झटका लगा है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने गौतम अडानी के खिलाफ जिस फ्रॉड केस को वापस लेने की कोशिश की, उसको जज ने तुरंत खारिज करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग से पूछा है कि वे केस क्यों छोड़ना चाहते हैं।

अमेरिका के पूर्वी न्यूयॉर्क जिले के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज निकोलस गराफिस ने शुक्रवार को कहा कि न्याय विभाग का बयान बहुत छोटा, साधारण और बिना ठोस आधार वाला है। इससे अदालत को कोई निष्कर्ष निकालने या फ़ैसला करने में मदद नहीं मिलती। जज ने न्याय विभाग को 13 जुलाई तक समय दिया है कि वे अपना फैसला बदलने के पीछे का पूरा कारण और जानकारी अदालत को दें।
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अडानी यूस केस क्या है?

अमेरिकी अधिकारियों ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 265 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 2200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की साजिश रची। आरोप है कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए अधिकारियों को रिश्वत दी गई और अमेरिकी निवेशकों से इसकी जानकारी छुपाई गई। अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका में उन पर सिक्योरिटीज फ्रॉड का केस है, न कि रिश्वतखोरी का।

ट्रंप प्रशासन केस बंद करने में जुटा

डोनाल्ड ट्रंप सरकार के न्याय विभाग ने 18 मई को अदालत से कहा कि वे इस केस पर और पैसे और समय बर्बाद नहीं करना चाहते हैं। इसलिए व्यक्तिगत रूप से गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ आपराधिक केस बंद किया जाए। 

लेकिन जज गराफिस ने अडानी के ख़िलाफ़ केस बंद करने की अर्जी को तुरंत मंजूर नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार को अपना फ़ैसला सही ठहराने के लिए ठोस वजह बतानी होगी।

अडानी क्यों करेंगे अमेरिका में निवेश?

जब अमेरिकी न्याय विभाग अडानी के ख़िलाफ़ केस वापस लेने की तैयारी कर रहा था तभी कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि गौतम अडानी के वकीलों ने न्याय विभाग से कहा था कि अगर केस बंद कर दिया जाए तो वे अमेरिका में 10 अरब डॉलर यानी क़रीब 84000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे और 15000 नौकरियां पैदा करेंगे।
इस रिपोर्ट के आने के बाद दो डेमोक्रेटिक सीनेटर्स ने इसे साफ तौर पर 'लेनदेन का सौदा' बताया और इसकी आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गौतम अडानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक निजी वकील रॉबर्ट जे गिउफ्रा को अपनी टीम का नेतृत्व सौंपा। अप्रैल में गिउफ्रा ने न्याय विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की और 100 स्लाइड्स दिखाकर केस कमजोर होने का दावा किया।

सिविल केस में समझौता हो गया

अमेरिकी शेयर बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी एसईसी के साथ 14 मई को समझौता हो गया। गौतम अडानी ने 6 मिलियन डॉलर और सागर अडानी ने 12 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमति जताई। इसमें उन्होंने आरोप स्वीकार या अस्वीकार नहीं किए। अडानी ग्रीन एनर्जी ने बताया कि कंपनी पर कोई केस नहीं है और वह इस मुद्दे का पक्षकार नहीं है।
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ईरान प्रतिबंध मामले में भी भुगतान

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 18 मई को कहा कि अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के लिए 275 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 2300 करोड़ रुपये का समझौता किया है।

अब फ़ैसला जज पर निर्भर?

अदालत का अंतिम फ़ैसला अभी आना बाकी है। जज गराफिस को न्याय विभाग का विस्तृत जवाब मिलने के बाद ही तय होगा कि फ्रॉड का आपराधिक केस बंद किया जाए या नहीं। 13 जुलाई तक न्याय विभाग को अपना जवाब देना है। उसके बाद अदालत अपना फ़ैसला सुनाएगी।