पश्चिमी इराक में अमेरिकी वायु सेना का केसी-135 टैंकर विमान दूसरे जहाज से टकराकर गिर गया। हालांकि ईरान समर्थक संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है। ईरान ने यूएसएस अब्राहम लिंकन पर भी हमले का दावा किया, जिसे पेंटागन ने खारिज कर दिया है।
इराक में यूएस प्लेन गिरा। लेकिन खबरों में कहा गया- इसे गिराया गया
अमेरिकी सेना के एक हवाई ईंधन भरने वाले विमान (KC-135 टैंकर) के इराक के पश्चिमी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को की है। हालांकि इसके दूसरे अमेरिकी विमान से टकराने की खबरें भी हैं। कुवैत के बाद यह ऐसी दूसरी घटना है, जिसमें विमानों ने एक दूसरे को निशाना बनाया या टकरा गए। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन शिप पर भी ईरान ने हमले का दावा किया लेकिन पेंटागन ने उसे खारिज कर दिया है।
यूएस की सेंट्रल कमांड CENTCOM के बयान के अनुसार, यह घटना 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान हुई, जो अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा बड़ा सैन्य अभियान है। इस ऑपरेशन में अमेरिकी बल ईरान की मिसाइल, नौसेना और अन्य सैन्य क्षमताओं को निशाना बना रहे हैं। बयान में कहा गया कि दो KC-135 टैंकर शामिल थे। एक सुरक्षित उतर गया, जबकि दूसरा पश्चिमी इराक में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना 'मित्रवत हवाई क्षेत्र' में हुई और अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसमें दुश्मन या मित्रवत हमले की कोई भूमिका नहीं थी। हालांकि पहले जो खबरें आईं, उनमें कहा गया कि दोनों विमान टकराए, जिसमें यूएस वायुसेना के विमान को काफी नुकसान हुआ।
ईरान समर्थक संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली
इराक में सक्रिय ईरान समर्थित 'इस्लामिक रेसिस्टेंस इन इराक' (एक संगठन जो कई सशस्त्र गुटों का गठबंधन है) ने दावा किया है कि उसने इस KC-135 विमान को मार गिराया। संगठन ने अपने बयान में कहा, "यह हमारे देश की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र की रक्षा में किया गया कदम है।" रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने इस दावे की जानकारी दी है, लेकिन अमेरिकी सेना ने इसे खारिज कर दिया है और दुर्घटना को तकनीकी या अन्य गैर-शत्रुतापूर्ण कारणों से जोड़ा है।
KC-135 स्ट्रैटोटैंकर, बोइंग द्वारा 1950-60 के दशक में निर्मित, अमेरिकी वायु सेना का प्रमुख हवाई ईंधन भरने वाला विमान है। यह लंबी दूरी की उड़ानों में लड़ाकू विमानों को ईंधन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में चौथा ज्ञात विमान हादसा है।
इससे पहले, अमेरिकी सेना ने बताया था कि पिछले सप्ताह कुवैत की सेना द्वारा गलती से तीन F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान गिरा दिए गए थे। उन सभी छह क्रू सदस्यों ने सुरक्षित रूप से eject किया और उनकी हालत स्थिर है।
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अब तक सात अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। छह कुवैत के एक नागरिक बंदरगाह पर ईरानी ड्रोन हमले में और एक सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमले में घायल होने के बाद। पेंटागन के अनुसार, लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें आठ गंभीर रूप से।
यूएस विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन पर ईरान का हमला? दावों का खंडनः ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नौसेना ने दावा किया है कि उसके बैलिस्टिक मिसाइलों ने अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हमला किया। यह पोत खाड़ी क्षेत्र में पीछे हट रहा है। ईरानी राज्य टीवी ने रिपोर्ट किया कि हमला ओमान सागर में ईरान की समुद्री सीमा से लगभग 340 किमी दूर हुआ और उसके बाद अमेरिकी पोत समूह "तेज गति से भाग गया"।
हालाँकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर पोत की तस्वीर साझा करते हुए कहा, "अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में सक्रिय है और समुद्र से अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है।" अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरानी मिसाइलें "बिल्कुल भी करीब नहीं आईं"।
पिछले दिनों भी ईरान ने इसी तरह के दावे किए थे, जिन्हें अमेरिका ने बार-बार झूठा बताया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में एक ईरानी जहाज अमेरिकी पोत के बहुत करीब आया, जिस पर अमेरिकी जहाज ने चेतावनी के तौर पर गोलीबारी की, लेकिन निशाना चूक गया।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अभियान के लिए दो विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन मध्य पूर्व भेजे हैं। अब्राहम लिंकन अरब सागर में तैनात है, जिसमें यूएसएस स्प्रुएंस और यूएसएस माइकल मर्फी जैसे विध्वंसक शामिल हैं।
ये घटनाएँ ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल के बढ़ते संघर्ष को दर्शाती हैं, जिसमें दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं। हालांकि ईरान इस युद्ध में हावी होने की पूरी कोशिश कर रहा है। मिडिल ईस्ट और इसराइल में उसके हमले बिना रुके जारी हैं।