ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने पर अब ट्रंप प्रशासन में ही फूट पड़ गई लगती है! डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र के निदेशक जोसेफ केंट ने इस युद्ध के ख़िलाफ़ इस्तीफ़ा दे दिया। केंट ट्रंप प्रशासन के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक हैं और यह पहला ऐसा बड़ा इस्तीफा है जो ईरान युद्ध के कारण हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसराइल के दबाव में ईरान पर यह हमला किया गया।
जोसेफ केंट ने राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे एक पत्र में कहा, 'बहुत सोच-विचार के बाद मैंने आज से राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र के निदेशक पद से इस्तीफा देने का फ़ैसला किया है। मैं अच्छे विवेक से ईरान में चल रहे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता। ईरान ने अमेरिका पर कोई तत्काल ख़तरा नहीं पैदा किया था। यह साफ़ है कि इसराइल और उसके अमेरिका में प्रभावशाली लॉबी के दबाव में हमने यह युद्ध शुरू किया।'

बदल गए ट्रंप?

केंट ने पत्र में ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-2021) की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 2016, 2020 और 2024 के चुनावों में ट्रंप ने अमेरिका फ़र्स्ट नीति पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि पहले आप समझते थे कि मध्य पूर्व के युद्ध अमेरिका के लिए जाल हैं, जो हमारे सैनिकों की जान लेते हैं और देश की संपत्ति बर्बाद करते हैं। आपने कासिम सुलेमानी को मारकर और आईएसआईएस को हराकर बिना लंबे युद्ध में फंसे सैन्य शक्ति का सही इस्तेमाल दिखाया था। इसके बाद केंट ने ट्रंप के मौजूदा प्रशासन में कमियाँ गिनाईं।

'इराक युद्ध जैसा झूठ फैलाया गया'

केंट ने आरोप लगाया कि इस बार की सरकार में इसराइली अधिकारी और अमेरिकी मीडिया के प्रभावशाली लोग गलत सूचना फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसराइल ने ट्रंप को धोखा दिया कि ईरान तत्काल ख़तरा है और हमला करने से तेज जीत मिलेगी। यह झूठ था, जैसा इराक युद्ध में भी हुआ था जहां हजारों अमेरिकी सैनिक मारे गए। केंट ने कहा कि हम यह ग़लती दोबारा नहीं कर सकते।
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केंट खुद एक पूर्व सैनिक हैं। उन्होंने 11 बार युद्ध क्षेत्र में सेवा की। उनकी पत्नी शैनन युद्ध में मारी गई थीं। उन्होंने लिखा, 'एक वेटरन के रूप में जो 11 बार युद्ध में गया और जिसने अपनी पत्नी को इसराइल द्वारा बनाए गए युद्ध में खोया, मैं अगली पीढ़ी को ऐसे युद्ध में नहीं भेज सकता जो अमेरिकी लोगों को कोई फायदा न दे और जान की कीमत न जायज ठहराए।'
पत्र में केंट ने ट्रंप से अपील की कि वे सोचें कि ईरान में क्या हो रहा है और किसके लिए। उन्होंने कहा कि अब साहसिक कदम उठाने का समय है। या तो युद्ध रोककर नया रास्ता चुनें या देश को और गिरावट की ओर जाने दें।
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कौन हैं जोसेफ केंट?

जोसेफ केंट एक पूर्व आर्मी स्पेशल फोर्सेस 'ग्रीन बेरेट' और सीआईए अधिकारी हैं। ट्रंप ने उन्हें 2025 में काउंटर टेररिज्म सेंटर का निदेशक बनाया था। वे डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गब्बर्ड के करीबी सहयोगी थे। गब्बर्ड ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से कम दिखी हैं। उन्होंने कोई बयान नहीं दिया है, सिर्फ मारे गए अमेरिकी सैनिकों के सम्मान समारोह में हिस्सा लिया है।
केंट के इस्तीफ़े पर व्हाइट हाउस और ऑफिस ऑफ डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की। खुफिया अधिकारियों को यह खबर चौंकाने वाली लगी। कुछ जानकारों का कहना है कि अमेरिकी क़ानून के तहत युद्ध शुरू करने के लिए 'तत्काल ख़तरा' ज़रूरी होता है। इसीलिए केंट का यह बयान अहम है जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान 'तत्काल ख़तरा' नहीं था।

ट्रंप के ख़िलाफ़ अमेरिका में असंतोष?

यह इस्तीफा ट्रंप प्रशासन में ईरान युद्ध को लेकर बढ़ते असंतोष को दिखाता है। युद्ध शुरू हुए कुछ हफ्ते हो गए हैं और अमेरिका-इसराइल की तरफ से ईरान पर हमले जारी हैं। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और राजनीतिक दबाव भी। केंट का पत्र एक्स पर पोस्ट किया गया, जिससे यह खबर तेजी से फैली।
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जनता में विरोध: सर्वे

पीबीएस न्यूज़, एनपीआर, Marist जैसे कई पोल्स दिखाते हैं कि अधिकांश अमेरिकी युद्ध के ख़िलाफ़ हैं। जनता ईरान पर सैन्य कार्रवाई को खारिज कर रही है और गैसोलीन की क़ीमतें बढ़ने से आर्थिक नुक़सान की शिकायतें बढ़ी हैं। वाशिंगटन डीसी, अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ प्रोटेस्ट ट्रंप के खिलाफ हैं, जबकि कुछ इसराइल-ईरान संघर्ष के खिलाफ।
डेमोक्रेट्स ने ट्रंप पर हमला बोला है और कुछ रिपब्लिकन व ट्रंप समर्थक भी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से भटकने का आरोप लगा रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपतियों ने भी ट्रंप के दावों का खंडन किया है। युद्ध की शुरुआत के बाद से ही ट्रंप को घरेलू स्तर पर कड़ा विरोध झेलना पड़ रहा है।
यह घटना अमेरिकी राजनीति में बड़ा मोड़ बन सकती है, क्योंकि ट्रंप के अपने ही प्रशासन में से एक बड़ा अधिकारी युद्ध के खिलाफ खड़ा हो गया है।