वेनेजुएला से ज़ुड़े एक मामले पर अमेरिका और रूस के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। अमेरिकी सेना ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में आइसलैंड के पास एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया। यह टैंकर वेनेजुएला से जुड़ा हुआ है। टैंकर के बचाव में इसके साथ रूसी पनडुब्बी और अन्य युद्धपोत भी थे। अमेरिका ने प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह घटना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस द्वारा पकड़े जाने के कुछ दिन बाद हुई है। ट्रंप अब वेनेजुएला के तेल पर दावा कर रहे हैं और रूस, चीन और ईरान जैसे देशों को तेल बेचने के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं।

टैंकर का पुराना नाम बेला-1 था, जिसे बाद में रूसी झंडे के तहत मारिनेरा नाम से रजिस्टर किया गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह जहाज वेनेजुएला के तेल से जुड़ा था और अमेरिकी प्रतिबंधों को तोड़ रहा था। रिपोर्ट है कि दिसंबर में भी अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन जहाज ने बोर्डिंग नहीं की और भाग गया। इसके बाद जहाज ने झंडा और रजिस्ट्रेशन बदल लिया। अब अमेरिकी यूरोपीय कमांड ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि बुधवार को फेडरल कोर्ट के वारंट के तहत जहाज को अमेरिकी नियंत्रण में ले लिया गया। ऑपरेशन में अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सेना ने मिलकर काम किया। ब्रिटेन की बड़ी भूमिका रही- ब्रिटिश एयरबेस से मिशन शुरू हुआ और रॉयल एयर फोर्स के जासूसी विमानों ने जहाज पर नजर रखी।
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अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर रायटर्स से बताया कि जहाज को हफ्तों से ट्रैक किया जा रहा था। यह अमेरिकी 'ब्लॉकेड' को चकमा देकर भागा था। ऑपरेशन के दौरान रूसी युद्धपोत और एक पनडुब्बी टैंकर के आसपास थे, लेकिन सटीक दूरी का पता नहीं चला। इसने कहा है कि इस ऑपरेशन के दौरान रूस के साथ तनाव बढ़ाने का खतरा था, लेकिन ऑपरेशन सफल रहा। यह हाल के समय में दुर्लभ मामलों में से एक है जब अमेरिका ने रूसी झंडे वाले कमर्शियल जहाज को जब्त किया।

रूस की कड़ी प्रतिक्रिया

मॉस्को ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। रूस के ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने कहा, 'किसी देश को दूसरे देश में रजिस्टर्ड जहाजों पर बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।' रूस का कहना है कि उसके नौसैनिक जहाज टैंकर की सुरक्षा कर रहे थे।

रूसी ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने कहा, '24 दिसंबर 2025 को मैरिनेरा को रूसी क़ानून और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार रूसी फेडरेशन के झंडे के तहत चलने का एक अस्थायी परमिट जारी किया गया था।' बयान में आगे कहा गया, 'आज मॉस्को समय के अनुसार क़रीब 3:00 बजे जहाज पर किसी भी देश के क्षेत्रीय जल के बाहर खुले समुद्र में अमेरिकी नौसेना बलों ने कब्ज़ा कर लिया और जहाज से संपर्क टूट गया। 1982 के समुद्र कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के अनुसार, खुले समुद्र के पानी में नेविगेशन की स्वतंत्रता लागू होती है और किसी भी देश को दूसरे देशों के अधिकार क्षेत्र में विधिवत रजिस्टर्ड जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।'
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वेनेजुएला संकट से जुड़ी है कार्रवाई?

यह घटना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला पर सख़्त नीति से जुड़ी लगती है। कुछ दिन पहले 3 जनवरी को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने काराकास में बड़ा ऑपरेशन किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया। मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका लाया गया, जहाँ उन पर ड्रग तस्करी के आरोपों में मुक़दमा चलाया जा रहा है।

वेनेजुएला के अधिकारी इसे 'अपहरण' बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करना चाहता है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार माना जाता है। ट्रंप ने बुधवार को अपने प्लान की झलक दी। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल देगी। इस तेल को बाजार भाव पर बेचा जाएगा और पैसे पर उनका नियंत्रण होगा। ट्रंप ने कहा, 'यह तेल बाजार कीमत पर बेचा जाएगा और पैसा मेरे नियंत्रण में रहेगा।'

बता दें कि अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी जल क्षेत्र में एक और वेनेजुएला से जुड़े टैंकर को भी रोका है।
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अमेरिका-रूस टकराव बढ़ेगा?

ये घटनाएँ अमेरिका-रूस संबंधों को और बिगाड़ सकती हैं। रूस पहले से यूक्रेन युद्ध में व्यस्त है, लेकिन समुद्र में ऐसे टकराव से नया मोर्चा खुल सकता है। वेनेजुएला में अंतरिम सरकार के साथ अमेरिका का सहयोग बढ़ रहा है, लेकिन विपक्षी देश इसे हस्तक्षेप बता रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र इस पर है कि रूस क्या जवाबी कार्रवाई करता है और तेल की क़ीमतों पर क्या असर पड़ता है। यह मामला दिखाता है कि सैंक्शंस और तेल की राजनीति कितनी जटिल और खतरनाक हो सकती है।