कतर के दोहा में शांति वार्ता के बीच अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान पर नए हवाई हमले किए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि बात नहीं बनने पर युद्ध और बड़ा होगा।
अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया, जबकि वो दोहा (कतर) में शांति वार्ता भी कर रहा है
ईरान के साथ चल रहे तीन महीने पुराने युद्ध को समाप्त करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में जारी नाजुक शांति वार्ता के बीच एक बड़ा सैन्य तनाव सामने आया है। अमेरिकी सेना ने सोमवार देर रात (25 मई) दक्षिणी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक समझौते (Memorandum of Understanding) पर चर्चा कर रहे हैं।
सेल्फ डिफेंस के नाम पर ईरान में हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता नेवी कैप्टन टिम हॉकिन्स ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन हमलों की पुष्टि की। उन्होंने इसे "आत्मरक्षा में किए गए हमले" (Self-defence strikes) करार दिया।
मुख्य निशाने: अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों में दक्षिणी ईरान स्थित मिसाइल लॉन्च साइटों (Missile launch sites) और उन ईरानी नावों को निशाना बनाया गया जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने का प्रयास कर रही थीं।
युद्धविराम की स्थिति: CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी सेना वर्तमान में लागू अस्थाई युद्धविराम (Ceasefire) का सम्मान करते हुए संयम बरत रही है, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए खतरे की स्थिति में जवाबी कार्रवाई जारी रखेगी।
- दूसरी ओर, ईरानी मीडिया ने भी एक बड़ी कामयाबी का दावा करते हुए बताया कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली ने फारस की खाड़ी के ऊपर एक "दुश्मन" के स्टील्थ ड्रोन (Stealth Drone) को मार गिराया है।
एक तरफ बातचीत, दूसरी तरफ गोलाबारी
यह सैन्य टकराव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी प्रशासन के बीच चल रही जबरदस्त कूटनीतिक कोशिशों के बीच हुआ है।
दोहा में उच्चस्तरीय बैठक: ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कलीबाफ और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल कतर के प्रधानमंत्री के साथ दोहा में बातचीत कर रहा है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य 8 अप्रैल से लागू अस्थाई युद्धविराम को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाना और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को वैश्विक व्यापार के लिए फिर से खोलना है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी: हमलों से कुछ घंटे पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा: "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है! लेकिन यह या तो सभी के लिए एक 'शानदार समझौता' (Great Deal) होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा। अगर बात नहीं बनी, तो हम वापस युद्ध के मोर्चे पर होंगे और इस बार गोलीबारी पहले से कहीं ज्यादा बड़ी और मजबूत होगी।"
समझौते की राह में क्या हैं मुख्य पेंच?
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, बातचीत एक ठोस समझौते के करीब है, लेकिन तीन बड़े मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है:
- ट्रंप ने मांग की है कि ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) नष्ट करने के लिए अमेरिका को सौंपे। ईरानी सूत्रों के अनुसार, तेहरान अपने यूरेनियम भंडार को सौंपने के लिए तैयार नहीं है।
- अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर विचार कर रहा है। जबकि ईरान अपनी जब्त अरबों डॉलर की संपत्ति (Frozen Assets) को तुरंत जारी करने की मांग कर रहा है।
- ट्रंप ने इस शांति समझौते को 'अब्राहम अकॉर्ड्स' से जोड़ते हुए सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों से इसराइल के साथ संबंध सामान्य करने की मांग की है।
- ईरान मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी-इसराइली प्रभाव बढ़ाने की कोशिश मानकर विरोध कर रहे गुटों का समर्थन कर रहा है।
बता दें कि इसी साल 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इसराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की आड़ लेकर ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। इसी के बाद इस युद्ध की शुरुआत हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को ब्लॉक कर दिया, जिससे दुनिया भर में ईंधन का गंभीर संकट पैदा हो गया है। दुनिया की बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है।
हालांकि 8 अप्रैल को एक अस्थाई युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन ताजा अमेरिकी हमलों और ईरान द्वारा ड्रोन गिराए जाने की घटनाओं ने इस शांति वार्ता की सफलता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वैश्विक बाजार और कूटनीतिज्ञों की नजरें अब दोहा में चल रही बातचीत के अगले दौर पर टिकी हैं।