कांग्रेस पार्टी ने 2026 के असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज कर दिया है। प्रियंका गांधी वाड्रा को टिकट स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी दौरान पार्टी के तमाम टिकट दावेदारों को सख्त संदेश मिला है, अगर कांग्रेस टिकट के लिए आवेदन कर रहे हैं तो 50,000 रुपये फीस भी जमा करना होगी।
मीडिया के पास उपलब्ध एक सर्कुलर के अनुसार, असम प्रदेश कांग्रेस कमिटी (एपीसीसी) ने पार्टी सदस्यों से टिकट के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, लेकिन आवेदन के साथ ही 50,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम टिकट की दौड़ में सिर्फ गंभीर आवेदनों के मद्देनज़र उठाया गया है।
असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के निर्देश पर जारी इस आदेश में कहा गया है कि आवेदन 5 जनवरी से 20 जनवरी के बीच स्वीकार किए जाएंगे। उन पर तभी विचार किया जाएगा जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नाम पर 50 हजार का डिमांड ड्राफ्ट लगा हो। पार्टी ने इस राशि को आवेदन शुल्क बताया है, लेकिन यह फैसला पार्टी के अंदरूनी स्तर पर सवाल खड़े कर रहा है। अन्य राज्यों में भी आवेदन फीस मांगी गई थी, लेकिन वहां कम रखी गई थी। 
ताज़ा ख़बरें
2024 के आंध्र प्रदेश चुनावों में कांग्रेस ने कर्नाटक और तेलंगाना मॉडल का अनुसरण करते हुए लोकसभा टिकट के लिए आरक्षित वर्ग के दावेदारों से 15,000 रुपये और अन्य से 25,000 रुपये मांगे थे। विधानसभा टिकट के लिए सामान्य वर्ग से 10,000 रुपये और आरक्षित वर्ग से 5,000 रुपये लिए गए थे।

इसी तरह, हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने सामान्य वर्ग के दावेदारों से प्रति निर्वाचन क्षेत्र 20,000 रुपये और अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं से 5,000 रुपये प्रति आवेदन तय किए थे।

इनकी तुलना में असम में बिना किसी वर्गीय भेदभाव के एकमुश्त 50,000 रुपये की फीस ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा कर दिया है। असम में विधानसभा की 126 सीटें हैं और पार्टी के अंदर प्रतिस्पर्धा तीव्र होने की उम्मीद है, ऐसे में यह फैसला कई कार्यकर्ताओं को निराश कर रहा है।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने यह भी कहा है कि कुछ सीटें गठबंधन सहयोगियों के लिए खाली की जा सकती हैं और ऐसे मामलों में आवेदन शुल्क वापस किया जाएगा। हालांकि, सर्कुलर में रिफंड की प्रक्रिया और समयसीमा पर चुप्पी है।

दावेदारों से तय फॉर्म, एक अंडरटेकिंग और उनके नाम वाली प्रमाणित मतदाता सूची की प्रति जमा करने को कहा गया है। एपीसीसी मुख्यालय में आवेदन जमा करने के बाद फॉर्म और ड्राफ्ट की जेरॉक्स कॉपी संबंधित जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमिटी अध्यक्षों को भी सौंपनी होगी।

इस फैसले से पार्टी के अंदर असंतोष की लहर दौड़ गई है। कुछ कार्यकर्ता निजी तौर पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या वित्तीय क्षमता को अनौपचारिक रूप से फिल्टर बना दिया गया है, जबकि कांग्रेस खुद को साधारण कार्यकर्ताओं की पार्टी के रूप में पेश कर रही है और संसाधनों से भरपूर सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ लड़ाई का दावा कर रही है।

प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा स्क्रीनिंग कमिटी में सप्तगिरी शंकर उलाका, इमरान मसूद और सिरीवेल्ला प्रसाद को सदस्य नियुक्त किया गया है। यह कमिटी उम्मीदवारों की छंटनी और आंतरिक विचार-विमर्श की जिम्मेदारी संभालेगी। कांग्रेस असम में सत्ता वापसी की कोशिश में जुटी है, लेकिन टिकट वितरण की यह प्रक्रिया पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है।