स्कलकैप वाले लोगों को शूट करते दिखे हिमंता बिस्वा सरमा के AI वीडियो वाले मामले में बीजेपी ने जो अब तर्क दिया है और कार्रवाई की है वह और भी शर्मसार करने वाला है! पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा है कि यह पोस्ट 'अनधिकृत' थी और इसको लेकर सोशल मीडिया विभाग के चार सह-संयोजकों में से एक को उनके पद से हटा दिया गया है। पार्टी की ओर से यह सफ़ाई तब आई है जब बीजेपी को इस मामले में चौतरफ़ा आलोचना हुई और बीजेपी इस मामले में पूरी तरह बैकफुट पर दिखी।

पिछले हफ्ते पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक वीडियो डाला गया था, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को राइफल से निशाना लगाते दिखाया गया था। निशाने पर दो आदमी थे, जिनके सिर पर स्कलकैप थी। इनमें से एक असम कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई जैसा दिख रहा था। वीडियो में सरमा को काउबॉय की तरह कपड़े पहने और बंदूक लिए दिखाया गया, साथ में लिखा था 'पॉइंट ब्लैंक शॉट', 'बांग्लादेशियों पर कोई दया नहीं', 'पाकिस्तान क्यों नहीं गए?' और 'विदेशी-मुक्त असम'।
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इस वीडियो को शनिवार को पोस्ट किया गया और कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। राजनीतिक दलों, विपक्ष और सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हुई। लोगों ने इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला बताया। अगले दिन वीडियो डिलीट कर दिया गया। इस विवाद के बीच ही अब असम बीजेपी ने सफाई दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यह पोस्ट अपरिपक्व और अनधिकृत थी। सोशल मीडिया विभाग के चार सह-संयोजकों में से एक को उनके पद से हटा दिया गया है। यह व्यक्ति 20-30 साल की उम्र का पार्टी कार्यकर्ता था। अगस्त 2025 में सैकिया ने चार युवा कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया विभाग का सह-संयोजक बनाया था।

रिपोर्ट के अनुसार सैकिया ने कहा, 'पार्टी असम में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को लेकर चिंतित है और इसके लिए समाज में आंदोलन जरूरी है। लेकिन पार्टी मुस्लिमों पर गोली चलाने की मंशा का समर्थन नहीं करती। यह अनधिकृत व्यक्ति ने गलत तरीके से किया। पार्टी ने नोटिस लिया और वीडियो डिलीट कराया।'

राज्य में पार्टी के संयोजक बिस्वजीत खौंड ने बताया कि सोशल मीडिया कंटेंट पार्टी के स्वयंसेवी कार्यकर्ता बनाते और पोस्ट करते हैं। कोई प्राइवेट एजेंसी नहीं है। ग्राफिक डिजाइनर भी पार्टी का कार्यकर्ता है। सब पार्टी विभाग के तहत चलता है।
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वरिष्ठ नेता रंजीब शर्मा सोशल मीडिया के प्रभारी हैं। उन्होंने कहा कि पोस्ट का फ़ैसला विषय पर निर्भर करता है। अगर कोई आइडिया आता है तो संयोजक को बताया जाता है, वे जांच-पड़ताल कर कंटेंट बनाते हैं। सैकिया ने कहा कि सह-संयोजकों को पार्टी कार्यक्रम, शुभकामनाएं जैसी रूटीन पोस्ट अपलोड करने का अधिकार है, लेकिन संवेदनशील सामग्री, खासकर मुख्यमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल, बिना रंजीब शर्मा या मुख्यमंत्री कार्यालय की अनुमति के नहीं किया जा सकता। इस पोस्ट को किसी ने चेक नहीं किया।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कहा कि उन्हें इस वीडियो की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस विधायकों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। एक बीजेपी कार्यकर्ता ने भी केस किया है। सरमा ने कहा, 'असम में सब जानते हैं कि हम असमिया मुस्लिमों के खिलाफ नहीं हैं। हम बांग्लादेशी मुस्लिमों के खिलाफ हैं। वीडियो में असमिया और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बीच फर्क दिखाना चाहिए था। पार्टी और मैं व्यक्तिगत रूप से असमिया मुस्लिम समुदाय के खिलाफ किसी चीज का समर्थन नहीं करते।'

यह नरसंहार का आह्वान: कांग्रेस

हिमंता के इस एआई वीडियो के आने के बाद कांग्रेस ने इस वीडियो की कड़ी निंदा की। कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह वीडियो अल्पसंख्यकों की 'पॉइंट-ब्लैंक हत्या' को बढ़ावा देता है। उन्होंने इसे नरसंहार का आह्वान बताया। कांग्रेस ने कहा कि यह फासीवादी सोच दिखाता है, जो दशकों से नफरत फैला रही है।
कांग्रेस की पोस्ट में आगे कहा गया, 'यह इस फासीवादी सरकार के असली चेहरे की झलक है, जिसने दशकों से इस नफ़रत को पाला है और पिछले 11 सालों में इसे नॉर्मल बनाने की कोशिश की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, समाज में नफ़रत और ज़हर फैलाने के इस काम के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।'

टीएमसी ने इसे नरसंहार और सामूहिक हत्या का ग्रीन सिग्नल कहा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने भारत की राजनीति को गटर में ले आया है। संविधान की धर्मनिरपेक्षता को कुचल दिया गया है। सीपीआई(एम) ने इसे जातीय सफाया और नरसंहार का खुला आह्वान बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री को जेल भेजने और सुप्रीम कोर्ट से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
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यह पहली बार नहीं है जब असम बीजेपी के एक्स हैंडल पर विवाद हुआ है। पिछले साल सितंबर में पार्टी ने एक एआई-जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया था 'असम विदाउट बीजेपी'। इसमें स्कलकैप वाले व्यक्ति को सड़क पर मांस काटते, बीफ लीगलाइजेशन, बुरका-हिजाब वाली महिलाएं चाय बागान, एयरपोर्ट, पार्क, स्टेडियम में दिखाए गए थे। साथ में 'अवैध प्रवासी' लिखा था। अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस वीडियो को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था।

बहरहाल, यह ताज़ा घटना असम में बीजेपी की सोशल मीडिया रणनीति पर सवाल उठाती है। विपक्ष इसे मुस्लिम विरोधी बताकर हमला कर रहा है। पार्टी ने सफाई दी है कि यह गलती एक व्यक्ति की थी, लेकिन विवाद से पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा है। पुलिस में शिकायतें दर्ज हैं और मामला आगे बढ़ सकता है।