loader
फ़ोटो साभार: ट्विटर/वीडियो ग्रैब

शर्मनाक! पोस्टमार्टम के लिए 'घूस'; भीख मांगते फिर रहे माता-पिता

बिहार में कथित घूस मांगने का एक मामला सिहरन पैदा कर देने वाला है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक दंपति गमछा फैलाए गलियों में रुपये से मदद की गुहार लगा रहे हैं। वह ये रुपये इसलिए इकट्ठ कर रहे हैं ताकि वह कथित तौर पर घूस दे सकें। वह भी अस्पताल में पड़े अपने बेटे के शव को पाने के लिए। कथित तौर पर घूस के बिना उनके बेटे के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। जब वह रुपये इकट्ठे कर रहे थे तब उनके बेटे का शव अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए पड़ा था और वह रुपये देकर शव को वापस पाना चाहते थे।

कहा जा रहा है कि यह मामला बिहार के समस्तीपुर का है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए विडियो में दिखता है कि दंपति गलियों में गमछा फैलाए चलते हैं और लोग उन्हें कुछ रुपये सहायता के रूप में देते हैं। एक महिला भी खिड़कियों से रुपये उनके गमछे में डालती दिखती है। शक्ति वर्मा नाम के यूज़र ने वीडियो को साझा किया है।

अपने बायो में पत्रकार बताने वाले इस यूजर ने ट्वीट में लिखा है कि "एक पोस्टमार्टम कराने के लिए माता-पिता ने चंदा इकट्ठा किया, पोस्टमार्टम कर्मी ने कहा - '50 हज़ार लाओ और बेटे का शव ले जाओ'। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को टैग करते हुए लिखा है कि नीतीश कुमार थोड़ा राजनीति से बाहर निकल कर सोचिए सर क्या दिशा और दशा दे रहे हैं आप बिहार को इतने लंबे शासनकाल के बाद।

ताज़ा ख़बरें

एक अन्य यूज़र ने लिखा है, 'समस्तीपुर- जवान बेटे के पोस्टमार्टम के लिए माता-पिता पैसे जुटा रहे हैं। पोस्टमार्टमकर्मी ने कहा- 50 हजार लाओ बेटे का शव ले जाओ। यहां जीना मुश्किल है और मरना भी।'

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिता ने कहा कि उनका बेटा कुछ दिन पहले लापता हो गया था। एएनआई से बातचीत में मृतक के पिता महेश ठाकुर ने कहा, 'कुछ समय पहले मेरा बेटा लापता हो गया था। अब, हमें फोन आया है कि मेरे बेटे का शव समस्तीपुर के सदर अस्पताल में है। अस्पताल के एक कर्मचारी ने मेरे बेटे के शव को छोड़ने के लिए 50,000 रुपये मांगे हैं। हम गरीब लोग हैं, हम यह राशि कैसे दे सकते हैं?'

बिहार से और ख़बरें

इस मामले के सामने आने के पाद अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार समस्तीपुर के सिविल सर्जन डॉ. एसके चौधरी ने कहा, 'ज़िम्मेदार पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह मानवता के लिए शर्म की बात है।'

रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि ऐसे मामले अक्सर आते रहे हैं जहाँ मरीजों या उनके रिश्तेदारों से पैसे मांगने की शिकायतें मिलती रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में अधिकांश स्वास्थ्य कर्मचारी अनुबंध पर हैं और अक्सर उन्हें समय पर वेतन नहीं मिलता है।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

बिहार से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें