गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर रविवार को हजारों प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ जमा हो गई। मजदूरों ने रात भर कतारें लगाईं और सुबह तक प्लेटफॉर्म पूरी तरह भर गए। बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य उत्तरी राज्यों की ओर जाने वाली ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ रही, जिससे स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्लेटफॉर्म पर क्षमता से ज्यादा भीड़ होने के कारण कतारें रात 8 बजे से ही लगनी शुरू हो गई थीं। गवाहों के अनुसार, जब कतारें टूटने लगीं तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। यात्री घंटों धूप में खड़े रहे, कई लोगों ने 15 घंटे तक कतार में खड़े रहकर भूख और प्यास सहन की। कुछ यात्रियों को पानी जरूर उपलब्ध कराया गया, लेकिन वह पर्याप्त नहीं था।

क्यों हो रहा है पलायन?

गर्मी के मौसम और छुट्टियों के कारण सामान्य भीड़ के अलावा मजदूरों ने दो मुख्य वजहें बताईं। पहली, एलपीजी की भारी कमी। कई इलाकों में सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे या कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे मजदूर भोजन बनाना भी मुश्किल महसूस कर रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि वे भूखे रहने को मजबूर हो गए हैं।
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मज़दूरों को काम भी नहीं मिल रहा

ट्रेनों में जगह न होने के कारण कई मजदूर खड़े-खड़े सफर करने को मजबूर हुए। बिहार के दरभंगा के रहने वाले शोभित टांटी ने बताया, “मैं रात 8 बजे से कतार में हूं। परिवार के साथ हूं और डिब्बे में खड़े होने की भी जगह नहीं है।” उत्तर प्रदेश के शैलेंद्र यादव ने कहा, “15 घंटे से धूप में खड़ा हूं। न खाना मिला, न पानी। जगह छोड़कर नहीं जा सकता।” पटना के रोहित पासवान और जयहिंद मौर्य ने भी एलपीजी की कमी और काम कम होने की वजह से घर लौटने की बात कही।

दूसरी वजह, औद्योगिक गतिविधियों में मंदी। काम घटने, ओवरटाइम न मिलने और जीवित रहने की बढ़ती लागत ने मजदूरों को परेशान कर दिया। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर स्थानीय स्तर पर भी पड़ रहा है। सूरत जैसे औद्योगिक केंद्रों में प्रवासी मजदूर सूत कताई, टेक्सटाइल और अन्य छोटे उद्योगों पर निर्भर हैं।

यह पलायन सिर्फ सूरत तक सीमित नहीं है। नोएडा, पानीपत, गुरुग्राम, सोनीपत, बड़ौनी (बिहार) और मानेसर जैसे अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी मजदूरों में असंतोष देखा गया है। पिछले कुछ महीनों में न्यूनतम मजदूरी, बेहतर वेतन, काम की स्थिति और नई श्रम संहिताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

रेलवे का जवाब और व्यवस्था

वेस्टर्न रेलवे के पीआरओ अनुभव सक्सेना ने बताया, “गर्मी का मौसम शुरू होने से अतिरिक्त यात्री आ रहे हैं, लेकिन रेलवे ने पूरी तैयारी की है। आज पहली ट्रेन उधना से जयनगर के लिए सुबह 1:30 बजे रवाना हुई, उसके बाद 5:30 बजे मधुबनी के लिए। अब तक 21,000 से ज्यादा लोग यात्रा कर चुके हैं।”
डेप्युटी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (रेलवे) दीपक गौड़ ने कहा, “हम उनसे कह रहे हैं कि घर लौटकर इंतजार करें और रेलवे की नई ट्रेनों की घोषणा का इंतजार करें।”रेलवे ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही भ्रामक वीडियो से सतर्क रहने की अपील की और यात्रियों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा।
दिन चढ़ने के साथ अतिरिक्त ट्रेनों के आने से हालात सुधरे। कई यात्रियों ने बताया कि सुबह की तुलना में बोर्डिंग में बेहतरी आई है। रेलवे लगातार मांग पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर और ट्रेनें चलाने की तैयारी में है।सूरत गुजरात का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां लाखों प्रवासी मजदूर काम करते हैं। इस पलायन से औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार और रेलवे दोनों ही पक्ष स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।