क्या 140 करोड़ भारतीयों के डाटा को विदेश के हाथ में सौंपकर सुरक्षा से समझौता किया गया है? विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के ज़रिए पीएम मोदी ने देश के डेटा को विदेशी ताकतों के हाथों सौंप दिया है। राहुल ने दावा किया कि डेटा एआई का 'पेट्रोल' है और यह भारत की सबसे बड़ी संपत्ति है, लेकिन सरकार ने इसे अमेरिका के दबाव में गंवा दिया। यह बातें राहुल ने लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान कहीं, जहां उन्होंने सरकार पर 'भारत माता को बेचने' का आरोप लगाया।

राहुल गांधी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि एआई क्रांति आ गई है, जो खतरे और अवसर दोनों लेकर आई है। उन्होंने कहा, 'हमारी अर्थव्यवस्था का चमकता सितारा हमारा आईटी और सर्विस सेक्टर खतरे में है। हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर और पेशेवर अपनी नौकरियां खो सकते हैं अगर हम आने वाले तूफान के लिए तैयार नहीं हुए।' लेकिन साथ ही उन्होंने अवसरों की बात की। राहुल के मुताबिक, भारत के 1.4 अरब लोग और उनका डेटा देश की सबसे बड़ी ताक़त है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही एक बड़ा एआई समिट आयोजित करने वाली है, जो भारत को वैश्विक एआई में नेतृत्व दिखाने का मौका दे सकता था, लेकिन पीएम मोदी ने अमेरिका के 'चोकहोल्ड' में फंसकर सब कुछ गंवा दिया।
राहुल ने आरोप लगाया कि इस समझौते के बहाने डिजिटल व्यापार में बाधाओं को हटाने का नाम लेकर भारत का डेटा अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की हर कोशिश रोकी जाएगी। उन्होंने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, अमेजन और एंड्रॉइड जैसी बड़ी विदेशी कंपनियां पहले से ही भारत के डेटा पर एकाधिकार रखती हैं। अब इस डील से भारत को 1.4 अरब भारतीयों का डेटा भारत में सुरक्षित रखने में, उनके सोर्स कोड और एल्गोरिदम में पारदर्शिता लाने में, और उनके मुनाफे पर टैक्स लगाने में मुश्किल होगी। राहुल ने कहा, 'यह शर्म की बात है कि हमारे प्रधानमंत्री को दबाव में डालकर भारत की मुख्य संपत्ति को विदेशी ताक़त को सौंप दिया गया।'

'भारतीय डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति'

लोकसभा में अपनी स्पीच में राहुल ने कहा कि अमेरिका-चीन की लड़ाई में भारतीय डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति है। चीन के पास भी 1.4 अरब लोगों का डेटा है, लेकिन भारत ने इसे अमेरिका को सौंपकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों को खतरे में डाल दिया। राहुल ने कहा, 'पीएम मोदी ने बीजेपी की वित्तीय संरचना बचाने के लिए 1.4 अरब भारतीयों का भविष्य बेच दिया। यह पूरा सरेंडर है।' उन्होंने ट्रंप को संदेश दिया कि अमेरिका भारत से बराबरी से बात करे, न कि नौकर की तरह।
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डाटा पर संसद के बाहर भी ड्रामा

इस मामले में संसद के बाहर भी ड्रामा हुआ। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रल्हाद जोशी मीडिया से डेटा सिक्योरिटी पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत का सारा डेटा सुरक्षित है, क्योंकि डेटा प्राइवेसी कानून और टेक्नोलॉजी है। लेकिन जैसे ही राहुल गांधी वहां पहुंचे और कहा, 'आइए मीडिया से साथ में बात करें', वैष्णव और जोशी तेजी से वहाँ से चले गए। राहुल ने वैष्णव पर आरोप लगाया कि वे झूठ बोल रहे हैं और बहस से भाग रहे हैं।

राहुल की बात अहम क्यों?

राहुल की बातों में बिहेवियरल डेटा का ज़िक्र खास है। यह वह डेटा है जो लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट, कमेंट, बहस से बनाते हैं। शब्द, भावनाएं, तर्क के माध्यम से लाखों करोड़ों लोग अलग-अलग विषयों पर अपनी राय देते हैं, जो एआई को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल होता है। यह डेटा मेटा, एक्स जैसी कंपनियों को जाता है, जो इससे जनरल एआई बनाती हैं, जो इंसान की तरह व्यवहार कर सकता है, गाली दे सकता है या गीत लिख सकता है। स्पेशल एआई सिर्फ कैलकुलेशन करता है, लेकिन जनरल एआई भविष्य है।

भारत में सबसे ज़्यादा आबादी और सोशल मीडिया यूजर्स होने से सबसे ज़्यादा डेटा बनता है, लेकिन फायदा विदेशी कंपनियों को हो रहा है। चीन में फेसबुक, ट्विटर के अपने वर्जन हैं, जो उनका डेटा रखते हैं और इससे एआई बनाते हैं। भारत में ऐसा कुछ नहीं है।
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इस मामले में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डेटा प्रोटेक्शन एक्ट से भारत का डेटा सुरक्षित है और संवेदनशील सेक्टरों में अपने कानून हैं। उन्होंने राहुल से आरोपों का प्रमाण मांगा। लेकिन राहुल का कहना है कि वैष्णव आधार, पैन जैसे पर्सनल डेटा की बात कर रहे हैं, जबकि मुद्दा बिहेवियरल डेटा का है, जो लोग खुद सोशल मीडिया को देते हैं।

यह विवाद जारी है। राहुल ने कहा कि सरकार बहस से डरती है, जबकि विपक्ष चर्चा चाहता है। यह मुद्दा भारत के डिजिटल भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, जो आने वाले दिनों में और गरमाएगा।