अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) तथा अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी अदालत से दस्तावेज दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। दोनों पक्षों ने मिलकर जज निकोलस जी. गारौफिस की कोर्ट में नया संशोधित ब्रिफिंग शेड्यूल प्रस्तुत किया है।
  • इस खबर या सूचना का सिर्फ इतना महत्व है कि अमेरिकी कोर्ट में अब अडानी रिश्वतखोरी मामले की सुनवाई सिलसिलेवार होगी। इस साल के अंत तक इस केस का निपटारा हो सकता है।
एसईसी ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और सागर अडानी पर मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों से जुड़ी कथित रिश्वतखोरी की योजना को छिपाकर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया और अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन किया। अडानी परिवार इन सभी आरोपों से इनकार करता रहा है और मुकदमे को खारिज करने की मांग कर रहा है।
7 अप्रैल को प्रतिवादियों (गौतम और सागर अडानी) ने मोटन टू डिसमिस (मुकदमा खारिज करने की अर्जी) से पहले एक प्री-मोशन लेटर दाखिल किया था। इसमें उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला अमेरिकी कानून का अनुचित इस्तेमाल और सीमा से बाहर है। अदालत को उन पर व्यक्तिगत क्षेत्राधिकार (personal jurisdiction) प्राप्त नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों को अगले कदमों पर चर्चा करने का निर्देश दिया था।
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प्रस्तावित नया शेड्यूल

  • प्रतिवादियों (गौतम-सागर अडानी) की मोटन टू डिसमिस 8 जून तक दाखिल की जाएगी।
  • एसईसी अपनी संशोधित शिकायत या विरोध 7 अगस्त तक दाखिल करेगा।
  • प्रतिवादियों का जवाबी दस्तावेज 21 सितंबर तक दाखिल किया जाएगा।
प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस के लिए संभावित तारीखें 20 मई, 22 मई या 29 मई प्रस्तावित की गई हैं, जो अदालत की उपलब्धता पर निर्भर करेंगी।जनवरी में स्वीकृत पुराने शेड्यूल में मोटन टू डिसमिस की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, एसईसी के जवाब की 29 जून और प्रतिवादियों के जवाबी दस्तावेज की 13 अगस्त रखी गई थी।
अपनी अपेक्षित मोटन टू डिसमिस में अडानी पक्ष तर्क देगा कि अदालत को क्षेत्राधिकार नहीं है क्योंकि आरोप अमेरिका के बाहर की घटनाओं से संबंधित हैं, कथित बयान बहुत सामान्य हैं जिन पर निवेशक भरोसा नहीं कर सकते, और वे 2021 में हुए 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड ऑफरिंग में शामिल नहीं थे।
यह मामला न्यूयॉर्क की पूर्वी जिला अदालत (US District Court for the Eastern District of New York) में चल रहा है। गौतम अडानी का प्रतिनिधित्व सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी कर रहा है, जबकि सागर अडानी का प्रतिनिधित्व निक्सन पीबॉडी एलएलपी और हेकर फिंक एलएलपी कर रहे हैं। एसईसी की ओर से न्यूयॉर्क क्षेत्रीय कार्यालय पेश हो रहा है।
ब्रुकलिन के फेडरल प्रॉसीक्यूटर्स ने अडानी और अन्य लोगों पर भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 265 मिलियन डॉलर (उस समय लगभग 2,100 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने का आपराधिक आरोप लगाया है। अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों से बार-बार इनकार किया है और कहा है कि आरोप निराधार हैं।

क्या है पूरा मामला

यह मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब अमेरिका के सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड कमिशन यानी एसईसी ने गौतम अडानी और सागर अडानी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी के ज़रिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों रुपये की रिश्वत दी या देने का वादा किया। यह सब सोलर पावर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए किया गया। कंपनी ने 2021 में 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड जारी किए थे, जिसमें अमेरिकी निवेशकों से क़रीब 175 मिलियन डॉलर जुटाए गए। एसईसी का कहना है कि बॉन्ड बेचते समय कंपनी ने अपनी भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी। इसके साथ ही अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने आपराधिक केस भी दर्ज किया था, जिसमें सिक्योरिटीज फ्रॉड, वायर फ्रॉड जैसे गंभीर आरोप हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी पर अमेरिकी न्याय विभाग में अटॉर्नी ने नवंबर 2024 में 250 मिलियन डॉलर (लगभग 2,100 करोड़ रुपये) के रिश्वत घोटाले का आरोप लगाया था। इसमें अडानी और उनके सहयोगियों पर भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देकर सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने का इल्जाम है। इसमें अमेरिकी निवेशकों को भी धोखा दिया गया। इस मामले ने भारत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपति को गहरा झटका दिया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं।
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नवंबर 2024 में, अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice, DOJ) तथा प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने अडानी और अन्य सहयोगियों पर आरोप लगाए कि उन्होंने लगभग $265 मिलियन की रिश्वत (“bribery scheme”) दी थी। ताकि भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट्स और सरकारी ऊर्जा आपूर्ति के ठेकों को हासिल किया जा सके। आरोप यह भी है कि अडानी समूह ने अमेरिकी निवेशकों को इस मामले की जानकारी छुपाई थी — अर्थात्, कंपनी ने यह दावा किया कि सब कुछ वैधानिक है, जबकि आंतरिक तौर पर रिश्वत और धोखाधड़ी की गतिविधियाँ चल रही थीं।

हालांकि ये सब अभी आरोप हैं। कोई मामला साबित नहीं हुआ है। साबित होने पर सज़ा सुनाई जाएगी।