ईरान युद्ध पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के समर्थन का दावा किया तो कांग्रेस ने मीटिंग को असंतोषजनक क्यों बताया?
ईरान-इसराइल-अमेरिका युद्ध से भारत में उपजे संकट को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में एकजुटता की बात कही गई तो मतभेद भी दिखे। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक के बाद कहा कि विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है, लेकिन कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि बैठक असंतोषजनक रही। आप नेता संजय सिंह ने हालात पर चिंता जताई और युद्ध शुरू होने से दो दिन पहले पीएम मोदी की इसराइल यात्रा को लेकर कड़े सवाल पूछे। टीएमसी ने बैठक में भाग ही नहीं लिया। प्रधानमंत्री मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बैठक में शामिल नहीं हुए। सभी दलों ने ऊर्जा संकट पर चिंता जताई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जब विपक्षी नेताओं ने पूछा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिए कोई झटका है, तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत 'दलाल देश' नहीं बन सकता, जो दूसरे देशों के पीछे भागे और पूछे कि क्या उसकी सेवाओं की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान 1981 से ही यह भूमिका निभा रहा है। बैठक में मौजूद कुछ लोगों के अनुसार, जयशंकर ने यह भी बताया कि अगर इसे अब भारत की विदेश नीति की विफलता माना जा रहा है, तो यह पहले भी एक विफलता ही थी।
रिजिजू- विपक्ष सरकार के साथ; कांग्रेस- बैठक असंतोषजनक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकार ने विपक्षी नेताओं को स्थिति की जानकारी दी। बैठक के बाद किरेन रिजिजू ने एएनआई से कहा, 'आज सरकार की तरफ से वेस्ट एशिया की स्थिति पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। सभी दलों के सदस्यों ने भाग लिया। तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख विपक्षी दल आए। मैंने टीएमसी को दो बार आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने कहा कि वे यात्रा पर हैं इसलिए नहीं आ सकते।' रिजिजू ने आगे कहा,सरकार की तरफ से सभी सवालों और शंकाओं का विस्तार से जवाब दिया गया। विपक्षी नेताओं ने अंत में धन्यवाद दिया और कहा कि इस मुश्किल समय में वे सरकार के हर कदम के साथ खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री ने अपील की थी कि चुनौती के समय पूरा देश एक होकर खड़ा हो। आज विपक्ष ने परिपक्वता दिखाई। किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री
रिजिजू ने विशेष रूप से बताया कि कई सदस्यों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गैस और पेट्रोलियम सप्लाई के बारे में पूछा। सरकार ने उन्हें बताया कि भारत ने पहले से ही चार जहाज सुरक्षित कर लिए हैं। मंत्री ने कहा कि इससे विपक्षी सदस्य संतुष्ट दिखे। रिजिजू ने कहा कि बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, तेल आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में ये मंत्री पहुँचे
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री समेत कई बड़े मंत्री मौजूद थे। बैठक का मक़सद भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और विदेश में रह रहे भारतीयों पर युद्ध के प्रभाव को समझाना था।किरेन रिजिजू ने जोर देकर कहा कि सरकार ने सभी सवालों का जवाब दिया और विपक्ष ने सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद में ही देश को लंबे समय की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की अपील की थी और सात सशक्त समूह बनाए गए हैं ताकि ईंधन आपूर्ति और सप्लाई चेन प्रभावित न हो।
कांग्रेस ने बैठक को बताया असंतोषजनक
कांग्रेस पार्टी ने बैठक को असंतोषजनक बताया। एएनआई के अनुसार बैठक में शामिल रहे कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा, 'बैठक असंतोषजनक रही। विपक्ष की मुख्य मांग है कि लोकसभा और राज्यसभा में खुली बहस हो, सिर्फ बंद कमरे में ब्रिफिंग नहीं।'
कांग्रेस ने पहले ही मांग की थी कि इस मुद्दे पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बैठक में नहीं आए। उन्होंने केरल में पहले से तय कार्यक्रम का हवाला दिया था।
राहुल गांधी ने कहा था कि विदेश नीति में संरचनात्मक गलती हुई है और इसको सुधारने में काफी वक़्त लगेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यह काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं हो सकता है और प्रधानमंत्री अमेरिका-इसराइल की लाइन पर चल रहे हैं।
युद्ध से पहले इसराइल यात्रा क्यों: संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा, 'हमने अपनी चिंताएं रखीं। देश में गैस सिलेंडर के लिए लोग लाइन में खड़े हैं। लोगों में घबराहट है। सरकार ने कहा कि हम 60 प्रतिशत एलपीजी घरेलू उत्पादन से बना रहे हैं, कोई कमी नहीं होगी, तेल के भंडार भी हैं। लेकिन हमने पूछा कि हम इस युद्ध में क्यों फँस रहे हैं, प्रधानमंत्री युद्ध से दो दिन पहले क्यों गए थे, पाकिस्तान मध्यस्थ क्यों बन रहा है, इन पर सरकार ने अपने तरीके से जवाब दिया।'
'बैठक पहले होनी चाहिए थी'
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने कहा, 'यह बैठक पहले होनी चाहिए थी। खाड़ी देशों में हमारे कई लोग फंसे हैं और एलपीजी की कमी भी है। इसमें देरी हुई है। हम चाहते हैं कि विपक्षी सांसदों की राय भी ली जाए, कोई एकतरफा फैसला न हो। यह संकट का समय है।'
बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऊर्जा स्थिति, कूटनीति और भारतीय डायस्पोरा की सुरक्षा पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संसद सदस्यों में आम सहमति है कि इस संकट में पूरा देश एक साथ खड़ा रहेगा ताकि भारत सुरक्षित निकल सके।
केंद्रीय मंत्री का राहुल पर हमला
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'राहुल गांधी का बयान यह सवाल उठाता है कि वे भारत के हित में हैं या अफवाहें फैलाने में। उन्होंने पाकिस्तान की तारीफ की है। उन्हें साफ करना चाहिए कि वे भारत के साथ हैं या पाकिस्तान के। पिछले 10-12 साल से वे पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। सर्वदलीय बैठक की मांग करने के बाद खुद और टीएमसी का न आना उनकी गैरजिम्मेदाराना को दिखाता है।'
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से भारत में एलपीजी और तेल की कीमतों तथा आपूर्ति पर असर की आशंका है। सरकार का कहना है कि वह पूरी तैयारी के साथ है, जबकि विपक्ष खुली बहस और ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहा है।