पश्चिम बंगाल SIR में मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए वे लोग अब वोट डाल सकेंगे जिनके नाम 21 और 27 अप्रैल से पहले ट्रिब्यूनल मंजूर कर देगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह फ़ैसला दिया है जिसको गुरुवार को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इस फ़ैसले के अनुसार यदि पहले चरण के चुनाव वाले क्षेत्रों में 21 अप्रैल और दूसरे चरण के चुनाव वाले क्षेत्रों में 27 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल द्वारा नाम मंजूर किए जाते हैं तो इसके लिए चुनाव आयोग को सप्लीमेंट्री मतदाता सूची जारी करनी होगी और फिर ये मतदाता वोट डाल सकेंगे। राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को है।
यानी सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची विवाद में बड़ा फैसला सुना दिया है। लाइल लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में सप्लीमेंट्री रिवाइज्ड इलेक्टोरल रोल जारी की जाए, ताकि वे आगामी चुनाव चरणों में अपना वोट डाल सकें। तृणमूल कांग्रेस ने इस फ़ैसले पर अपनी बड़ी जीत बतायी है। इसने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में श्रीमती ममता बनर्जी के लिए एक अहम जीत। उन्होंने लोगों के संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया और विजयी हुईं।'

कोर्ट का क्या आदेश है?

पहले चरण के चुनाव के लिए अगर अपील 21 अप्रैल तक स्वीकार हो जाती है तो नाम अतिरिक्त सूची में जोड़ा जाएगा। इन लोगों को 23 अप्रैल को वोट डालने का मौका मिलेगा। दूसरे चरण के लिए अगर अपील 27 अप्रैल तक स्वीकार हो जाती है तो नाम जोड़ा जाएगा और वे 29 अप्रैल को वोट डाल सकेंगे।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर अपीलीय ट्रिब्यूनल अपील पर अंतिम फैसला दे देता है तो उसका पूरा असर लागू किया जाएगा। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ़ कहा, 'केवल अपील दायर करने भर से कोई व्यक्ति वोट नहीं डाल सकेगा। अपील लंबित होने से वोटिंग का अधिकार नहीं मिलेगा।'

पूरा विवाद क्या है?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं। 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होंगे। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तहत मतदाता सूची की विशेष समीक्षा की थी। इसमें लाखों नामों को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी या अन्य कारणों से हटाया गया। इससे बहुत से लोग परेशान हुए और उन्होंने अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अपील लंबित रहने पर अंतरिम रूप से वोटिंग अधिकार नहीं दिया जा सकता है। अगर ऐसा किया गया तो उन लोगों के वोटिंग अधिकार भी रोकने पड़ेंगे जिनके नाम शामिल हैं लेकिन उनके ख़िलाफ़ भी अपील लंबित है। इससे पहले जैसी अव्यवस्था हो जाएगी।

न्यायिक अधिकारियों की सराहना

कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों की तारीफ़ की। उन्होंने बहुत कम समय में 60 लाख से ज़्यादा आपत्तियों का निपटारा किया, जो एक बहुत बड़ा और कठिन काम था। अब तक 34 लाख से ज़्यादा अपीलें अपीलीय ट्रिब्यूनल में दाखिल हो चुकी हैं। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों ने वास्तव में बहुत बड़ा काम किया है।
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क्या नहीं मिला?

सुप्रीम कोर्ट ने अपील लंबित रहने वाले लोगों को अंतरिम वोटिंग अधिकार देने की मांग ठुकरा दी। याचिकाकर्ताओं ने यह मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया में और उलझन बढ़ेगी। कोर्ट ने मुख्य मामले को आगे की सुनवाई के लिए 24 अप्रैल को सूचीबद्ध किया है।

अब मतदाता क्या करें?

  • अगर आपका नाम SIR में हटाया गया था और आपने अपील की है, तो जल्दी से जल्दी ट्रिब्यूनल में अपना केस पूरा करवाएं।
  • अगर 21 अप्रैल या 27 अप्रैल तक अपील मंजूर हो जाती है तो आपका नाम अतिरिक्त सूची में जुड़ जाएगा और आप वोट डाल सकेंगे।
  • लेकिन यह ध्यान रखें कि सिर्फ अपील दायर करने से वोट डालने का अधिकार नहीं मिलेगा।
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यह फ़ैसला पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव में लाखों मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। यह आदेश सोमवार यानी 13 अप्रैल को सुनवाई के बाद गुरुवार दोपहर को अपलोड किया गया।