आरएसएस खुद को गैर राजनीतिक संगठन कहता है। लेकिन संघ प्रमुख बंगाल में राजनीतिक बयान देते नज़र आए। उन्होंने कहा कि बंगाल में हालात बदलने के लिए हिन्दू एकजुट हों। यानी वो बंगाल चुनाव में टीएमसी को हराने के लिए हिन्दू कार्ड खेल रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कोलकाता में कहा कि यदि सभी हिंदू एकजुट होकर खड़े हो जाएं, तो पश्चिम बंगाल की स्थिति को बदलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संगठन सामाजिक परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि राजनीतिक परिवर्तन पर। लेकिन उनका बयान राजनीतिक नज़रिए से ही देखा जा रहा है। भागवत ने कोलकाता के भाषण में संविधान के महत्व को भी कम करने की कोशिश की।
यहां बताना ज़रूरी है कि नेता विपक्ष राहुल गांधी लगातार आरएसएस को भारत विरोधी बता रहे हैं। जिसमें अंग्रेजों के समय उनकी मुखबिरी करने, जिन्ना के साथ मिलकर बंगाल में सरकार चलाने, सावरकर के माफी मांगने, भारतीय संविधान के खिलाफ लेख लिखने, लंबे समय तक तिरंगा न फहराने के आरोप और सत्य घटनाएं शामिल हैं। भागवत आरक्षण को भी खत्म करने की वकालत कर चुके हैं लेकिन बाद में बयान वापस ले लिया। भागवत राहुल गांधी और कांग्रेस का नाम लिए बिना उन्हें बुरे लोग बता रहे हैं।
संघ प्रमुख ने कोलकाता में रविवार को कहा कि आरएसएस का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, लेकिन भारत विरोधी और संघ विरोधी प्रचार बढ़ गया है, क्योंकि हिंदू धर्म के उदय से डरने वाले 'बुरे लोग' ऐसा कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस और राहुल गांधी ने कभी हिन्दू धर्म या सनातन धर्म के विरोध में कुछ नहीं कहा, उनका सिर्फ यह कहना है कि आरएसएस किस तरह देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा है। लेकिन आरएसएस उनके बयान को हिन्दू धर्म से जोड़ रहा है।
आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि आरएसएस को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चश्मे से देखना बड़ी भूल है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं और स्थिति काफी कठिन है। अधिकतम सुरक्षा के लिए वहां के हिंदुओं को एकजुट रहना होगा। दुनिया भर के हिंदू, जिसमें भारत के हिंदू भी शामिल हैं, उनकी मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम अपनी सीमा के भीतर जितना हो सके, मदद करेंगे। हम सब कुछ कर रहे हैं और करते रहेंगे।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुओं का एकमात्र देश भारत है। भारत सरकार को इस स्थिति का संज्ञान लेना होगा और कुछ करना होगा। कुछ कार्य खुलेआम होते हैं, कुछ गोपनीय रहते हैं, लेकिन कुछ न कुछ किया जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में अगले साल अप्रैल-मई में संभावित विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भागवत ने कहा, "राजनीतिक परिवर्तन के बारे में सोचना मेरा काम नहीं है। हम संघ के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के लिए काम कर रहे हैं।"
हिन्दू राष्ट्र पर संविधान की मंज़ूरी की ज़रूरत नहींः मोहन भागवत
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है और इसके लिए भारतीय संविधान से किसी मंजूरी की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह "सत्य" है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक देश में भारतीय संस्कृति की सराहना करने वाले और पूर्वजों की गौरवगाथा को संजोए रखने वाले लोग जीवित हैं, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र रहेगा।
भागवत ने कहा, "सूर्य पूर्व में उगता है; हमें नहीं पता कि यह कब से हो रहा है। क्या इसके लिए भी संवैधानिक मंजूरी चाहिए? हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। जो कोई भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और भारतीय संस्कृति की सराहना करता है, हिंदुस्तान की भूमि पर पूर्वजों की गौरवगाथा में विश्वास करने वाला और उसे संजोने वाला कम से कम एक व्यक्ति जीवित रहते तक भारत हिंदू राष्ट्र है।"
उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस, जो हिंदुत्व की विचारधारा पर दृढ़ता से विश्वास रखता है, इस बात की परवाह नहीं करता कि संसद संविधान में संशोधन करके भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करे या नहीं। "अगर संसद कभी संविधान में संशोधन करके वह शब्द जोड़ने का फैसला करती है, तो करें या न करें, ठीक है। हमें उस शब्द की परवाह नहीं है क्योंकि हम हिंदू हैं, और हमारा राष्ट्र हिंदू राष्ट्र है। यही सत्य है। जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की विशेषता नहीं है।"
भागवत ने स्वदेशी भाषाओं के इस्तेमाल पर जोर देते हुए बंगाली बोलने वालों से कहा कि घर के प्रवेश द्वार पर 'वेलकम' की जगह 'स्वागतम' लिखें।
मुस्लिम विरोध पर भी भागवत बोले
आरएसएस पर मुस्लिम विरोधी होने की धारणा के बारे में उन्होंने कहा कि संघ का काम पारदर्शी है। "अगर आपको लगता है कि हम मुस्लिम विरोधी हैं, तो जैसा मैंने कहा, आरएसएस का काम पारदर्शी है। आप कभी भी आकर देख सकते हैं, और अगर आपको कुछ ऐसा होता दिखे, तो अपनी राय रखें, और अगर न दिखे, तो अपनी राय बदलें। आरएसएस को समझने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन अगर समझना नहीं चाहते, तो कोई आपका विचार नहीं बदल सकता।"
संघ प्रमुख भागवत का राजनीतिक संकेत लिए बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाले हैं। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी सत्ता से बाहर करने की कोशिश जोरशोर से कर रही है। इस बार विधानसभा चुनाव निकट हैं और प्रधानमंत्री मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह लगातार बंगाल के दौरे कर रहे हैं। इनके अलावा एसआईआर भी हो रही है। साथ ही टीएमसी से बगावत करने वाले विधायक हुमायूं कबीर को आगे करके हिन्दू-मुसलमान कार्ड भी खेला जा रहा है।