भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का कड़ा विरोध किया है। किसान नेता राकेश टिकैत ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के दौरान पीएम मोदी और यूएस राष्ट्रपति ट्रंप के पुतले जलाने की घोषणा की है।
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने भारत-अमेरिका के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते का कड़ा विरोध जताया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाने की घोषणा की है।
बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंगलवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों का विश्वास खो दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ होने वाले व्यापार समझौते किसानों पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे।
टिकैत ने बताया कि समझौतों के वास्तविक दस्तावेज अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और ये "गोपनीयता के पर्दे" के पीछे छिपे हुए हैं। उन्होंने मांग की कि भारत को अमेरिका और ईयू के साथ इन समझौतों से पूरी तरह वापस लेना चाहिए या कम से कम कृषि से संबंधित सभी प्रावधानों को हटाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "अमेरिका और यूरोपीय संघ अपने किसानों को भारी सब्सिडी देते हैं और उनके पास कृषि कचरे की बड़ी मात्रा है, जिसे वे भारत जैसे देशों में डंप करने की कोशिश करते हैं। दुर्भाग्य से, भारत सरकार ने किसान संगठनों से कोई परामर्श किए बिना और कृषि तथा किसानों की आजीविका पर प्रभाव का आकलन किए बिना ये समझौते कर लिए हैं।"
बीकेयू ने विशेष रूप से अमेरिका से ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (डीडीजीएस) और सोयाबीन ऑयल के आयात का विरोध किया है। टिकैत के अनुसार, डीडीजीएस के आयात से पशु चारे के लिए इस्तेमाल होने वाली फसलों जैसे मक्का, ज्वार और सोयाबीन की घरेलू कीमतें बुरी तरह गिर जाएंगी। सोयाबीन ऑयल के आयात से सोयाबीन की फार्म-गेट कीमतें और नीचे आएंगी, जो पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,328 रुपये से काफी कम चल रही हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान के सोयाबीन किसान पहले से ही गंभीर मूल्य संकट का सामना कर रहे हैं और यह समझौता उनकी स्थिति को और खराब कर देगा।
टिकैत ने बीज विधेयक, कीटनाशक प्रबंधन विधेयक और बिजली (संशोधन) विधेयक को भी किसानों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि बीज विधेयक बीजों की कीमतें बढ़ाएगा, कॉर्पोरेट नियंत्रण मजबूत करेगा और किसानों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को कमजोर करेगा। कीटनाशक विधेयक उद्योग के हितों की रक्षा करता है, जबकि बिजली संशोधन विधेयक बिजली क्षेत्र के निजीकरण और व्यावसायीकरण का रास्ता खोलेगा।
बीकेयू ने सभी गांवों में मोदी और ट्रंप के पुतले जलाने का आह्वान किया है। साथ ही, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा 12 फरवरी को बुलाई गई सामान्य हड़ताल में किसान साथ देंगे। टिकैत ने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों की बात नहीं सुनती तो विरोध और तेज होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का किसान विरोध मुख्य रूप से इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे मानते हैं कि यह समझौता अमेरिकी सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों (जैसे DDGS - Dried Distillers Grains with Solubles, सोयाबीन ऑयल और रेड सोरघम) के आयात को आसान बनाएगा, जिससे घरेलू बाजार में इनकी कीमतें गिरेंगी। यह डील उनकी आजीविका को और खतरे में डाल देगी।
किसानों का आरोप है कि सरकार किसानों के हित सुरक्षित होने का दावा कर रही है, लेकिन वास्तव में संवेदनशील उत्पादों (जैसे गेहूं, चावल, डेयरी, मांस) को बाहर रखने के बावजूद DDGS और सोयाबीन ऑयल जैसे उत्पादों पर टैरिफ छूट से पशु चारे और खाद्य तेल बाजार प्रभावित होगा। वे इसे "एकतरफा" और "दबाव वाली" डील बताते हैं, जिसमें अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियां भारतीय बाजार पर कब्जा कर लेंगी। किसान संगठन जैसे SKM, AIKS और BKU ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी विरोध और हड़ताल का ऐलान किया है, जिसमें मोदी-ट्रंप के पुतले जलाने जैसे प्रतीकात्मक कदम शामिल हैं। उनका कहना है कि यह समझौता किसानों के साथ "विश्वासघात" है और बिना प्रभाव मूल्यांकन के किया गया है।
सरकार की ओर से जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें से कई को किसान "झूठ" मानते हैं। जैसे, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि संवेदनशील कृषि क्षेत्र सुरक्षित हैं, GM उत्पाद नहीं आएंगे और आयात कोटा-आधारित (जैसे DDGS पर सीमित मात्रा) रहेगा, लेकिन किसान इसे "झूठा आश्वासन" बताते हैं क्योंकि "अन्य उत्पादों" की अस्पष्टता से भविष्य में अनियंत्रित आयात हो सकता है। वे कहते हैं कि सरकार पहले भी MSP और कृषि कानूनों पर झूठ बोल चुकी है, इसलिए अब विरोध ही एकमात्र रास्ता है। किसानों का मानना है कि ये दावे केवल राजनीतिक हैं, जबकि वास्तविकता में अमेरिकी अधिशेष उत्पाद भारतीय किसानों को बर्बाद कर देंगे।