• एसआईआर की समय सीमा दो महीना बढ़ाने को लेकर पश्चिम बंगाल में बीएलओ ने सोमवार को प्रदर्शन किया
  • सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने हलफनामा देकर दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में 99 फीसदी से ज्यादा फॉर्म बांट दिए गए हैं
  • संसद में सोमवार को विपक्ष ने एसआईआर पर चर्चा कराने की मांग की लेकिन स्पीकर ने साफ मना कर दिया
  • यूपी के मुरादाबाद में सर्वेश सिंह नामक बीएलओ का दहलाने वाला वीडियो सामने आया, जिससे बीएलओ की परेशानी का पता चल रहा
बीएलओ की आवाज सोमवार को सड़क से संसद तक गूंजी। एक तरफ उन्होंने कोलकाता में चुनाव आयोग के दफ्तर के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ लोकसभा में विपक्ष ने बीएलओ की आवाज़ बार-बार उठाई लेकिन स्पीकर ने चर्चा की अनुमति नहीं दी। 12 राज्यों में जारी एसआईआर प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल 99.24% गणना फॉर्म (EF) डिजिटलीकरण पूरा करने के साथ चौथे स्थान पर है। इसके बावजूद 'बीएलओ अधिकार रक्षा समिति' का विरोध प्रदर्शन जारी है। वे दो महीने की समय सीमा के विस्तार और बिना परेशानी वाला बीएलओ ऐप की मांग कर रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने रविवार को एसआईआर की समय सीमा 7 दिन बढ़ा दी थी। लेकिन बीएलओ ने इसे ठुकरा दिया है।
एक अन्य प्रदर्शनकारी बीएलओ ने कहा, "सात दिन के विस्तार का हमारे लिए कोई मतलब नहीं है। चुनाव आयोग ने एसआईआर को बिना योजना के शुरू किया।" यह विरोध 24 नवंबर को शुरू हुआ था। कल, कुछ बीएलओ ने सीईओ के वाहन के सामने सड़क को जाम कर दिया था।
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एक अन्य निकाय 'बीएलओ वोट कर्मी ऐक्य मंच' के महासचिव स्वपन मंडल ने इस विस्तार का स्वागत किया और कहा, "आने वाले महीनों में शिक्षकों को स्कूलों में परीक्षाएं आयोजित करनी होंगी और परिणाम अपलोड करने होंगे। कुछ मतदाताओं ने शुरुआत में ईएफ ले लिए हैं लेकिन वापस नहीं किए हैं। हम उनसे उन्हें वापस करने का आग्रह करते हैं, ताकि हम डिजिटलीकरण पूरा कर सकें।"
बंगाल में लगभग 37 लाख डिजिटलीकरण पूरा होना बाकी है। करीब 7.29 करोड़ गणना फॉर्म का डिजिटलीकरण पूरा हो गया है, जबकि राज्य की कुल आबादी 7.66 करोड़ है। लक्षद्वीप ने 100% डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। गोवा और राजस्थान दो राज्य हैं जो बंगाल से आगे हैं। सोमवार दोपहर 3 बजे तक 7.65 करोड़ ईएफ वितरित किए गए हैं, जो 99.89% है।

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने क्या कहा

ईसीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के चल रहे एसआईआर के कारण बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने के आरोप "बेहद बढ़ा-चढ़ाकर" पेश किए गए हैं और "निहित राजनीतिक हितों" को साधने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं। सांसद डोला सेन द्वारा 24 जून और 27 अक्टूबर 2025 को जारी एसआईआर आदेशों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका के जवाब में आयोग द्वारा दायर एक जवाबी हलफनामे में, आयोग ने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया संवैधानिक रूप से अनिवार्य, सुस्थापित और नियमित रूप से संचालित की जाती है। 
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बीएलओ मर रहे हैं और संवैधानिक संस्थाएं चुप हैं

बीएलओ की खुदकुशी का सिलसिला रुक नहीं रहा है। एक वरिष्ठ तृणमूल नेता ने कहा कि मुर्शिदाबाद में एक और बीएलओ की मौत हुई है, जिससे कुल संख्या चार हो गई है, और लगभग 14 अन्य का इलाज चल रहा है। हालांकि टीएमस के सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने 40 नामों की सूची जारी की है। लेकिन आधिकारिक मौतों की संख्या चार है। जिसमें बर्धमान जिले में, मुर्शिदाबाद जिले में, नदिया के चापरा और जलपाईगुड़ी के मालबाजार में दो बीएलओ की मौत हुई। उधर, यूपी के मुरादाबाद में सर्वेश सिंह ने रविवार को जान दे दी। जान देने से पहले उन्होंने अपना वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया जो बहुत वायरल है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, यूपी सरकार ने इस पर चुप्पी साध ली है।