सीबीएसई के OSM विवाद पर बड़ी कार्रवाई हुई, लेकिन विवादों में घिरे मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर नहीं, बल्कि CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता पर। दोनों अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया और वरुण भारद्वाज को इसका नया सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही OSM सेवाओं की खरीदारी में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति भी बना दी गई है। यह कार्रवाई तब हुई है जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे मामले में चारों तरफ से घिरे हुए हैं। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में CBSE के रिजल्ट और उत्तर पुस्तिकाओं की ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर काफी नाराजगी है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर हमलावर है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तक लगातार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं। इस चौतरफ़ा दबाव के बीच ही मोदी सरकार ने ताज़ा कार्रवाई की है।

असल ज़िम्मेदार धर्मेंद्र प्रधान- सुरक्षित: राहुल गांधी

सीबीएसई अध्यक्ष और सचिव के ट्रांसफर के बाद राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर और बड़ा हमला किया। उन्होंने कहा, "CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र। CBSE सचिव - ट्रांसफ़र। एक-सदस्यीय 'जाँच' समिति - गठित। और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान- सुरक्षित। अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया। यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है। हमारी माँग आज भी वही है: शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो - ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए। अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह होती - धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।"

CBSE चेयरमैन और सचिव क्यों हटाए गए?

सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह बोर्ड की पूरी व्यवस्था देखते थे। इनमें परीक्षाएं, पढ़ाई, स्कूलों की मान्यता और नई नीतियां शामिल थीं। वहीं सचिव हिमांशु गुप्ता प्रशासन, वित्त और स्कूलों की मान्यता जैसे अहम काम संभालते थे। दोनों अधिकारियों को अचानक ट्रांसफर कर दिया गया है। यह कार्रवाई ओएसएम विवाद के कुछ हफ्तों बाद आई है। जानकारों का कहना है कि यह सीबीएसई में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव है।
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ओएसएम खरीदारी की जाँच होगी

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कहा है कि ओएसएम सिस्टम की सेवाएँ खरीदने की पूरी प्रक्रिया की जाँच के आदेश दे दिए हैं। इस एक सदस्यीय समिति की अध्यक्षता एस राधा चौहान करेंगी। वह कैपिसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरमैन हैं। समिति को ज़रूरत पड़ने पर दूसरे विभागों के अधिकारियों की मदद लेने का अधिकार दिया गया है। एक महीने के अंदर यह समिति अपनी रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपेगी।

विवाद की वजह क्या है?

सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं के रिजल्ट आने के बाद छात्रों को अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ ऑनलाइन देखने की सुविधा दी जाती है। लेकिन इस बार बहुत से छात्रों ने शिकायत की कि-
  • उत्तर पुस्तिकाओं के पन्ने धुंधले थे
  • कुछ हिस्से पूरी तरह गायब थे
  • कुछ स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं बदल गईं
  • कई जवाब बिना चेक किए रह गए
  • पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा है
  • पेमेंट करने में दिक्कत हो रही है
  • वेबसाइट पर बार-बार समस्या आ रही थी

OSM प्लेटफॉर्म, इसकी टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल

इसके बाद OSM प्लेटफॉर्म और उसकी टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे। लोगों ने पूछा कि डिजिटल मूल्यांकन का ठेका किस कंपनी को कैसे दिया गया? इसमें पारदर्शिता कहां है? साइबर सुरक्षा का ध्यान रखा गया या नहीं? री-इवैल्यूएशन में देरी क्यों हुई? इन सवालों ने पूरे देश में चर्चा पैदा कर दी। CBSE ने बाद में समय-सीमा बढ़ाई और कहा कि छात्रों की हर सही शिकायत का निपटारा किया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद विवाद थमा नहीं है।

CBSE ने मानी OSM पोर्टल में सुरक्षा चूक

ऑनमार्क पोर्टल में खामियाँ होने के एक छात्र के दावों को लगातार खारिज करती रही सीबीएसई ने 31 मई को ही माना कि उसके ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम पोर्टल में सुरक्षा कमजोरियाँ हैं। 19 वर्षीय छात्र और एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने इन खामियों को उजागर किया था। इसके बाद सीबीएसई ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी किया। इसके साथ ही इसने दावा किया कि उसके सर्विस प्रोवाइडर के ऑनमार्क पोर्टल में पाई गई कमजोरियों को अब नियंत्रित कर लिया गया है। बोर्ड ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से सिस्टम को और मजबूत बनाने का काम शुरू कर दिया है।

सीबीएसई ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर रविवार को लिखा, 'हम अपने सर्विस प्रोवाइडर के ऑनमार्क पोर्टल में उन कमज़ोरियों पर करीब से नज़र रख रहे हैं जिनके बारे में पब्लिक डोमेन में बताया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में सरकार के अलग-अलग विभागों और IITs से साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की एक एक्सपर्ट टीम को इन सिस्टम्स को मज़बूत बनाने के लिए लगाया गया है; इसमें इन सिस्टम्स को ज़्यादा सुरक्षित सेटअप पर ले जाना भी शामिल है। जिन कमज़ोरियों की पहचान की गई थी, उन्हें ठीक कर दिया गया है, और दूसरी ऐसी कमज़ोरियों की भी जाँच की जा रही है जिनका गलत इस्तेमाल हो सकता है।'

धर्मेंद्र प्रधान और राहुल गांधी

राहुल गांधी के निशाने पर शिक्षा मंत्री

सरकार की ओर से यह क़दम तब उठाया गया है जब इस पूरे मामले को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बड़ा मुद्दा बना दिया। वह लगातार सीबीएसई और मोदी सरकार पर हमलावर हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राहुल ने ओएसएम प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टेंडर तीन बार निकाले गए। पहले दो बार कोई योग्य बोलीदाता नहीं मिला। फिर नियमों को कम करके COEMPT कंपनी को काम दिया गया।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि स्कैनिंग रेजोल्यूशन घटाया गया, रोबोटिक स्कैनर की ज़रूरत हटाई गई, सर्टिफिकेशन कम किया गया और गलती पर पेनल्टी भी खत्म कर दी गई। टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी भी टेक्निकल राउंड में हार गई, लेकिन COEMPT को काम मिल गया। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए। राहुल ने कहा, '18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी को सौंप दिया गया जिसे नियम बदलकर योग्य बनाया गया।'
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हाल ही में राहुल गांधी ने कहा था, ' CBSE परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हो गई और मोदी जी? हमेशा की तरह - न जवाब, न ज़िम्मेदारी, न शर्म।' राहुल ने कहा, 'जिस कंपनी COEMPT को यह ज़िम्मेदारी मिली, वह पहले Globarena के नाम से तेलंगाना में 2019 में यही कारनामे कर चुकी है।' कुछ ज़रूरी सवाल हैं, 'COEMPT को सीबीएसई का ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया? कौन-कौन से नियम और प्रक्रिया दरकिनार करके इस कंपनी को ये ठेका दिया गया? COEMPT पहले Globarena के नाम से विवादों में घिर चुकी है, ये सीबीएसई को क्यों नहीं पता चला? बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं किए गए? COEMPT प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच आखिर क्या संबंध हैं?'
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सार्थक सिद्धांत की खोजी रिपोर्ट

इस पूरे मामले को सबसे पहले छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक्स पर सार्वजनिक किया। दस्तावेजों के आधार पर की गई उनकी जांच में दावा किया गया कि CBSE ने OSM पोर्टल के लिए अनुबंध देते समय कई तकनीकी और सुरक्षा मानकों में बदलाव किए। सार्थक ने सोशल मीडिया पर साझा की गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियों का विश्लेषण करते हुए उनमें ‘ड्रॉप शैडो’ और कई जगह मोड़ के निशान देखे। आमतौर पर इस तरह के निशान मोबाइल कैमरे या हैंडहेल्ड डिवाइस से लिए गए फोटो में दिखाई देते हैं, जबकि फ्लैटबेड या ऑटोमैटिक स्कैनरों से स्कैन की गई प्रतियों में ऐसा नहीं होता। राहुल गांधी ने सार्थक की बातों को आगे बढ़ाते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की।

सरकार पर दबाव?

सीबीएसई छात्रों, उनके अभिभावकों, राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूज़रों की ओर से मोदी सरकार पर ओएसएम को लेकर काफी दबाव है। CBSE भारत की सबसे बड़ी परीक्षा बोर्डों में से एक है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए, इसकी मांग लगातार हो रही है। चेयरमैन और सचिव के ट्रांसफर के बाद क्या अब आगे और भी कार्रवाई होगी या फिर अब मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा, यह सवाल बना हुआ है।