केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के मंत्रालय से तीन अधिकारियों को हटाए जाने की वजह अभी तक सामने नहीं आई है। लेकिन कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत का कहना है कि कुछ तो गोरखधंधा वहां चल रहा था। तभी यह कार्रवाई हुई है।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
एक दुर्लभ और बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय (ओओएम) से तीन प्रमुख सहयोगियों को एक ही दिन में पद से हटा दिया गया है। हटाए गए अधिकारियों में मंत्री के निजी सचिव (प्राइवेट सेक्रेटरी - PS) और दो अतिरिक्त निजी सचिव (अतिरिक्त पीएस - APS) शामिल हैं। भूपेंद्र यादव को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का खास आदमी माना जाता है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि ऐसा फेरबदल सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) करता है। लेकिन आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं हुआ है। इस संबंध में जो सरकारी पत्र जारी हुआ है, उसमें इसे भारत सरकार का नाम लिखा हुआ है।
मंत्रालय ने यह बड़ी कार्रवाई 3 जुलाई को जारी अलग-अलग आदेशों के जरिए की है। हालांकि, जब इस संबंध में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उनकी तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। यानी कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। यहां तक कि खुद मंत्री भूपेंद्र यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
भूपेंद्र यादव के निजी सचिव (PS) भी हटाए गए
मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 2010 बैच के अधिकारी अमर सिंह को "प्रशासनिक आधार" पर उनके मूल कैडर (राजस्व विभाग) में वापस भेज दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया है। अमर सिंह को मंत्री भूपेंद्र यादव का खास आदमी माना जाता है।अमर सिंह को साल 2021 में भूपेंद्र यादव का निजी सचिव नियुक्त किया गया था, जब यादव के पास श्रम और रोजगार मंत्रालय का प्रभार था। जून 2024 में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के एक ज्ञापन के अनुसार, सिंह का कार्यकाल 7 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन इससे पहले ही उन्हें अचानक हटा दिया गया।
दो अतिरिक्त निजी सचिवों पर भी गिरी गाज
निजी सचिव के अलावा मंत्री के दो अतिरिक्त निजी सचिवों (APS) पर भी कड़ी कार्रवाई हुई है:
शैलेश कुमार सिंह (अतिरिक्त पीएस): जारी आदेश के मुताबिक, शैलेश कुमार सिंह को समय से पहले (prematurely) उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया है। इसके साथ ही उन पर "एक्सटेंडेड कूलिंग ऑफ" (extended cooling off) का प्रावधान भी लागू किया गया है। उन्हें तुरंत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयुष सरन (अतिरिक्त पीएस): तीसरे आदेश के तहत एक और अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सरन की सेवाएं तत्काल प्रभाव से "समाप्त" (terminate) कर दी गई हैं। अवर सचिव विभूति पंजीयार द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और DoPT को भी भेज दी गई हैं।क्यों खास है यह कार्रवाई?
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे एक "बड़ा शुद्धि अभियान" (Purge) माना जा रहा है, क्योंकि किसी केंद्रीय मंत्री के सचिवालय से उनके तीन सबसे शीर्ष सहयोगियों को एक ही दिन और एक साथ हटाए जाने की घटना बेहद दुर्लभ है। हालांकि आदेशों में केवल प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया है, लेकिन एक साथ तीन बड़े अधिकारियों की छुट्टी ने कई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।क्या गोरखधंधा चल रहा थाः कांग्रेस
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर दी गई अपनी प्रतिक्रिया में सवाल किया है। सुप्रिया ने कहा- केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव
अमर सिंह के साथ दो और अधिकारियों - आयुष शरण और शैलेश कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से हटाया गया। एक मंत्री के पूरे स्टाफ को बदला जाना साधारण बात तो नहीं है। कौन सा गोरख धंधा चल रहा था? किसी भी धांधली के बारे में जनता को सच जानने का हक है।
क्या चंदे के धंधे से जुड़ा है मामलाः जयराम रमेश
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के स्टाफ के चार सदस्यों को बर्खास्त किए जाने की खबर चौंकाने वाली है। यह किसी से छिपा नहीं है कि मोदी शासन में इस तरह की नियुक्तियां कैसे की जाती हैं। क्या बिना आग के इतना धुआं उठ सकता है? क्या यह प्रधानमंत्री की चंदा दो, धंधा लो योजना के गड़बड़ा जाने का एक मामला हो सकता है?