जंतर मंतर प्रोटेस्टरों में शामिल रुचिका सिंह के ख़िलाफ़ दर्ज FIR को लेकर सीजेपी ने कहा है कि '100 बीजेपी सांसदों पर आपराधिक केस है तो पुलिस उनका पीछा क्यों नहीं करती?' जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर कॉकरोच जनता पार्टी ने बीजेपी पर बड़ा हमला किया है।

पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने एक्स पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा, 'रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक तंत्र का गलत इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अपशब्द बोलने पर आपराधिक केस नहीं बनता। लोकसभा के लगभग 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें करीब 100 सांसद बीजेपी के हैं। पुलिस अपनी ऊर्जा उन मामलों पर लगाए, किसी 25 साल की छात्रा को परेशान करने पर नहीं। युवाओं का उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए।'
पार्टी का कहना है कि आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन केवल अपशब्द बोलने के आधार पर किसी छात्रा के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना गलत है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी टिप्पणी से आपत्ति है तो वह मानहानि का मामला दर्ज करा सकता है, लेकिन विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर डालता है।

'अपशब्द पर आपराधिक मुकदमा नहीं बनता'

सौरभ दास ने कहा कि भाषा मर्यादित होनी चाहिए और युवाओं को विरोध जताते समय अपने शब्दों का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाना सही नहीं है।
ताज़ा ख़बरें
उन्होंने कहा, 'यदि किसी ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है तो संबंधित व्यक्ति उसके ख़िलाफ़ दीवानी या आपराधिक मानहानि का मामला दायर कर सकता है। लेकिन केवल ऐसी टिप्पणी के कारण पुलिस और आपराधिक क़ानून का इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है।' उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से युवाओं में डर का माहौल पैदा होगा और लोग अपनी बात रखने से हिचकेंगे। उन्होंने कहा कि 'पुलिस अपनी ताक़त 25 साल की छात्रा पर क्यों इस्तेमाल कर रही है?'

युवाओं से संयम बरतने की भी अपील

सीजेपी ने अपने बयान में यह भी साफ़ किया है कि वह किसी के ख़िलाफ़ अपमानजनक भाषा का समर्थन नहीं करती। सौरभ दास ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को अपनी भाषा और व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा,
मैं युवाओं से अपील करता हूं कि विरोध जताते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। लेकिन पुलिस को भी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
सीजेपी

रुचिका सिंह पर क्या है मामला?

रुचिका सिंह के खिलाफ 29 जुलाई को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के एक्सप्रेसवे थाना में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

शिकायत में कहा गया है कि इन टिप्पणियों से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई। पुलिस ने जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने के लिए उकसाने, सार्वजनिक शरारत या अशांति फैलाने वाले बयान देने और मानहानि करने का मामला दर्ज किया है।

क्या होती है जीरो एफआईआर?

जीरो एफआईआर ऐसी शिकायत होती है जिसे किसी भी थाने में दर्ज किया जा सकता है, चाहे घटना किसी दूसरे क्षेत्र में हुई हो। बाद में जांच के लिए मामला संबंधित पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना होता है कि अधिकार क्षेत्र के विवाद के कारण शिकायत दर्ज होने में देरी न हो।

जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला जंतर-मंतर पर हुए उस छात्र आंदोलन से जुड़ा है, जो कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ था। यह आंदोलन करीब 36 दिनों तक चला और 25 जुलाई को केंद्र सरकार द्वारा आंदोलन की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद ख़त्म हुआ।

आंदोलन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी। इसी आंदोलन के दौरान दिए गए कुछ बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अब विभिन्न राज्यों में कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सीजेपी ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

सीजेपी का कहना है कि विरोध प्रदर्शन में इस्तेमाल की गई भाषा पर बहस हो सकती है, लेकिन ऐसे मामलों में आपराधिक कानून का इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। वहीं, पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर कानून के अनुसार मामला दर्ज किया गया है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में जांच जारी है।