सीजेपी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। सोमवार को दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है। इससे पहले 14 अक्टूबर को कार्यपालक मजिस्ट्रेट महेश कुमार मीणा ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। मामले में 19 अक्टूबर को आगे की कार्यवाही होनी थी, लेकिन सोमवार को पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग की। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो दिन और न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया। दोनों नेताओं की कानूनी टीम ने जमानत के लिए जमानतदारों के दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश कर दिए हैं। 
इस घटनाक्रम पर सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने कहा, 'आशु और सौरव का पहला अपराध जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना था। उनका दूसरा अपराध? झुकने से इनकार करना। जेल में पाँच दिन बिताने के बाद भी, वे चेहरे पर मुस्कान लिए और पूरे हौसले के साथ अदालत पहुँचे।'

जंतर-मंतर पर तिरंगा लहरा रहे थे रांका, दास

आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर तिरंगा प्रदर्शन करने की कोशिश के बाद हिरासत में लिया गया था। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। आरोप है कि 13 अक्टूबर को दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर के बंद गेट को फांदकर प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने की कोशिश की थी। जंतर-मंतर को इससे पहले अधिसूचित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था।
सीजेपी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय ध्वज लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। दोनों को बाद में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पहले भी हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता

आशुतोष रांका और सौरव दास को इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली के एक हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। उस समय दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की घोषणा की गई थी। दोनों के ख़िलाफ़ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई की गई थी। इसके बाद उसी दिन उन्हें 50-50 हजार रुपये के 'पीस बॉन्ड' भरने की शर्त पर छोड़ दिया गया था। बाद में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के दौरान उन्हें फिर हिरासत में लिया गया। इस बार उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
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मौजूदा मामले में जमानतदारों की उपलब्धता भी कार्यवाही का एक अहम मुद्दा रही है। जानकारी के मुताबिक, हिरासत के दिन जमानतदार उपलब्ध नहीं होने के कारण दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब उनकी कानूनी टीम ने जमानतदारों के दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश कर दिए हैं।

रिहाई रोकने के लिए जानबूझकर देरी: CJP

दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने के बाद CJP ने आरोप लगाया कि जमानत की कार्यवाही को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है, ताकि उसके दोनों सह-संयोजक जेल से बाहर न आ सकें। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक्स पर दावा किया कि राज्य की ओर से आशुतोष और सौरव की रिहाई रोकने के लिए कानूनी प्रक्रिया में देरी की जा रही है।

दिपके ने आरोप लगाया कि दोनों को हिरासत में रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं, जबकि उनके पास उन्हें जेल में रखने के पर्याप्त कानूनी आधार नहीं हैं। पार्टी ने यह भी दावा किया कि उसके नेताओं की रिहाई के लिए पेश किए गए जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों के आधार पर स्वीकार नहीं किया गया।

मजिस्ट्रेट ने धमकी मिलने का दावा किया

इस मामले में रविवार को एक और घटनाक्रम सामने आया था। जमानत से संबंधित सुनवाई कर रहे विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने दावा किया कि उन्हें अज्ञात लोगों की ओर से धमकियां दी जा रही हैं। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने एक गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद जमानत मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को बदल दिया गया और सोमवार को दोनों नेताओं को नवनियुक्त विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। मजिस्ट्रेट की ओर से धमकी मिलने का दावा और CJP की ओर से जमानत प्रक्रिया में देरी के आरोप इस मामले को लेकर उठे अलग-अलग मुद्दे हैं।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है CJP

सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया मतदाताओं के अधिकारों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
पार्टी ने जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने का भी विरोध किया है। उसका कहना है कि इससे विरोध प्रदर्शन करने के लिए उपलब्ध स्थानों पर असर पड़ता है। दूसरी ओर, आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में पुलिस की कार्रवाई का संबंध जंतर-मंतर पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेशों और पीस बॉन्ड की कथित शर्तों के उल्लंघन से बताया गया है। दोनों पर आरोप है कि वे बंद गेट फांदकर प्रदर्शन स्थल में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे।

अब 21 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सोमवार के आदेश के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ गई है। उनकी कानूनी टीम जमानतदारों के दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश कर चुकी है और अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को निर्धारित है। फिलहाल दोनों नेताओं को तत्काल रिहाई नहीं मिली है। अगली सुनवाई में जमानत और हिरासत से जुड़े मुद्दों पर आगे की कार्यवाही होगी।