कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का स्कूल ठीक करो अभियान बीजेपी को पसंद नहीं आ रहा है। सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका के खिलाफ राजस्थान में अब एससी/एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज की गई है। सीजेपी संयोजक दिपके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सीजेपी के (बाएं से) आशुतोष रांका, अभिजीत दिपके, सौरव दास और रत्ना सिंह
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को सामने लाने के लिए चलाए जा रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘School Thik Karo’ अभियान को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 21 अगस्त को जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची CJP टीम और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़प के बाद अब दोनों पक्षों की ओर से FIR दर्ज हो चुकी है। लेकिन अब CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और 50-60 कार्यकर्ताओं के खिलाफ SC/ST एक्ट समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इसके जवाब में CJP की कार्यकर्ता रेखा शर्मा की शिकायत पर भी दूसरी FIR दर्ज की गई है, जिसमें टीम पर हमला करने, पथराव और वाहनों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
रांका के खिलाफ SC/ST एक्ट में मामला
गांव के निवासी भगवान सहाय धांका की शिकायत पर आशुतोष रांका और 50-60 CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि CJP टीम स्कूल निरीक्षण के बहाने गांव पहुंची और ग्रामीणों तथा महिलाओं के साथ गाली-गलौज की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इस FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, गलत तरीके से रोकने, गैरकानूनी जमावड़े और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित धाराओं के साथ SC/ST एक्ट की तीन धाराएं लगाई गई हैं। दोनों FIR जयपुर सिटी (साउथ) के शिवदासपुरा थाने में दर्ज हुई हैं। CJP की ओर से दर्ज FIR में हमले, गलत तरीके से रोकने, गैरकानूनी जमावड़े, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और शांति भंग करने के इरादे से अपमान करने जैसी धाराएं लगाई गई हैं।
- यहां बताना ज़रूरी है कि शुरुआत में सीजेपी नेताओं के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज कराई गई थी, उसमें एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने का कोई जिक्र नहीं था।
CJP के मुताबिक, रामपुरा-कंवरपुरा का सरकारी स्कूल कई वर्षों से एक भैंसों के तबेले में चल रहा है। इसी स्थिति का निरीक्षण करने के लिए आशुतोष रांका के नेतृत्व में टीम गांव पहुंची थी। CJP का कहना है कि उन्हें ग्रामीणों की ओर से स्कूल देखने के लिए बुलाया गया था।
रांका के मुताबिक, गांव की सीमा पर ही उनकी गाड़ियों को रोक दिया गया और टीम पैदल स्कूल की ओर जाने लगी। CJP की शिकायत के अनुसार, रास्ते में कुछ लोगों ने टीम के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और इसके बाद ईंट, लाठी तथा पत्थरों से भरी ट्यूबों से चारों तरफ से हमला किया गया। CJP ने आरोप लगाया कि कुछ कार्यकर्ताओं को घेरकर बुरी तरह पीटा गया और उनकी गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया।
CJP की शिकायत में कहा गया है कि स्वयंसेवक सुरेंद्र उर्फ संजू वर्मा के हाथ में फ्रैक्चर हुआ और उन्हें गंभीर चोटें आईं। एक अन्य कार्यकर्ता सलमान को भी कथित तौर पर बुरी तरह पीटा गया। रेखा शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी आंखों में धूल फेंकी गई और उन्हें धक्का देकर पीटा गया, जिससे उनके कंधे में चोट आई। CJP ने यह भी दावा किया कि घटना के वीडियो मीडिया के पास मौजूद हैं और वीडियो में कथित हमलावरों की पहचान की जा सकती है। संगठन ने लालचंद शर्मा पर हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया है और कहा है कि ग्रामीणों से बातचीत में कमल प्रधान और शंकर बगड़ा के नाम भी सामने आए। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच से होनी बाकी है।
CJP का आरोप- BJP से जुड़े लोगों ने हमला कराया
हमले के बाद CJP ने सीधे तौर पर BJP से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए। आशुतोष रांका ने कहा कि उन्हें और उनकी टीम को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे सरकारी स्कूल की वास्तविक स्थिति सामने लाना चाहते थे। उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि हमले के पीछे राजनीतिक ताकतें थीं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी तरफ BJP विधायक गोपाल शर्मा ने CJP की गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूलों में इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों की जरूरत नहीं है। राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने CJP को कांग्रेस से जोड़ने की कोशिश की और आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग चेहरों के जरिए गांवों में जाकर माहौल खराब कर रही है। सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने भी CJP को ‘अराजक तत्वों’ की पार्टी बताया।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि स्कूलों को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक स्कूल बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए हैं और वहां राजनीति के बजाय शिक्षा और बेहतर वातावरण पर ध्यान होना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार के रुख की आलोचना की। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों और पत्रकारों की पहुंच पर लगाई गई पाबंदियां स्कूलों की खराब स्थिति को सामने आने से रोकने की कोशिश हैं। उन्होंने कहा कि अगर स्कूलों की हालत खराब है तो सरकार को उसे सुधारना चाहिए, न कि उसकी जानकारी सामने आने से रोकना चाहिए।
नोएडा के मज़दूरों जैसा है छात्रों से सरकार का व्यवहारः दिपके
इसी विवाद के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 24 अगस्त को नोएडा के मजदूरों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। दिपके ने एक रिपोर्ट को साझा करते हुए कहा कि अप्रैल में नोएडा में आंदोलन करने वाले करीब 200 निजी कंपनी कर्मचारियों को पुलिस हिरासत के बाद औसतन 53 दिन जेल में रहना पड़ा, जबकि अदालत ने बाद में अधिकांश को जमानत दे दी और पुलिस से पूछा कि केवल प्रदर्शन में मौजूद रहने के अलावा उनके खिलाफ विशिष्ट सबूत क्या हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दो मजदूरों पर कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) भी लगाया गया है।
दिपके ने सवाल उठाया कि आंदोलन कर रहे मजदूरों के मामले में जिस तरह कानून का इस्तेमाल किया गया, क्या सरकार अब छात्रों के साथ भी वैसा ही व्यवहार करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को अधिकारों के लिए लड़ने वाले लोगों के खिलाफ कानून के कथित दुरुपयोग को रोकना चाहिए। उनका सवाल था- “पाकिस्तान लिंक का क्या हुआ?” दिपके ने कहा कि नोएडा के मजदूरों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और बाद की न्यायिक कार्रवाई को देखते हुए सरकार को जवाब देना चाहिए कि आंदोलनकारियों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों का आधार क्या था।
CJP और केंद्र के बीच फिर बढ़ रहा तनाव
CJP ने 25 जुलाई को अपनी देशव्यापी आंदोलन की कार्रवाई वापस ली थी। संगठन का कहना है कि ऐसा केंद्र सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों के आधार पर किया गया था। लेकिन CJP का आरोप है कि सरकार ने अब तक उन आश्वासनों को लागू करने के लिए औपचारिक रूप से उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं दी है।18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की समेकित सूची मांगी थी। CJP के अनुसार, शीर्ष अदालत ने केंद्र से यह सूची तीन बार मांगी ताकि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मामलों को रद्द करने की अपनी शक्ति पर विचार कर सके। संगठन का आरोप है कि केंद्र ने अदालत के समक्ष सूची उपलब्ध कराने की स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई।
इसी के बाद CJP नेताओं सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने चिंता जताई कि केंद्र सरकार छात्रों और युवा आंदोलनकारियों से किए गए वादों से पीछे हट रही है। अब CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में सरकार के आश्वासनों की समीक्षा की जा रही है और संगठन ने दोबारा देशव्यापी आंदोलन की संभावना के संकेत दिए हैं।
जोधपुर में भी विवाद
जयपुर की घटना के दो दिन बाद 23 अगस्त को जोधपुर में भी तनाव सामने आया। आशुतोष रांका ‘शिक्षा: नई पीढ़ी के सवाल’ विषय पर गांधी शांति प्रतिष्ठान में एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान 11 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। आरोप है कि उन्होंने कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कर नारे लगाए और बाहर एक व्यक्ति के साथ मारपीट की।स्कूल की हालत पर भी उठा बड़ा सवाल
CJP के स्कूल निरीक्षण अभियान ने केवल राजनीतिक टकराव ही नहीं पैदा किया है, बल्कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया है। सरकार ने हाल में स्वीकार किया कि राज्य के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं है। ऐसे में CJP जिस स्कूल की हालत को लेकर अभियान चला रही है, वह विवाद अब केवल एक राजनीतिक संगठन और सरकार के बीच टकराव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर बहस का मुद्दा बन गया है।इस पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और आरोपों की जांच पुलिस के सामने है। CJP इसे सरकारी स्कूलों की बदहाली उजागर करने के अभियान को रोकने की कोशिश बता रही है, जबकि BJP और राजस्थान सरकार CJP की गतिविधियों को राजनीतिक हस्तक्षेप और माहौल बिगाड़ने वाला कदम बता रही है। आने वाले दिनों में FIR की जांच, हमले के वीडियो और कथित राजनीतिक संबंधों की पड़ताल इस विवाद की दिशा तय करेगी।