Commercial LPG cylinder prices increased- सरकार ने दुकानों, रेस्टोरेंट, होटल वगैरह में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट बढ़ा दिए हैं। साथ ही 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत भी बढ़ी है। इससे मजदूर वर्ग प्रभावित होगा। पेट्रोल-डीज़ल के दाम नहीं बढ़े।
मोदी सरकार एलपीजी गैस की कमी
व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आज शुक्रवार 1 मई से भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 3,071.50 रुपये हो गई है। सरकार ने 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर के दामों में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की है। छोटे सिलेंडर पर बढ़े रेट सीधे गरीबों और मजदूर वर्ग पर महंगाई की मार है। हालांकि, घरेलू एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने शुक्रवार को इस मूल्य संशोधन की घोषणा की। बढ़ोतरी सिर्फ कमर्शियल इस्तेमाल वाले LPG सिलेंडर और 5 किलो वाले सिलेंडर पर लागू होगी। घरेलू LPG (14.2 किलो वाले सब्सिडी वाले सिलेंडर) की कीमत पूरी तरह स्थिर रहेगी। इसी तरह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई वृद्धि या कमी नहीं हुई है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग आशंका जता रहे हैं कि पांच राज्यों के नतीजे आने के बाद सरकार इनके दाम भी बढ़ा देगी।
एलपीजी कमर्शियल के रेट इस तरह बढ़ते रहे
सरकार की सब्सिडी नीति के तहत घरेलू LPG की कीमतें पिछले कई महीनों से स्थिर हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी पिछले लंबे समय से अपरिवर्तित हैं। तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को LPG, पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा करती हैं। आज का संशोधन इसी मासिक रिव्यू का हिस्सा है।
छोटे सिलेंडर पर 261 रुपये की बढ़ोतरी सीधे मज़दूर वर्ग पर हमला है। उसे अब यह सिलेंडर करीब 800 के आसपास पड़ेगा। हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसके रेट अलग होंगे। आमतौर पर महानगरों में रहने वाला मज़दूर तबका इसी छोटे सिलेंडर से काम चलाता है। क्योंकि बड़े सिलेंडर के लिए उसे आधार, पता और अन्य दस्तावेज देने पड़ते हैं। लेकिन छोटे सिलेंडर आमतौर पर उपलब्ध रहते हैं। जिनमें वो एलपीजी भरवाकर अपना काम चलाता है। इसका असर मोबाइल वेंडर्स पर भी पड़ेगा, जो कॉलोनियों और अन्य स्थानों पर अपने काम के हिसाब से इस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।
यह बदलाव पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें अमेरिका, इसराइल और ईरान शामिल हैं, जिसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हो गई है, जो कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मार्ग है।
उधर, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें घरेलू एयरलाइंस के लिए अपरिवर्तित रखी गई हैं। तेल कंपनियों ने वैश्विक ईंधन मूल्यों में वृद्धि को खुद वहन किया है, ताकि एयरलाइंस और उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतें बढ़ाई गई हैं।