कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने हर घर जल योजना को ‘हर घर मल योजना’ बना दिया है? इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों की सुप्रीम कोर्ट -स्तरीय जांच की मांग की है।
एमपी के इंदौर में मौतों के बाद गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में गंदे पानी से लोगों के बीमार होने की ख़बरों के बीच कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला किया है। कांग्रेस ने कहा है कि हर घर जल योजना पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन यह 'हर घर जल योजना' नहीं, बल्कि 'हर घर मल योजना' है। इंदौर में हुई मौतों का ज़िक्र करते हुए इसने कहा है कि 'लोगों के घरों में जो पानी आ रहा था, उसमें मल था। इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है, क्योंकि वे ही लच्छेदार बातें करते हैं।'
कांग्रेस ने इंदौर शहर में दूषित पानी से हुई मौतों के लिए सरकार की लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहराया और सुप्रीम कोर्ट स्तर की स्वतंत्र जाँच की मांग की है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इस घटना से बीजेपी सरकार का 'बदसूरत, क्रूर और पूरी तरह से असंवेदनशील चेहरा' सामने आ गया है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार की घोर लापरवाही, अक्षमता और उदासीनता की वजह से ये हादसा हुआ।
क्या हुआ इंदौर में?
पवन खेड़ा के मुताबिक़ इंदौर में दूषित पानी पीने से 18 लोगों की मौत हो गई, जिसमें एक 6 महीने का बच्चा भी था। 40000 से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और कई अभी भी आईसीयू में ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि इंदौर शहर को केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार 'सबसे साफ़ शहर' का खिताब मिला है, लेकिन यहाँ साफ पानी तक उपलब्ध नहीं हो सका।
खेड़ा ने कहा, 'सबका साथ, सबका विकास का नारा देने वाली बीजेपी सबसे बुनियादी काम साफ़ और सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह फेल हो गई। सरकार ने जिम्मेदारी दिखाने की बजाय अहंकार दिखाया।'मंत्री की 'बदजुबानी' पर हमला
कांग्रेस नेता ने मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्री ने पत्रकारों से कहा, 'फोकट के सवाल मत पूछो' और शर्मनाक शब्दों का इस्तेमाल किया, जबकि पीड़ित परिवार मुआवजे का इंतज़ार कर रहे थे। सरकार ने हर मौत पर सिर्फ 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है, जो खेड़ा के मुताबिक इंसानी जिंदगी का मजाक उड़ाने जैसा है।
पवन खेड़ा ने कहा कि इंदौर के पीड़ित परिवार को हमेशा के लिए दुख की पीड़ा मिल गई और ये सब बीजेपी की लापरवाही, अहंकार और उदासीनता की वजह से हुआ।
जांच की मांग और पुराने प्रोजेक्ट पर सवाल
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मांग की है कि इस लापरवाही की तुरंत जांच हो। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट स्तर की स्वतंत्र जांच की मांग की, ताकि बीजेपी सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके। पवन खेड़ा ने कहा कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान जैसे बड़े प्रोग्राम के बावजूद भाजपा सरकार साफ पानी सुनिश्चित नहीं कर सकी। उन्होंने पुराने एडीबी लोन का ज़िक्र किया। साल 2003 में एडीबी ने मध्य प्रदेश सरकार को 200 मिलियन डॉलर और 2008 में 71 मिलियन डॉलर का लोन दिया था। ये लोन भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों में शहरी पानी आपूर्ति और पर्यावरण सुधार प्रोजेक्ट के लिए था।
प्रोजेक्ट में पंपिंग स्टेशन सुधारना, पानी मीटर लगाना, सीवर नेटवर्क बिछाना और पानी शोधन प्लांट बनाना शामिल था। एडीबी के रिकॉर्ड के अनुसार ये फंडिंग लाखों नागरिकों के लिए पानी, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन सुधारने के लिए थी। लेकिन पिछले दो दशकों में बीजेपी सरकार ने इन दायित्वों को लागू नहीं किया।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि पानी की गुणवत्ता की तिमाही जांच नहीं हुई, मॉनिटरिंग रिपोर्ट तैयार या जमा नहीं की गईं और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अधूरे या गलत तरीके से मैनेज किए गए। उन्होंने कहा, 'ये सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिकों के साथ आपराधिक विश्वासघात है और अंतरराष्ट्रीय लोन की शर्तों का उल्लंघन है। 18 मासूमों का खून भाजपा के अहंकार और कुप्रबंधन की वजह से बहा।'
कांग्रेस नेता ने कई सवाल उठाए
- शहर के पीने के पानी में सीवर कैसे मिल गया और भाजपा सरकार ने आंखें बंद क्यों रखीं?
- नागरिकों की बार-बार की चेतावनियों को क्यों नजरअंदाज किया गया, जिससे हजारों जिंदगियां खतरे में पड़ गईं?
- भाजपा की लापरवाही से हुई इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री निर्दोष बच्चों और शिशुओं की मौत पर चुप क्यों हैं?
ये मामला मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि जाँच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।