कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा भाजपा और आरएसएस की तारीफ करने के एक दिन बाद, पार्टी के एक अन्य नेता और सांसद मणिकम टैगोर ने इस विवाद को और हवा दे दी है। टैगोर ने आरएसएस की तुलना आतंकी संगठन अल-कायदा से करते हुए कहा कि यह नफरत पर आधारित संगठन है और इससे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।

दिल्ली में कांग्रेस स्थापना दिवस समारोह के अलग टैगोर ने कहा, “आरएसएस नफरत पर बना संगठन है और नफरत फैलाता है। नफरत से क्या सीखा जा सकता है? क्या अल-कायदा से कुछ सीखा जा सकता है? अल-कायदा भी नफरत का संगठन है। यह दूसरों से नफरत करता है। ऐसी संगठनों से क्या सीखना? अगर सीखना है तो अच्छे लोगों से सीखो। कांग्रेस है, जो 140 साल पुरानी है। कांग्रेस ने लोगों को एकजुट किया। महात्मा गांधी ने कांग्रेस को जन आंदोलन बनाया। क्या इस संगठन को नफरत वाले संगठनों से सीखना चाहिए?”

टैगोर ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा, “आरएसएस नफरत पर आधारित है, नफरत पैदा करता है और नफरत फैलाता है। कांग्रेस की तुलना इससे नहीं की जा सकती। अल-कायदा भी नफरत पर बना और आतंक पैदा करने वाला संगठन है। हमें समझना चाहिए कि कांग्रेस की संरचना पूरी तरह अलग है। कांग्रेस जनता पर आधारित है। यह प्रेम, रिश्तों और न्याय पर आधारित संगठन है। आरएसएस और कांग्रेस की तुलना नहीं हो सकती।”

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यह बयान दिग्विजय सिंह की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक ताकत की सराहना की थी। सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साधारण कार्यकर्ता से शीर्ष पद तक पहुंचने का उदाहरण देते हुए कांग्रेस में अधिकारों के विकेंद्रीकरण और संगठन को मजबूत करने की बात कही थी। कांग्रेस कार्यकारिणी समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सिंह के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर ने सिंह का समर्थन करते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भाजपा ने कांग्रेस के इन बयानों पर तीखा पलटवार किया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर राष्ट्रवादी संगठनों को बदनाम करने का आरोप लगाया। भंडारी ने कहा कि आरएसएस स्कूल चलाता है, आपदा राहत कार्य करता है, रक्तदान शिविर आयोजित करता है, आदिवासी कल्याण कार्यक्रम चलाता है और सामाजिक सेवा करता है। उन्होंने दिग्विजय सिंह के पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि सिंह ने 26/11 मुंबई हमलों को 'आरएसएस की साजिश' बताया था। 
भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का पाकिस्तान प्रायोजित आतंक के नैरेटिव के प्रति नरम रुख है, सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाती है, भारतीय सेना पर शक करती है और पाकिस्तान की बातें दोहराती है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और पाकिस्तान का एक ही एजेंडा चलता है।”
कांग्रेस ने इसे आंतरिक मामला बताकर टिप्पणी करने से बच रही है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि मीडिया और भाजपा इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

यह विवाद कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक सुधारों की बहस को उजागर करता है, जहां एक ओर प्रतिद्वंद्वी दल की ताकत को स्वीकार किया जा रहा है, तो दूसरी ओर आरएसएस पर पुराने आरोप दोहराए जा रहे हैं।