सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने सीएए, एनआरसी, एसआईआर और परिसीमन संबंधी कदमों की तुलना हिटलर के नाजी जर्मनी और 1935 के नूर्नबर्ग कानूनों से करके प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर फासीवादी हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।
सीपीएम के महासचिव एमए बेबी
सीपीएम ने मोदी सरकार पर जबरदस्त हमला बोला है। सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), जनगणना प्रक्रिया, मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) और परिसीमन के जरिए एक "फासीवादी, बहुसंख्यकवादी हिंदू राष्ट्र" स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें हिटलर के जर्मनी की छाप साफ दिख रही है।
कोलकाता में बेबी ने कहा, "यह हमें जर्मनी की याद दिलाता है। सितंबर 1935 में न्यूरेम्बर्ग कानून लागू किए गए थे। इसका उद्देश्य क्या था? आर्यन शुद्धता की रक्षा के नाम पर अन्य लोगों, खासकर यहूदियों को गैर-नागरिक घोषित कर दिया गया। हम सब जानते हैं कि उसके बाद क्या हुआ। 1933 में हिटलर सत्ता में आया और 1935 में न्यूरेम्बर्ग कानून लागू हुए। जो कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह कर रहे हैं, वह हिटलर के जर्मनी का कॉपीबुक प्रोजेक्ट है।"
सीपीएम नेता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनाव स्वतंत्र भारत के इतिहास में अभूतपूर्व हैं। मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) हिंदुत्व की बड़ी साजिश का हिस्सा है, जिसका मकसद एक खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर उनके मताधिकार से वंचित करना है।
उन्होंने कहा, "गरीब लोग दूर-दूर से आकर कतारों में लग रहे हैं क्योंकि वे अपने मताधिकार को महत्व देते हैं। नरेंद्र मोदी और उनकी कंपनी भारत में मतदाताओं के अधिकारों और नागरिकता के मामले में जो कर रहे हैं, उसे CAA, NRC, जनगणना प्रक्रिया और SIR के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह कुछ और नहीं बल्कि मतदाता सूची से विशेष गहन हटाने की प्रक्रिया है। अमित शाह के शब्दों में कहें तो 'क्रोनोलॉजी समझिए'।"
सीपीएम लंबे समय से मोदी सरकार के लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रयास (जो पराजित हो चुका है) और महिला आरक्षण बिल को आरएसएस के प्रोजेक्ट के रूप में देख रही है, जिसका उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का है। उसने इससे पहले भी सीट बढ़ाने को लेकर मोदी सरकार पर तीखे हमले किए हैं।
बेबी ने कहा, "परिसीमन के माध्यम से वे जेरीमैंडरिंग करना चाहते हैं। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर और असम में इसे आंशिक रूप से पहले ही आजमाया है। अब वे पूरे देश में इसे लागू करना चाहते हैं... जिससे वे अपनी विशाल बहुमत का इस्तेमाल करके मनमाने ढंग से हिंदू राष्ट्र स्थापित कर सकें। लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने का यही प्लान था।"
- जेरीमैंडरिंग का मतलब चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में हेरफेर करके एक पार्टी या समूह को अनुचित लाभ पहुंचाना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधते हुए बेबी ने आरोप लगाया कि वे मोदी की "दुष्ट साजिश" का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाने के बजाय मुख्य चुनाव आयुक्त एक टीम का हिस्सा बन गए हैं।
सीपीएम महासचिव ने कहा- "ज्ञानेश कुमार अब केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के समर्थन में अपना पद इस्तेमाल कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में यह साफ दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी आश्चर्य जताया कि अन्य राज्यों के विपरीत यहां संदिग्ध लोगों की एक विशेष श्रेणी बना दी गई है। लाखों मतदाताओं को निलंबित अवस्था में रखने के लिए कई 'तार्किक स्पष्टीकरण' दिए जा रहे हैं... यह पश्चिम बंगाल में असाधारण, चिंताजनक और खतरनाक स्थिति है, जो किसी अन्य राज्य में नहीं है।"
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि वे सरकारी धन से मंदिर बनवाकर आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल में पहले चरण का गुरुवार 23 अप्रैल को मतदान हो रहा है और विपक्षी दलों द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।