पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरावणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पर विवाद ने मोदी सरकार को ऐसा झकझोरा है कि अब सेना के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों के लिए किताबें प्रकाशित करने के नए सख्त नियम बनाने की तैयारी चल रही है। राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान इस किताब का ज़िक्र किया। उन्होंने किताब के कुछ हिस्सों का हवाला देकर दावा किया कि 2020 में लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध के दौरान राजनीतिक नेतृत्व ने साफ़ निर्देश नहीं दिए थे। राहुल गांधी के मुद्दा उठाने के बाद से मोदी सरकार फँसी है!

इस विवाद के बीच ही अब रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि हाल ही में एक बैठक हुई, जिसमें नए नियमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। ये नए नियम मौजूदा सेवा नियमों और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट को शामिल करेंगे। द हिंदू ने यह रिपोर्ट दी है। इन नियमों से साफ़ होगा कि किताब छपवाने से पहले मैनुस्क्रिप्ट को कैसे जांचा जाएगा और मंजूरी दी जाएगी।

अब तक क्या नियम है?

अभी तक सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों द्वारा किताब लिखे जाने पर नियंत्रण के लिए कोई एक सख्त क़ानून नहीं है। इसके बजाय, काम कर रहे लोगों और रिटायर लोगों पर अलग-अलग कानूनी और सर्विस फ्रेमवर्क लागू होते हैं। दोनों ही मामलों में नेशनल सिक्योरिटी एंड प्रोटेक्शन ऑफ़ क्लासिफाइड इंफोर्मेशन मुख्य नियम लागू होता है। ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट जीवन भर लागू रहता है। अगर कोई गोपनीय जानकारी, ऑपरेशन के विवरण या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी बातें लिखी जाती हैं, तो यह अपराध है।

सेवारत अधिकारियों के लिए नियम पहले से सख्त हैं। उन्हें किताब लिखने या कोई साहित्यिक काम करने के लिए पहले लिखित अनुमति लेनी पड़ती है। 

किताब लिखने के लिए मंजूरी लेने की प्रक्रिया चेन ऑफ कमांड से होकर आर्मी हेडक्वार्टर या रक्षा मंत्रालय तक जाती है। गोपनीय जानकारी, उपकरणों की क्षमता, खुफिया जानकारी या विदेश संबंधों को प्रभावित करने वाली बातें बिल्कुल नहीं लिखी जा सकतीं।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी.पी. पांडे ने कहा, 'सेवानिवृत्त होने के बाद व्यक्ति सिविलियन जैसा हो जाता है, लेकिन ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट लागू रहता है। अब यह व्यक्ति की समझदारी और निर्णय पर निर्भर करता है कि वह क्या लिखे। गोपनीय बातें नहीं लिखनी चाहिए। लेकिन व्यक्तिगत राय या राजनीति पर लिखने की आजादी है। अगर कोई सामग्री ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत आती है तो रक्षा मंत्रालय से पहले अनुमति लेनी होगी।'

रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि जो जानकारी पहले से सार्वजनिक डोमेन में है, उस पर लिखा जा सकता है। अगर किताब में राष्ट्रीय हित से जुड़ी बातें हैं तो सेवाओं में अनुमति देने की प्रक्रिया है। गलत या गैरकानूनी जानकारी छापने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

सिविल सर्वेंट्स के लिए क्या नियम?

सिविल सर्वेंट्स के लिए भी 2021 में पेंशन नियमों में बदलाव किया गया था। खुफिया या सुरक्षा से जुड़े संगठनों के रिटायर्ड अधिकारी बिना मंजूरी के अपनी संस्था से जुड़ी जानकारी नहीं छाप सकते। उन्हें एक अंडरटेकिंग साइन करनी पड़ती है, वरना पेंशन रोकी या काटी जा सकती है। रक्षा मंत्रालय के नए नियम इसी तरह की साफ प्रक्रिया लाने वाले हैं, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद न हों और राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षित रहे। यह कदम नरवणे की किताब विवाद के बाद उठाया जा रहा है।

नरवणे की किताब पर विवाद क्या?

यह किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' जनरल नरवणे की आत्मकथा है, जिसमें उन्होंने अपनी सेना सेवा और व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में लिखा है। लेकिन दावा किया गया है कि यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा है कि किताब अभी छपी नहीं है और न ही कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी बेची या बांटी गई है। जनरल नरवणे ने भी 10 फरवरी को प्रकाशक के दावे का समर्थन किया। नरवणे ने अपनी किताब पर विवाद के बीच पहली बार चुप्पी तोड़ी।

झूठ कौन बोल रहा है: राहुल

नरवणे ने मंगलवार को एक्स पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के बयान को शेयर किया और लिखा, 'यह किताब की स्थिति है।' उनका यह बयान तब आया जब राहुल ने कहा कि आख़िर झूठ कौन बोल रहा है- जनरल नरवणे या फिर पेंगुइन? हालाँकि राहुल ने जनरल नरवणे पर भरोसा जताया है।

मंगलवार दोपहर को ही संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "जनरल नरवणे ने 2023 में एक्स पर पोस्ट किया था: "हैलो फ्रेंड्स। मेरी किताब अब उपलब्ध है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग। जय हिंद!"

राहुल ने कहा, 'यह पोस्ट जनरल नरवणे की है। आप देख सकते हैं। तो या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं... लेकिन मैं पूर्व सेना प्रमुख पर भरोसा करता हूं। मुझे नहीं लगता वे झूठ बोलेंगे... या फिर पेंगुइन झूठ बोल रहा है।'

उन्होंने आगे कहा, 'किताब अमेजन पर उपलब्ध है। जनरल नरवणे ने कहा है किताब खरीदें। किताब में कुछ बातें सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं।' राहुल ने पूछा, "आप पेंगुइन पर भरोसा करेंगे या जनरल नरावणे पर? मैं जनरल नरावणे पर भरोसा करता हूं।' यह इमेज देखिए... 'नरेंद्र सरेंडर्ड?'... यही हुआ है।"
जनरल नरवणे ने मंगलवार शाम को पेंगुइन की जिस पोस्ट को साझा करते हुए बयान दिया है उसमें पब्लिशर ने सोमवार को अपने पहले आधिकारिक बयान में कहा था कि किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' अभी प्रकाशित नहीं हुई है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले हफ़्ते लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किताब के कुछ हिस्सों का जिक्र किया, जिस पर सरकार ने आपत्ति जताई। सरकार का कहना है कि अप्रकाशित किताब से उद्धरण देना गलत है।

विवाद तब और बढ़ गया था जब इस अप्रकाशित किताब के कुछ हिस्सों को सोशल मीडिया पर लीक कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि यह लीक संगठित तरीके से किया गया और किताब बिना रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के वैश्विक स्तर पर डिजिटल बाजार में पहुंच गई। पुलिस ने आपराधिक साजिश के आरोप भी लगाए हैं और प्रकाशक से सवाल पूछे जा रहे हैं।