उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान एक 23 वर्षीय मुस्लिम युवक फैज़ान की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने छह साल बाद दो दिल्ली पुलिस कर्मियों पर आरोप पत्र दाखिल किया है। हालांकि, इस चार्जशीट में हत्या (धारा 302) का आरोप शामिल नहीं किया गया है। 

सीबीआई ने हेड कांस्टेबल रविंदर कुमार और कांस्टेबल पवन यादव पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 325 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना) और 304(द्वितीय) (हत्या का इरादा न होने पर भी मौत का कारण बनना, जिसमें मौत की संभावना की जानकारी हो) के साथ धारा 34 (साझा इरादा) के तहत आरोप लगाए हैं।

यह घटना 24 फरवरी 2020 को घटी, जब फैज़ान अपनी मां किस्मतून की तलाश में घर से निकले थे, जो उस समय सीएए विरोधी प्रदर्शन स्थल पर थीं। दंगों के बीच फैज़ान पर दिल्ली पुलिस के एक समूह ने कथित तौर पर हमला किया। एक वायरल वीडियो में दिखाया गया कि सड़क किनारे घायल फैज़ान और अन्य युवकों को पुलिसकर्मियों ने घेरकर पीटा और राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर किया। वीडियो में उन्हें अपमानित करते हुए भी देखा गया। यह वीडियो लंबे समय समय तक सोशल मीडिया पर वायरल रहा। जिसमें फैज़ान और अन्य युवकों को पीटते हुए पुलिसकर्मी बोल रहे हैं- आज़ादी...आज़ादी चाहिए। बता दें कि जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी में उन दिनों वामपंथी छात्र संगठनों ने आंदोलन के दौरान नारे लगाए थे- हमें चाहिए आज़ादी, हम क्या मांगते- आज़ादी। बीजेपी ने इस नारे को देशद्रोह से जोड़ दिया था।

हमले के बाद फैज़ान को गंभीर हालत में जीटीबी अस्पताल ले जाया गया और फिर ज्योति नगर पुलिस थाने में 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया। अगले दिन रिहा होने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई और 26-27 फरवरी की रात उनकी मौत हो गई।

दिल्ली पुलिस ने शुरू में अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा और हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया था, जिसे बाद में एसआईटी को सौंपा गया। परिवार ने एसआईटी जांच को पक्षपातपूर्ण बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। जुलाई 2024 में हाईकोर्ट ने जांच को "बहुत कम, बहुत देर से" करार दिया और इसे "हेट क्राइम" की संभावना बताते हुए सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने अगस्त 2024 में नया केस दर्ज किया और अब फरवरी 2026 में आरोप पत्र दाखिल किया।

फैज़ान के भाई नदीम ने मीडिया को बताया, "मैं कानून की जटिलताएं नहीं जानता, लेकिन इतना समझता हूं कि धारा 304 दुर्घटना में मौत से जुड़ी है। यह दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क पर खुलेआम हत्या थी। वीडियो में साफ दिखता है कि फैज़ान और अन्य को कैसे पीटा गया। छह साल के इंतजार के बाद यह बेहद अन्यायपूर्ण है।"

फैज़ान की मां किस्मतून और उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने आरोप लगाया कि वीडियो में कई पुलिसकर्मी दिख रहे हैं, लेकिन केवल दो पर ही आरोप लगाए गए। वृंदा ग्रोवर ने कहा, "वीडियो में पांच या अधिक वर्दीधारी पुलिसकर्मी युवा मुस्लिमों को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करते और पीटते दिख रहे हैं। सीबीआई जांच में अन्य पुलिसकर्मियों के नाम सामने नहीं लाए गए। यह अपूर्ण जांच है और खाकी का भाईचारा एक मां के न्याय के अधिकार पर भारी पड़ रहा है। हम अदालत में इसे चुनौती देंगे।"

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 53 लोगों की मौत हुई थी और 757 मामले दर्ज किए गए थे। ये दंगे नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। परिवार अब चार्जशीट को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है, जिसमें अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल न करने और जांच को अपूर्ण बताने का मुद्दा उठाया जाएगा।