सरकार ने जिस E20 को अभी प्रयोग बताया है उसको नितिन गडकरी ने पिछले साल ही कह दिया था कि भारत में पुरानी गाड़ियों पर किए गए परीक्षणों और ब्राजील जैसे देशों में 27% एथेनॉल मिश्रण के सफल उपयोग से साबित होता है कि E20 फ्यूल पूरी तरह सुरक्षित है।
जिस E20 को पेट्रोलियम मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सुरक्षित बताते रहे हैं उन्हीं की सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग एक प्रयोग है और इसके नतीजे अगले साल तक आ सकते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में सरकार के 'प्रयोग' वाले बयान ने इस योजना को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में यह बयान तब सामने आया है जब इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी बीपीसीएल की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। बीपीसीएल ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें एक डिस्टिलरी की इथेनॉल आपूर्ति बढ़ाने की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। सरकार का कहना है कि यदि अलग-अलग कंपनियों की मांगों के आधार पर इथेनॉल आवंटन में बदलाव किया गया तो इससे पूरे देश में चल रही E20 ब्लेंडिंग योजना प्रभावित हो सकती है।
अटॉर्नी जनरल ने क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सरकार फ़िलहाल 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के प्रयोग पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'सरकार 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का प्रयोग कर रही है। इसके परिणाम अगले साल तक सामने आ जाएंगे।'
उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में इथेनॉल सप्लाई के लिए सभी अनुबंध पहले ही पूरे हो चुके हैं। यदि अब किसी एक कंपनी को अतिरिक्त आवंटन दिया गया तो अन्य कंपनियां भी अदालत का रुख करेंगी, जिससे पूरी राष्ट्रीय नीति प्रभावित हो सकती है।
अदालत में सरकार ने क्या दलील दी?
सरकार ने कहा कि अक्टूबर 2025 में इथेनॉल सप्लाई के लिए अनुबंध पूरे हो चुके थे और अब उन्हें बदलना आसान नहीं है। अटॉर्नी जनरल ने अदालत से कहा कि देशभर के कई हाईकोर्ट में इसी तरह के मामले लंबित हैं। यदि हर अदालत अलग-अलग आदेश देती है तो राष्ट्रीय स्तर की इथेनॉल नीति लागू करने में परेशानी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मामले को एक साथ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की अनुमति चाहती है ताकि अक्टूबर में नए सप्लाई अनुबंध बनने से पहले साफ़ फ़ैसला हो सके।E20 को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
देश में कई वाहन मालिक और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ लंबे समय से यह चिंता जता रहे हैं कि पुराने वाहनों के इंजन पर E20 पेट्रोल का क्या असर पड़ेगा? क्या इससे माइलेज कम होगा?
वाहन मालिकों की चिंता यह भी है कि क्या इंजन के पुर्जों को नुकसान हो सकता है? क्या वाहन की वारंटी और बीमा पर इसका प्रभाव पड़ेगा? इन्हीं सवालों को लेकर कई जगह बहस चल रही है।
सरकार का क्या दावा है?
पिछले सप्ताह केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि E20 पेट्रोल वाहनों के इंजन, वारंटी या इंश्योरेंस पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालता। इसने कहा कि सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने, माइलेज बहुत घटने, इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने आदि के दावे गलत और भ्रामक हैं। मंत्रालय ने कहा कि E20 से बेहतर एक्सेलरेशन, राइड क्वालिटी और E10 की तुलना में करीब 30% कम कार्बन उत्सर्जन होता है।
मंत्रालय ने तो यहाँ तक कहा कि E20 का इस्तेमाल भारत में वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद शुरू किया गया है और बड़े पैमाने पर इंजन फेलियर की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। यह बयान उन वायरल दावों के जवाब में आया था जिनमें E20 को इंजन के लिए हानिकारक बताया जा रहा था। मंत्रालय ने इसे ग़लत नैरेटिव क़रार दिया।
गडकरी के क्या रहे हैं दावे?
गडकरी ने पिछले साल एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं खुली चुनौती देता हूँ कि आप मुझे एक भी ऐसा वाहन दिखाएँ जिसमें E20 के कारण कोई समस्या हुई हो।' उन्होंने यह भी बताया कि भारत में पुरानी गाड़ियों पर किए गए परीक्षणों और ब्राजील जैसे देशों में 27% एथेनॉल मिश्रण के सफल उपयोग से साबित होता है कि E20 फ्यूल पूरी तरह सुरक्षित है।
सरकार ने लगातार अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू है। केंद्र सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से देश को कई बड़े लाभ मिल रहे हैं। सरकार के मुताबिक कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। अब तक लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा चुकी है। किसानों को गन्ने और अन्य फसलों से अतिरिक्त आय मिल रही है। कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है।2025 में हासिल किया था लक्ष्य
भारत ने 2025 में निर्धारित समय से पांच साल पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था। इसके बाद 1 अप्रैल 2025 से पूरे देश में E20 पेट्रोल की आपूर्ति शुरू कर दी गई। अब सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का नया लक्ष्य तय किया है।
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की आगे भी सुनवाई होगी। वहीं सरकार का कहना है कि अगले वर्ष तक E20 कार्यक्रम के व्यापक परिणाम सामने आ जाएंगे। इसी आधार पर भविष्य की रणनीति और इथेनॉल मिश्रण के अगले चरणों का मूल्यांकन किया जाएगा।