इथेनॉल पर आलोचनाओं के बीच अब केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि माइलेज में कुछ कमी हो सकती है, लेकिन यह कई वजहों से हो सकता है। कारों पर पड़ने वाले असर पर उनका बयान नहीं आया, लेकिन सरकार पहले इन दावों को खारिज करती रही है।
ई20 पेट्रोल पर हरदीप पुरी की सफाई
E20 यानी इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से कार और बाइक का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। सरकार ने पहली बार यह माना है। E20 से इंजन के ख़राब होने और माइलेज कम होने जैसी शिकायतों पर सरकार घिरी है और इस बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस पर शुक्रवार को सफाई दी। गाड़ियों पर E20 के पड़ने वाले असर को लेकर उठ रही चिंताओं को सरकार की ओर से लगातार खारिज किया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि इसमें उस तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है।
इस बीच, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान E20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल के असर पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से वाहनों को नुक़सान पहुँचने या बीमा ख़त्म होने जैसी बातें सही नहीं हैं।
हरदीप पुरी ने क्या क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरदीप सिंह पुरी से पूछा गया कि क्या E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज कम होता है। इस पर उन्होंने कहा, "कुछ लोग कह रहे हैं कि माइलेज कम होगा। अब यह अच्छी तरह स्थापित हो चुका है कि एथेनॉल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी होता है। इससे एक्सेलरेशन बेहतर होता है। इंजन की 'नॉकिंग' भी कम होती है। जहां तक माइलेज की बात है, हां, उसमें थोड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन माइलेज कई अन्य कारणों से भी थोड़ा कम हो सकता है।" यह पहली बार है जब सरकार ने सार्वजनिक रूप से माना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज में कुछ कमी आ सकती है।
सरकार का दावा- सभी पक्षों से सलाह ली
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि E20 पेट्रोल लागू करने से पहले सरकार ने ऑटोमोबाइल उद्योग और तकनीकी विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की थी। उन्होंने बताया कि सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी SIAM और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI समेत सभी संबंधित संस्थाओं से सलाह लेने के बाद ही E20 ईंधन को लागू किया गया।
बीमा को लेकर भी दिया जवाब
हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया पर चल रही उन ख़बरों का भी खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर वाहन का बीमा अमान्य हो सकता है। उन्होंने कहा,
कुछ लोग कह रहे हैं कि आपकी इंश्योरेंस कंपनी अब दावा स्वीकार नहीं करेगी। लेकिन बीमा कंपनियां पहले ही साफ कर चुकी हैं कि ऐसा कोई मामला नहीं है। हरदीप सिंह पुरी
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री
सरकार बोली- सभी तरह की तकनीकों के लिए जगह
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत जैसे बड़े बाजार में अलग-अलग तकनीकों वाले वाहन एक साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में इलेक्ट्रिक वाहन, एथेनॉल मिश्रित ईंधन वाले वाहन, हाइब्रिड वाहन और सीएनजी वाहन सभी के लिए पर्याप्त जगह है। उन्होंने बताया कि फिलहाल देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण तक पहुंच गया है। यदि भविष्य में इसे 25 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार किया जाएगा तो उससे पहले सभी ज़रूरी वैज्ञानिक परीक्षण पूरे किए जाएंगे।
E20 को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
देश में कई वाहन मालिक और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ लंबे समय से यह चिंता जता रहे हैं कि पुराने वाहनों के इंजन पर E20 पेट्रोल का क्या असर पड़ेगा? क्या इससे माइलेज कम होगा?
वाहन मालिकों की चिंता यह भी है कि क्या इंजन के पुर्जों को नुकसान हो सकता है? क्या वाहन की वारंटी और बीमा पर इसका प्रभाव पड़ेगा? इन्हीं सवालों को लेकर कई जगह बहस चल रही है।
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल मिलाया जाता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का मक़सद एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर पेट्रोलियम आयात पर ख़र्च कम करना, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और किसानों के लिए एथेनॉल उत्पादन के ज़रिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है।
क्या इसका असर सभी गाड़ियों पर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, E20 पेट्रोल का प्रभाव वाहन के मॉडल, इंजन की तकनीक, रखरखाव, ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और मौसम जैसे कई फैक्टरों पर निर्भर करता है। सरकार का कहना है कि E20 को लागू करने से पहले तकनीकी परीक्षण किए गए हैं और भविष्य में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले भी सभी ज़रूरी परीक्षण पूरे किए जाएंगे।पहले भी तय किए गए थे नए मानक
सरकार पहले ही 22%, 25%, 27% और 30% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के मानक तय कर चुकी है। साथ ही ऐसे ईंधनों को उत्पाद शुल्क से छूट भी दी गई है। हालाँकि बाद में पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ़ किया था कि इन मानकों को मंजूरी देने का मतलब यह नहीं है कि अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल को तुरंत बाजार में उतारा जाएगा। यह केवल भविष्य की तैयारी और नियामक प्रक्रिया का हिस्सा है।गडकरी के क्या रहे हैं दावे?
गडकरी ने पिछले साल एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं खुली चुनौती देता हूँ कि आप मुझे एक भी ऐसा वाहन दिखाएँ जिसमें E20 के कारण कोई समस्या हुई हो।' उन्होंने यह भी बताया कि भारत में पुरानी गाड़ियों पर किए गए परीक्षणों और ब्राजील जैसे देशों में 27% एथेनॉल मिश्रण के सफल उपयोग से साबित होता है कि E20 फ्यूल पूरी तरह सुरक्षित है।
सरकार ने लगातार अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू है। केंद्र सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से देश को कई बड़े लाभ मिल रहे हैं। सरकार के मुताबिक कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। अब तक लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा चुकी है। किसानों को गन्ने और अन्य फसलों से अतिरिक्त आय मिल रही है। कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है।
सरकार का क्या दावा है?
पिछले सप्ताह केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा था कि E20 पेट्रोल वाहनों के इंजन, वारंटी या इंश्योरेंस पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालता। इसने कहा कि सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने, माइलेज बहुत घटने, इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने आदि के दावे गलत और भ्रामक हैं। मंत्रालय ने कहा कि E20 से बेहतर एक्सेलरेशन, राइड क्वालिटी और E10 की तुलना में क़रीब 30% कम कार्बन उत्सर्जन होता है।
मंत्रालय ने तो यहाँ तक कहा कि E20 का इस्तेमाल भारत में वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद शुरू किया गया है और बड़े पैमाने पर इंजन फेलियर की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। यह बयान उन वायरल दावों के जवाब में आया था जिनमें E20 को इंजन के लिए हानिकारक बताया जा रहा था। मंत्रालय ने इसे ग़लत नैरेटिव क़रार दिया।