केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) अधिनियम और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम में 2021 के संशोधनों को वैध कानून माना जाता है, लेकिन मिश्रा को पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। नवंबर 2022 के बाद उनका कार्यकाल जारी रखने के खिलाफ अदालत ने पहले ही आदेश दे दिया था।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने हर बार संजय मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाने के लिए एफएटीएफ का हवाला दिया था। मई में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह नवंबर में रिटायर हो जायेंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से कहा था- "यह अधिकारी किसी राज्य का कोई डीजीपी जैसा नहीं है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी में देश का प्रतिनिधित्व करने वाला एक अधिकारी है और एफएटीएफ की तमाम जांच से जुड़ा हुआ है। इसलिए अदालत को उसके कार्यकाल में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और नवंबर में वो वहां नहीं होंगे।''