जेफरी एपस्टीन की कुख्यात फाइल्स में भारत से जुड़े कई प्रमुख नामों का खुलासा हो रहा है, जो राजनीतिक और व्यापारिक हलकों में हलचल मचा रहा है। इन दस्तावेजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले व्यक्तियों के उल्लेख ने सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को फैक्ट चेकर मोहम्मद ज़ुबैर ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में कई पोस्ट किए, जिसमें इन्वेस्टमेंट गुरु रवि मंथा का नाम प्रमुखता से लिया गया है। एपस्टीन फाइल्स में स्पष्ट रूप से लिखा है कि रवि मंथा ने "मोदी के साथ भारत में काम किया है।" एपस्टीन ने आमतौर से अपने टारगेट देशों में आर्थिक जगत से जुड़े लोगों से संपर्क बना रखे थे।

रवि मंथा मोदी को चुनावी और आर्थिक सलाह देने वाले विशेषज्ञों में से एक हैं। 2014 में इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, अरविंद पनगढ़िया और रवि मंथा जैसे विशेषज्ञ मोदी की चुनावी रणनीति और आर्थिक नीतियों में मदद कर रहे थे। एपस्टीन फाइल्स में एक ईमेल में मंथा ने एपस्टीन को अपनी फेसबुक आईडी शेयर की, जो स्वराज्य मैगजीन में दर्ज आईडी से मेल खाती है। यह दर्शाता है कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मंथा जैसे लोग उनके साथ जुड़े थे और चुनावी रणनीति तैयार करने में सक्रिय थे।

एपस्टीन फाइल्स, जो यौन शोषण और ट्रैफिकिंग में आरोपित अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज हैं, में भारत से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल है, जिन्होंने कथित तौर पर 2014 से 2017 के बीच एपस्टीन से कई बार मुलाकात की और "डिजिटल इंडिया" प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया। एपस्टीन ने अपने सहयोगी स्टीव बैन्नन को बताया कि "मोदी बोर्ड पर हैं," जो भारत की डिजिटल पहल से जुड़ा संकेत देता है।

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उद्योगपति अनिल अंबानी का भी जिक्र एपस्टीन फाइल्स में आ चुका है। 2017 के एक ईमेल में एपस्टीन ने लिखा कि "अनिल अंबानी, इंडिया, अप्रैल के पहले सप्ताह में न्यूयॉर्क आ रहे हैं। मुझे लगता है आपको मजा आएगा। मोदी मई में आ रहे हैं।" यह संदेश एपस्टीन के हाई-प्रोफाइल नेटवर्क को दर्शाता है, जिसमें भारतीय व्यापार और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं। बाद में एपस्टीन फाइल्स में एक और जगह अनिल अंबानी के लिए सुंदर गोरी महिला की पेशकश की बात जेफरी एपस्टीन ने किया है। दस्तावेजों में बताया गया है कि एपस्टीन की इस पेशकश का जवाब देते हुए अनिल अंबानी ने उसे लिखा कि फौरन इंतज़ाम करो।

एपस्टीन की वाइल्ड पार्टी में एलन मस्क और मार्क जुकरबर्ग
एपस्टीन से जुड़े नए दस्तावेजों में दुनिया के दो सबसे बड़े टेक दिग्गजों एलन मस्क और मार्क जुकरबर्ग के नाम ने सनसनी फैला दी है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा जारी की गई तस्वीरों और ईमेल से पता चला है कि ये दोनों दिग्गज साल 2015 में कैलिफोर्निया में आयोजित एक भव्य डिनर पार्टी में शामिल हुए थे, जिसे एपस्टीन ने खुद 'वाइल्ड' (Wild) करार दिया था।

वायरल फोटो का सच

ताजा दस्तावेजों में एक तस्वीर सामने आई है जिसमें एलन मस्क और मार्क जुकरबर्ग एक लंबी डाइनिंग टेबल पर आमने-सामने बैठे नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह फोटो खुद जेफरी एपस्टीन ने खींची थी। तस्वीर में मस्क कैमरे की ओर देख रहे हैं, जबकि जुकरबर्ग गंभीर मुद्रा में सीधे देख रहे हैं। यह तस्वीर 3 अगस्त 2015 को एपस्टीन द्वारा खुद को ईमेल की गई थी।

अन्य दिग्गज भी थे शामिल: इस हाई-प्रोफाइल पार्टी में केवल मस्क और जुकरबर्ग ही नहीं, बल्कि लिंक्डइन (LinkedIn) के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन और पेपाल (PayPal) के सह-संस्थापक पीटर थिएल भी मौजूद थे। एपस्टीन ने एक ईमेल में इस शाम का जिक्र करते हुए इसे काफी 'रोमांचक और बेलगाम' बताया था।

सजा के बाद भी संपर्क

हैरानी की बात यह है कि यह डिनर पार्टी 2015 में हुई थी, जबकि एपस्टीन को 2008 में ही नाबालिगों की तस्करी के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि सजायाफ्ता अपराधी होने के बावजूद सिलिकॉन वैली के ये दिग्गज उसके संपर्क में क्यों थे। इससे पहले भी ये संदर्भ दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार बिल गेट्स के मामले में आ चुका है। एपस्टीन के दोषी ठहराए जाने के बाद भी बिल गेट्स ने उससे मुलाकात की थी।

एलन मस्क का खंडन और चुनौती

इस खुलासे से कुछ हफ्ते पहले ही एलन मस्क ने एक्स पर दावा किया था कि वह कभी एपस्टीन की किसी पार्टी में नहीं गए। फोटो सामने आने के बाद मस्क ने स्पष्ट किया कि उनकी एपस्टीन के साथ बहुत कम बातचीत थी और उन्होंने उसके द्वीप (Little St. James) पर जाने के बार-बार दिए गए निमंत्रणों को ठुकरा दिया था। मस्क ने यहाँ तक कहा कि "असली न्याय तब होगा जब उन लोगों पर मुकदमा चलेगा जिन्होंने एपस्टीन के साथ मिलकर जघन्य अपराध किए।"
मेटा (फेसबुक) की ओर से पहले कहा गया था कि जुकरबर्ग की एपस्टीन से मुलाकात सिर्फ एक बार "औपचारिक रूप से" हुई थी और उस डिनर के बाद उनका कोई संपर्क नहीं रहा।
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दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि 2012 के एक ईमेल में मस्क ने एपस्टीन से 'सबसे वाइल्ड पार्टी' के बारे में पूछा था। हालांकि, अभी तक इन फाइल्स में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो मस्क या जुकरबर्ग को एपस्टीन के यौन तस्करी नेटवर्क या किसी अवैध गतिविधि में सीधे तौर पर शामिल करता हो।
यह खुलासा 'एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट' के तहत किया गया है, जिसके बाद से अमेरिका और यूरोप के कई बड़े राजनेताओं और उद्योगपतियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ब्रिटेन में कीर स्टार्मर की सरकार खतरे में पड़ गई है। फ्रांस में कई नेता इसकी चपेट में आ गए हैं।