Epstein files: भारतीय मीडिया में एपस्टीन फाइल्स और भारत से जुड़े मामलों की ज्यादा चर्चा नहीं है। हालांकि जेफरी एपस्टीन ने प्रधानमंत्री मोदी और स्टीव बैनन के बीच बैठकें कराने की कोशिश की थी। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भारत-इसराइल रणनीति पर अनिल अंबानी को ईमेल भेजे थे।
हाल ही में अमेरिकी हाउस ओवरसाइट कमिटी द्वारा जारी किए गए जेफरी एपस्टीन के ईमेल और कैलेंडर के दस्तावेज़ों से पता चला है कि एपस्टीन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और बड़े कारोबारियों के साथ भू-राजनीतिक संबंध बनाने की कोशिश की थी। ये खुलासे 2019 के मध्य और उससे पहले के हैं। इनमें मुख्य रूप से भारत-अमेरिका-इसराइल के बढ़ते संबंधों और चीन के खिलाफ रणनीति का ज़िक्र है। हालांकि एपस्टीन फाइल्स का संबंध राष्ट्रपति ट्रंप से ज्यादा है तो इस वजह से उसे अमेरिकी संदर्भों में ज्यादा देखा जाता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इन दस्तावेज़ों में मोदी या किसी भी भारतीय का एपस्टीन के यौन अपराधों या तस्करी नेटवर्क से कोई संबंध नहीं बताया गया है। ये सिर्फ बैक-चैनल प्रभाव डालने और मुलाकातें करवाने की कोशिशों को बताते हैं। ये खुलासे नवंबर 2025 में सामने आए हैं और भारत में राजनीतिक विवाद पैदा कर रहे हैं।
मोदी-बैनन मुलाकात करवाने की एपस्टीन की कोशिश
2019 में मोदी के दोबारा चुने जाने (23 मई) के कुछ हफ्ते बाद और अपनी गिरफ्तारी से करीब दो महीने पहले, एपस्टीन ने स्टीव बैनन (ट्रम्प के पूर्व चीफ स्ट्रैटेजिस्ट) और मोदी के बीच मुलाकात करवाने की ज़ोर-शोर से कोशिश की। एपस्टीन ने इसे चीन के खिलाफ भारत-अमेरिका के साझा हितों के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया।
एपस्टीन के कुछ मुख्य मैसेज:23 मई 2019: बैनन ने लिखा, “मैं भारत के लिए मोदी पर एक घंटे का शो कर रहा हूँ।” एपस्टीन ने जवाब दिया, “उनका फोकस सिर्फ चीन को रोकना है।”
बाद में: एपस्टीन ने लिखा, “मैं सेट कर सकता हूँ... आपको मोदी से मिलना चाहिए।” बैनन ने कहा, “प्लीज़।” एपस्टीन ने पूछा, “कब कर सकते हो?” अगले दिन: एपस्टीन ने लिखा, “मेरा आदमी कह रहा है कि तुम बहुत बड़ा मौका गंवा रहे हो। उसने लिखा है ‘मेड इन चाइना’ या ‘मेड इन इंडिया’... तुम लोग साझा टारगेट क्यों नहीं समझते?” अंत में एपस्टीन ने लिखा: “मोदी ऑन बोर्ड।”
हरदीप पुरी से मुलाकातें
एपस्टीन के कैलेंडर में हरदीप पुरी (केंद्रीय मंत्री) के साथ कम से कम पाँच मुलाकातें दर्ज हैं (जून 2014 से जनवरी 2017 तक) यानी एपस्टीन की 2008 की यौन अपराध सजा के बाद भी मुलाकातें हुईं:
जून 2014 (नॉर्वे के राजनयिक के साथ)
सितंबर-अक्टूबर 2014
फरवरी 2015 (उस समय वो भारत से आ रहे थे)
जनवरी 2016
जनवरी 2017
एक ईमेल में एपस्टीन ने “girls?” जैसा आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल किया था, लेकिन वह पूरी से सीधे जुड़ा नहीं है। पुरी ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। भाजपा ने इसे “बस नाम ड्रॉपिंग” बताया है।
अनिल अंबानी और कारोबारी कनेक्शन
एपस्टीन का अनिल अंबानी से सीधा ईमेल संपर्क था। 30 मार्च 2017 को अंबानी के लिंक्ड अकाउंट से एपस्टीन को एक लेख भेजा गया था – “ट्रम्प के फोन के बाद क्या मोदी जल्दी अमेरिका आएंगे?” और लिखा: “Dear Jeffrey, Info. BR, Anil.”एपस्टीन ने जवाब दिया: “India Israel Key- not for email.”
- यह उसी समय की बात है जब रिलायंस डिफेंस ने इसराइल की राफेल कंपनी के साथ 10 अरब डॉलर का रक्षा सौदा किया था। भारत उस साल इसराइल का सबसे बड़ा हथियार खरीदार बन गया।
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने हरदीप पुरी और सरकार से स्पष्टीकरण माँगा है। भाजपा ने इसे “झूठी और बोगस खबर” बताया। प्रशांत भूषण जैसे वकील और एक्टिविस्टों ने अंबानी के ईमेल सोशल मीडिया पर शेयर किए। ये दस्तावेज़ एपस्टीन के उस पैटर्न को दिखाते हैं जिसमें वह वैश्विक नेताओं के साथ संबंध बनाकर प्रभाव डालने की कोशिश करता था। मोदी की इसराइल से नज़दीकी और चीन-विरोधी नीति से जुड़ा पूरा दस्तावेज़ अमेरिकी हाउस ओवरसाइट कमिटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।