मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC) के इस्तीफे की मांग को लेकर किसान संगठन एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली कूच करने का ऐलान किया है। यह आंदोलन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध का हिस्सा होगा।
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले होने वाले इस प्रदर्शन में विभिन्न किसान संगठनों के शामिल होने की उम्मीद है। आंदोलन के समर्थन में देशभर के जिला, तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों पर भी एक साथ विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। यह जानकारी वरिष्ठ किसान नेता और अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के अध्यक्ष अशोक धावले ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को पत्रकारों को दी।

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर किसानों का निशाना

किसान संगठनों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। आंदोलनकारी संगठन एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। किसान नेता अशोक धावले ने कहा कि यह आंदोलन बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि किसान दमनात्मक कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। धावले के मुताबिक, इस आंदोलन में केवल किसान ही नहीं, बल्कि छात्र, युवा, महिलाएं, नागरिक समाज के संगठन और ट्रेड यूनियन भी शामिल हो सकते हैं। इस तरह एसआईआर के खिलाफ चल रहा विरोध व्यापक जनांदोलन का रूप लेने की कोशिश कर रहा है।
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26 नवंबर से अमेरिका से प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ भी आंदोलन

संयुक्त किसान मोर्चा ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के साथ-साथ कृषि और किसानों से जुड़े आर्थिक मुद्दों पर भी आंदोलन तेज करने की तैयारी की है।
अशोक धावले ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चिंता जताते हुए कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से देश के किसानों को नुकसान पहुंच सकता है। किसान संगठनों का तर्क है कि अमेरिकी कृषि क्षेत्र को मिलने वाली भारी सब्सिडी के कारण भारतीय किसान मुकाबले में पिछड़ सकते हैं।
उनके मुताबिक, यदि अमेरिकी कृषि उत्पाद बिना आयात शुल्क के भारतीय बाजार में आने लगे, तो किसानों को अपनी उपज की कम कीमत मिलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसका असर डेयरी किसानों, बागवानी से जुड़े उत्पादकों, मछुआरों और ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।
इसी मुद्दे पर संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 नवंबर से आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है।

अखिल भारतीय किसान सभा का 36वां राष्ट्रीय सम्मेलन

इस बीच, अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) का 36वां अखिल भारतीय सम्मेलन 15 से 18 नवंबर तक तेलंगाना के नलगोंडा में आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन संगठन के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। सम्मेलन की शुरुआत 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर एक बड़ी किसान रैली से होगी। आयोजकों ने इसमें लगभग एक लाख किसानों के जुटने की योजना बताई है।
अशोक धावले और किसान सभा के महासचिव विजू कृष्णन ने सम्मेलन का लोगो भी जारी किया। इसे केरल के कोझिकोड के अश्वथ माधवन ने तैयार किया है। लोगो में संघर्षरत किसानों को दिखाया गया है और पृष्ठभूमि में नागार्जुन सागर बांध को दर्शाया गया है। आयोजकों के अनुसार, यह किसानों के ऐतिहासिक संघर्षों और वर्तमान आंदोलनों के बीच निरंतरता का प्रतीक है।

किसान आंदोलन को व्यापक एकजुटता देने की तैयारी

किसान सभा के नेताओं ने कहा कि नलगोंडा को सम्मेलन स्थल के रूप में चुनने के पीछे तेलंगाना के ऐतिहासिक किसान संघर्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है। तेलंगाना सशस्त्र किसान संघर्ष सहित कई आंदोलनों ने देश में किसान संगठनों की राजनीतिक और सामाजिक चेतना को मजबूत किया है।
सम्मेलन का नारा रखा गया है- “किसानों और कृषि पर कॉरपोरेट हमलों का विरोध करो, जनता के विकल्प के निर्माण के लिए एकजुट हो।”
आयोजकों ने अन्य किसान संगठनों के नेताओं को भी सम्मेलन में संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया है, ताकि विभिन्न संगठनों के बीच एकजुटता मजबूत की जा सके। किसान सभा के नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में कृषि, किसानों की आजीविका और कॉरपोरेट नीतियों के खिलाफ संघर्ष को व्यापक बनाने की जरूरत है।

23 अक्टूबर का दिल्ली मार्च क्यों महत्वपूर्ण है?

23 अक्टूबर का प्रस्तावित मार्च ऐसे समय में हो रहा है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद तेज है। संयुक्त किसान मोर्चा की भागीदारी से इस विरोध को किसान संगठनों का समर्थन मिलेगा। जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर एक साथ प्रदर्शन करने की योजना इस आंदोलन को दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय देशव्यापी स्वरूप देने की कोशिश है। हालांकि, 23 अक्टूबर के मार्च में कितने किसान शामिल होंगे और प्रशासन की ओर से क्या व्यवस्था की जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।