भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रूसी तेल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों का खंडन नहीं किया। लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की तेल खरीद रणनीति में "राष्ट्रीय हित" और ऊर्जा सुरक्षा ही सबसे ऊपर है।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारत की तेल आयात नीति पूरी तरह से "राष्ट्रीय हितों" पर टिकी है। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का खंडन नहीं किया जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।
ट्रंप के दावे और भारत की चुप्पी
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी करते हुए भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को रद्द कर दिया था। इस आदेश में ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है और अब वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों की ओर रुख करेगा।
इस मुद्दे पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सीधे सवालों पर विदेश सचिव मिसरी ने ट्रंप के बयान की न तो पुष्टि की और न ही उसे नकारा। उन्होंने केवल इतना कहा, "चाहे वह सरकार हो या हमारा व्यापारिक क्षेत्र, हमारे निर्णयों के पीछे 'राष्ट्रीय हित' ही मुख्य वजह होती है।"
विविधता और सुरक्षा पर जोर
विदेश सचिव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति को समझाते हुए कहा कि भारत अपनी आपूर्ति के स्रोतों को विविध (Diversify) बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा: "हमारी रणनीति आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखने की है। हम जितने अधिक विविध होंगे, उतने ही सुरक्षित रहेंगे। हमारी प्राथमिकता पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य निर्धारण और आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।"
विपक्ष का हमला और संसदीय समिति की बैठक
इस बीच, भारत-अमेरिका व्यापार सौदों को लेकर देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्रंप के दावों पर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार आज मंगलवार (10 फरवरी) को वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को इस व्यापार समझौते और रूसी तेल के मुद्दे पर जानकारी दे सकती है।
रूसी तेल आयात में गिरावट
ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में रूस से भारत का तेल आयात पिछले 38 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। खबर यह भी है कि इंडियन ऑयल और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी रिफाइनरियों ने फिलहाल अप्रैल महीने के लिए रूसी तेल के अग्रिम ऑर्डर नहीं दिए हैं।
बहरहाल, विदेश सचिव के बयान से संकेत मिलता है कि भारत सीधे तौर पर रूस के साथ संबंधों पर कोई बयान देने से बच रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापार समझौतों और रूसी तेल की घटती हिस्सेदारी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।