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कश्मीर गए फ़्रांस के छह यूरोपीय सांसदों के मुसलिमों पर क्या हैं विचार?

यूरोपीय संसद के 23 सदस्यों का दल कश्मीर दौरे पर है। इसी दल में से एक है फ़्रांस के 6 सदस्यों का दल। सभी एक ही पार्टी ‘नेशनल रैली’ पार्टी से हैं। नेशनल रैली यानी आरएन जून 2018 से पहले नेशनल फ़्रंट या फ़्रंट नेशनल के नाम से जानी जाती थी। चूँकि वे सभी एक मुसलिम बहुसंख्यक राज्य का दौरा कर रहे हैं तो इनके मुसलिमों के बारे में विचार ख़ास मायने रखते हैं। आइए जानते हैं कि ‘नेशनल रैली’ पार्टी और इनके नेताओं के मुसलिमों के बारे में क्या विचार हैं। 

‘नेशनल रैली’ पार्टी घोर राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी विचारधारा वाली मानी जाती है। वह इसलाम और ‘इसलामी आतंकवाद’ का मुद्दा उठाती रही है और इसके नेता जब-तब विवादास्पद बयान देते रहे हैं। उनके बयान विवादास्पद ही नहीं, बल्कि ज़हर उगलने वाले रहे हैं। 

मरीन ल पाँ ‘नेशनल रैली’ की अध्यक्ष हैं और वह भी इस दौरे पर दल में हैं। वह फ़्रांस से यूरोपीय संसद में चुनी गई सांसद हैं। इनके साथ ही फ्रांस से चुनी गईं जूली लीचेनतो, मैक्सेट परबकस, वर्जीनिया जोरोन, फ्रांस जैमेट और निकोला बे भी कश्मीर का दौरा करने वाले दल में हैं।

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पेशे से वकील 48 वर्षीय मरीन ल पाँ देश में इमिग्रेशन यानी आव्रजन को कम करना चाहती हैं। वह अपने देश में इसलाम और ‘इसलामी आतंकवाद’ को ख़त्म करना और फ्रांस को यूरोप से बाहर निकालना चाहती हैं। इसको लेकर वह विवादों में भी रहीं। ल पाँ तब काफ़ी सुर्खियों में रही थीं जब उन्होंने मुसलिमों को लेकर बयान दिया था। 10 दिसंबर 2010 को ल्योन में उन्होंने भाषण दिया था जिसमें उन्होंने फ़्रांस के शहरों में मुसलिमों द्वारा नमाज़ पढ़ने के लिए सड़कों पर जाम लगाने को नाज़ियों द्वारा फ़्रांस पर क़ब्ज़ा करने से तुलना की थी। 

उन्होंने कहा था, ‘उन लोगों के लिए जो द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में ख़ूब बातें करना चाहते हैं, अगर यह क़ब्ज़ा करने के बारे में है तो हम इसके (सड़कों पर मुसलिम नमाज़) बारे में भी बात कर सकते हैं। क्योंकि यह क्षेत्र (नमाज की जगह वाली सड़क) पर कब्ज़ा है... यह क़ब्ज़ा उन ज़िलों और क्षेत्रों के एक हिस्से पर है जहाँ धार्मिक क़ानून लागू होते हैं...। बेशक कोई टैंक नहीं है, कोई सैनिक नहीं है, लेकिन फिर भी यह एक क़ब्ज़ा है और स्थानीय निवासियों पर इसका भारी बोझ पड़ता है।’

ल पाँ के इस भाषण की ज़बरदस्त आलोचना हुई थी। इस बयान के बाद सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने के आरोप में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। हालाँकि कोर्ट ने बोलने की आज़ादी का हवाला देकर उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था।

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मुसलिम आप्रवासियों का विरोध

शुरुआती वर्षों में पार्टी ने इमिग्रेशन यानी आव्रजन को कम करने का आह्वान किया था। ग़ैर-यूरोपीय आप्रवासियों के बहिष्कार के मुद्दे को 1978 में पार्टी में लाया गया था और 1980 के दशक में तो यह मुद्दा पार्टी के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हो गया था। नेशनल फ़्रंट का गठन मरीन ल पाँ के पिता ज्याँ मरी ल पाँ ने किया था। 1986 में मरीन पार्टी में शामिल हुईं। इसके बाद से ही पार्टी में कुछ बदलाव शुरू हुए। हालाँकि 1999 के बाद से पार्टी ने कुछ उदार छवि पेश करने की कोशिश की, लेकिन वह अभी भी अवैध, आपराधिक या बेरोज़गार आप्रवासियों को बाहर करने का समर्थन करती हैं। 

हाल के वर्षों में पार्टी आप्रवासन का विरोध करती रही है। वह विशेष रूप से अफ़्रीका और मध्य पूर्व से मुसलिम आप्रवासियों का ज़बरदस्त विरोधी रही है। कई देशों में 2011के बाद ‘अरब स्प्रिंग’ के विद्रोह के बाद मरीन ल पाँ ट्यूनीशियाई और लीबिया के आप्रवासियों के यूरोप में प्रवास को रोकने के लिए अभियान चला रही हैं।

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'इसलामी आतंकवाद' का मुद्दा 

नेशनल फ़्रंट के नेता बार-बार इमिग्रेशन को 'इसलामी आतंकवाद' से जोड़ते रहे हैं। 2011 में मरीन ल पाँ ने चेतावनी दी थी कि पूरे चेहरे को ढँकना फ्रांसीसी संस्कृति के इसलामीकरण का एक छोटा-सा नमूना है। दिसंबर 2018 में अल जज़ीरा की इंवेस्टिगेटिव यूनिट ने नेशनल फ़्रंट और यूरोप से सभी मुसलमानों के निष्कासन के लिए बने एक समूह के बीच संबंध पाया था।

2012 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान दिए एक इंटरव्यू में मरीन ने कट्टरपंथी इसलाम के जवाब में इजरायल में फ्रांसीसी यहूदियों के प्रवास का विरोध किया था। उन्होंने कहा था, ‘फ़्रांस के यहूदी फ्रांसीसी हैं, वे यहाँ घर पर हैं, और उन्हें यहाँ रहना चाहिए और वहाँ नहीं रहना चाहिए। देश समस्याग्रस्त क्षेत्रों में कट्टरपंथी इसलाम के बढ़ने का समाधान करने के लिए बाध्य है।’

जो सांसद जम्मू-कश्मीर के दौरे पर आए हैं इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी सांसद निजी दौरे पर हैं, वे यूरोपीय संघ या यूरोपीय संसद की ओर से नहीं भेजे गए हैं। इसका क्या मतलब है? वे किस तरह की तसवीर दुनिया के सामने पेश करेंगे?

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