मोदी सरकार पर लगातार यह आरोप लगता रहा है कि वह विरोध या असहमति की आवाज़ को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है और आवाज़ को कुचलने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल कर रही है।
भारत सरकार की नीतियों को भेदभाव करने वाला बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारों, ग़ैर सरकारी संगठनों और सरकार की आलोचना करने वालों का उत्पीड़न बढ़ा है।