अमेरिका स्थित India Hate Lab की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरती भाषणों में 13% की वृद्धि दर्ज की गई। पढ़िए, रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया है।
भारत में मुसलमानों और ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हेट स्पीच यानी नफरती भाषण में 2025 में 13% की बढ़ोतरी हुई है। वाशिंगटन स्थित रिसर्च ग्रुप
इंडिया हेट लैब ने अपनी सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में कुल 1318 ऐसे मामले दर्ज किए गए जो 2024 के 1165 से ज्यादा है और 2023 के 668 मामले से लगभग दोगुने हैं। औसतन हर दिन 4 ऐसे घटनाएँ हुईं। अधिकतर में मुसलमानों को निशाना बनाया गया।
98% मामले मुसलमानों के ख़िलाफ़
रिपोर्ट बताती है कि इनमें से 98% मामले मुसलमानों के खिलाफ थे। 308 भाषणों यानी क़रीब 23% मामलों में तो सीधे हिंसा की अपील की गई, जबकि 136 में हथियार उठाने की बात कही गई। हिंसा की अपील में 19% की बढ़ोतरी हुई। सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए, जहाँ 266 घटनाएं हुईं। उसके बाद महाराष्ट्र में 193, मध्य प्रदेश में 172, उत्तराखंड में 155 और दिल्ली में 76 का नंबर आता है। इन राज्यों में से ज्यादातर बीजेपी शासित हैं।
'मोदी की कर्मभूमि यूपी में सबसे ज़्यादा'
कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'वाशिंगटन स्थित इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट में पाया गया कि 2025 में भारत में दर्ज 88% एंटी-माइनॉरिटी हेट स्पीच घटनाएं बीजेपी शासित राज्यों में हुईं। 1318 में से 98% मुसलमानों को निशाना बनाया गया। 308 भाषणों में हिंसा की अपील थी, जबकि 136 में हथियार उठाने की बात कही गई। हिंसा की अपील 19% बढ़ी।'
उन्होंने आगे कहा, 'मोदी जी की कर्मभूमि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 266 मामले। सबसे बड़ी विडंबना- कानून-व्यवस्था के लिए सीधे जिम्मेदार अमित शाह जी हेट स्पीच चलाने वालों में छठे नंबर पर हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र की दुखद हकीकत है।'88% मामले बीजेपी शासित राज्यों में
इंडिया हेट लैब के मुताबिक़, कुल 1318 में से 1164 घटनाएँ यानी 88% बीजेपी शासित राज्यों या इसके गठबंधन वाले राज्यों में हुईं। वहीं, विपक्षी दलों के शासित 7 राज्यों में सिर्फ़ 154 मामले थे, जो 2024 से 34% कम हैं। रिपोर्ट कहती है कि नफरती भाषण अब चुनावों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह साल भर चलने वाली सामान्य बात बन गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी और बजरंग दल 289 नफ़रती भाषण वाले इवेंट से जुड़े रहे। सबसे ज्यादा भाषण देने वालों में से एक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं और उन्होंने 71 नफ़रती भाषण दिये। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रमुख प्रवीण तोगड़िया ने 46 और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने 35 ऐसे भाषण दिए हैं।
अल्पसंख्यकों के लिए अमानवीय भाषा का इस्तेमाल
141 भाषणों में अमानवीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसमें अल्पसंख्यकों के लिए 'दीमक', 'परजीवी', 'कीड़े', 'सूअर', 'पागल कुत्ते', 'सांप के बच्चे', 'हरे सांप', और 'खून के प्यासे ज़ॉम्बी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। लगभग आधे भाषणों यानी 656 मामलों में 'लव जिहाद', 'लैंड जिहाद', 'पॉपुलेशन जिहाद', 'थूक जिहाद', 'एजुकेशन जिहाद' जैसी साजिश थ्योरी का जिक्र था। यह 2024 से 13% ज्यादा है। ईसाइयों के खिलाफ भी नफरत बढ़ी, जहां 162 मामले यानी 41% बढ़ोतरी दर्ज हुई।
रिपोर्ट में अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा 158 घटनाएं बताई गई हैं, जो राम नवमी जुलूस और पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुईं। 22 अप्रैल से 7 मई के बीच भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान 98 मामले दर्ज हुए।
रिपोर्ट इंडिया हेट लैब के फाउंडर अमेरिका स्थित कश्मीरी पत्रकार राकिब हामिद नायक द्वारा तैयार की गई है। यह सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट का प्रोजेक्ट है। ग्रुप संयुक्त राष्ट्र की हेट स्पीच की परिभाषा का इस्तेमाल करता है, जिसमें धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता आदि के आधार पर भेदभावपूर्ण भाषा शामिल है।
मानवाधिकार संगठन जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच कहते हैं कि 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं। वे नागरिकता कानून, एंटी-कन्वर्जन कानून, कश्मीर की स्पेशल स्टेटस हटाने और मुस्लिम संपत्तियों में तोड़-फोड़ करने का ज़िक्र करते हैं।
बीजेपी रिपोर्ट को पहले बताती रही है पक्षपाती
ताज़ा रिपोर्ट पर तो बीजेपी की प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकन बीजेपी पहले आरोप लगाती रही है कि इंडिया हेट लैब भारत की पक्षपाती तस्वीर पेश करती है। बीजेपी कहती है कि खाद्य सब्सिडी और बिजली पहुंचाने के कार्यक्रम जैसी उनकी नीतियां सभी समुदायों के लिए फायदेमंद हैं। अमेरिका में भारतीय दूतावास ने रिपोर्ट पर टिप्पणी के लिए रायटर्स द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब नहीं दिया।
बहरहाल, यह रिपोर्ट भारत में धार्मिक सद्भाव और लोकतंत्र पर सवाल उठाती है।