ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत पर पूरी दुनिया से प्रतिक्रिया मिल रही है तो भारत सरकार चुप क्यों है? ख़ामेनेई की मौत की रूस, चीन, बांग्लादेश जैसे कई देशों ने निंदा की तो कई देशों ने खुशी जताई। लेकिन भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सिर्फ 'संयम बरतने' की अपील के रूप में आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इतना ही कहा है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता ज़रूरी है। तो सवाल है कि ख़ामेनेई की मौत या फिर ईरान पर हमले को लेकर मोदी सरकार ने कुछ क्यों नहीं बोला?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले इस पूरे घटनाक्रम को जान लें। आयतुल्ला ख़ामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उन्होंने ईरान को क्षेत्रीय ताक़त बनाया, लेकिन अमेरिका और इसराइल से दुश्मनी बढ़ाई। 28 फरवरी को तेहरान के पास हमलों में उनकी मौत हो गई। ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया और अमेरिका-इसराइल पर हमला बोला।
ख़ामेनेई को ईरान ने 'शहीद' बताया है। ईरान ने इस हमले की कड़ी निंदा की और बदला लेने की धमकी दी। लेकिन भारत सरकार ने अब तक इस मौत की आधिकारिक निंदा नहीं की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सिर्फ शांति और संवाद की अपील की है, वह भी बिना किसी पक्ष का नाम लिए। कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार पर हमला बोला है और कहा है कि भारत 'कमजोर' दिख रहा है।

भारत में कुछ शिया संगठनों ने शोक मनाया और विरोध प्रदर्शन किए। कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी ने ख़ामेनेई की मौत की निंदा की और सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने इसे 'नैतिक नेतृत्व की कमी' और 'अमेरिका-इसराइल से डर' कहा। कुछ ने इसे 'भारत की परंपरागत विदेश नीति के साथ धोखा' बताया। ईरानी दूतावास ने भी भारत से चुप न रहने की अपील की। तो सवाल है कि सरकार चुप क्यों है?

भारत की चुप्पी के पाँच मुख्य कारण

ख़ामेनेई की मौत पर निंदा न करने के पीछे कई वजहें हैं। आइए, आपको बताते हैं कि आख़िर ये पाँच बड़ी वजहें क्या हो सकती हैं-

1. अमेरिका, इसराइल से मज़बूत रिश्ते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने इसराइल के साथ रक्षा और तकनीक में गहरे संबंध बनाए हैं। इसराइल से भारत हथियार और ड्रोन खरीदता है। युद्ध शुरू होने से ऐन पहले पीएम मोदी ने इसराइल की यात्रा की थी और बेंजामिन नेतन्याहू से मिले थे। उनकी इस यात्रा की इसलिए काफी आलोचना की गई कि युद्ध के माहौल के बीच उन्होंने इसराइल की यात्रा की और इसके लिए अचानक योजना कैसे बन गई।

अमेरिका भारत का बड़ा व्यापारिक साथी है। प्रधानमंत्री मोदी खुद ट्रंप को अपना दोस्त बताते रहे हैं और ट्रंप भी पीएम मोदी के लिए ऐसा ही कहते हैं। कांग्रेस मोदी सरकार पर ट्रंप से डरने का आरोप लगाती है। इसी बीच अब ईरान पर हमले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि भारत ख़ामेनेई की मौत की निंदा करता तो ये रिश्ते ख़राब हो सकते थे।

मोदी सरकार ने यूएई पर ईरान के हमलों की निंदा की, जो इसराइल के क़रीब है, लेकिन ख़ामेनेई पर चुप रही।

2. मध्य पूर्व में तटस्थता बनाए रखना

भारत मध्य पूर्व के झगड़ों में नहीं पड़ना चाहता। यहां लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा ज़रूरी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कई देशों से बात की और भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन लिया। माना जा रहा है कि निंदा करने से भारत किसी एक पक्ष में फँस जाता, जो उसकी 'गैर-पक्षपातपूर्ण' नीति के ख़िलाफ़ है। हालाँकि, एक तर्क यह दिया जा रहा है कि ईरान भारत का पुराना साथी रहा है और यह भी कि ख़ामेनेई की मौत के बाद मुस्लिम वर्ल्ड में उनके प्रति सहानुभूति है इसलिए भारत उनकी मौत पर बोल सकता था।

3. ईरान के साथ जटिल संबंध

ईरान से भारत तेल खरीदता है और चाबहार बंदरगाह पर काम करता है, लेकिन ईरान पाकिस्तान का दोस्त है और कभी-कभी भारत विरोधी गुटों को समर्थन देता है। ख़ामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने इसराइल विरोधी नीति अपनाई, जो मोदी सरकार की नीति से टकराती। निंदा न करके मोदी सरकार ने अपने संबंधों को संतुलित रख रहा है।

4. आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा

भारत सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों से ज्यादा तेल आयात करता है, जो अमेरिका और इसराइल के क़रीब हैं। अगर भारत ईरान की तरफ़ झुकता, तो ये देश नाराज़ हो सकते थे। मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से बात की और हमलों की निंदा की, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए है।

5. घरेलू राजनीति और वैश्विक छवि

भारत में शिया मुस्लिम समुदाय है, जो ख़ामेनेई की मौत से दुखी है, लेकिन मोदी सरकार पर आरोप लगता रहा है कि वह बहुमत के हित देखती है। विपक्ष मोदी पर हमला कर रहा है, लेकिन सरकार अपनी 'मजबूत' छवि बनाए रखना चाहती है। निंदा करने से मोदी सरकार की अपनी नीति पर कमजोर दिख सकती थी, इसलिए शांति की अपील करके बीच का रास्ता निकाला।

माना जा रहा है कि मोदी सरकार की चुप्पी डिप्लोमेसी की वजह से भी है। अगर संघर्ष बढ़ा, तो भारत भारतीयों को निकालने की योजना बना रहा है। ईरान में नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन हमले जारी हैं। भारत दुनिया भर में शांति की अपील कर रहा है।