भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज गुरुवार 5 मार्च को ईरान के दूतावास में जाकर ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और ईरान के लोगों के प्रति गहरी संवेदना जताई। इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर भी खामेनेई की हत्या पर शोक जताया। यह भारत की ओर से इस घटना पर पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है। हालांकि पीएम मोदी या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से कोई शोक नहीं जताया गया है।
अयातुल्लाह खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में हुई थी। ईरानी राज्य मीडिया ने रविवार को उनकी मौत की पुष्टि की। इन हमलों में खामेनेई के केंद्रीय परिसर को निशाना बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 200 लोगों की मौत हुई और क्षेत्रीय खाड़ी देशों में संघर्ष फैल गया। इस हमले में खामेनेई के अलावा उनकी पत्नी, दामाद-बेटी, नतिनी और पोते की भी हत्या कर दी गई।

भारत ने अब तक इस संघर्ष पर तटस्थ रुख अपनाया है, लेकिन विदेश सचिव मिस्री के कदम से संकेत मिलता है कि नई दिल्ली ईरान के साथ राजनयिक संबंधों को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना मिडिल ईस्ट की जियो पॉलिटिक्स को बदल सकती है, और भारत जैसे देशों को ऊर्जा सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है। ईरान के साथ भारत के मजबूत आर्थिक संबंध रहे हैं।
ताज़ा ख़बरें
इस घटना से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25-26 फरवरी 2026 को इसराइल की दो दिवसीय राजकीय यात्रा की थी। यह उनकी 2017 के बाद दूसरी यात्रा थी, जिसमें दोनों देशों ने संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया, रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार और नवाचार पर 16 समझौते और 11 संयुक्त पहल की घोषणा की। मोदी ने इसराइली संसद (Knesset) को संबोधित किया और यद वाशेम (होलोकॉस्ट स्मारक) का दौरा किया।

मोदी की इसराइल यात्रा के दौरान मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा था, और अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा था। मोदी की वापसी के महज 48 घंटे बाद (28 फरवरी) इसराइल ने हमले शुरू किए, जिसमें अमेरिका ने भी भाग लिया। इसराइल के भारत में राजदूत रेयुवेन अज़ार ने कहा कि हमले की योजना काफी पहले से थी, लेकिन 'ऑपरेशनल अवसर' मोदी के जाने के बाद ही मिला, और सुरक्षा कैबिनेट ने शनिवार सुबह मंजूरी दी।

विपक्ष का कड़ा विरोध

भारत के विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने मोदी की यात्रा को 'असमय' और 'शर्मनाक' बताया। कांग्रेस ने कहा कि यह यात्रा इसराइल के हमले को 'भारतीय समर्थन' देने जैसी लगती है। यह भारत की यूएन और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता के विपरीत है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इसे 'भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ विश्वासघात' करार दिया। सोनिया गांधी ने सरकार की 'चुप्पी' को 'तटस्थता नहीं, बल्कि त्याग' बताया और खामेनेई की हत्या की निंदा की मांग की। प्रियंका गांधी ने इसे 'घृणित' कहा। अन्य विपक्षी नेता जैसे असदुद्दीन ओवैसी और कम्युनिस्ट पार्टी ने भी मोदी सरकार पर 'तटस्थता खोने' का आरोप लगाया।

मोदी सरकार की प्रतिक्रिया और चुप्पी पर सवाल

मोदी सरकार ने हमलों या खामेनेई की मौत पर कोई स्पष्ट निंदा नहीं की। मोदी ने 1 मार्च को इसराइल के पीएम नेतन्याहू और यूएई के नेताओं से बात की, जहां उन्होंने ईरान के हमलों की निंदा की (यूएई पर ईरानी हमलों का जिक्र करते हुए) और शीघ्र शत्रुता समाप्त करने की अपील की। उन्होंने मध्य पूर्व की स्थिति पर 'गहरी चिंता' और 'गंभीर चिंता' जताई, लेकिन खामेनेई की मौत पर व्यक्तिगत या राष्ट्रपति स्तर पर कोई बयान नहीं आया।

देश से और खबरें
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा (ईरान से तेल आयात), चाबहार बंदरगाह, इसराइल के साथ रक्षा सहयोग और अमेरिका से रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आज विदेश सचिव का कदम एक सूक्ष्म बदलाव दिखाता है, लेकिन पीएम मोदी और राष्ट्रपति की चुप्पी पर विपक्ष का हमला जारी है।